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कुशीनगर: दूसरे के गुनाह की सजा काट रहे शख्स को कोर्ट ने किया दोषमुक्त, पांच साल से जेल में था बलवीर

Wed, 06 Apr 2022 10:33 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर।
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर। Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Wed, 06 Apr 2022 10:33 AM IST
सार

अधिवक्ता विजय कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी प्रथम मदनमोहन ने इस मामले में विवेचक की भूमिका की जांच करने का भी निर्देश दिया है। उन्होंने बताया कि ड्रग डिस्पोजल कमेटी (एनडीपीएस एक्ट से संबंधित कमेटी) इस मामले में विवेचक की भूमिका की गहन जांच कर कार्रवाई कर सकती है।

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The court acquitted the person serving the sentence of another crime
दोषमुक्त हुए बलवीर सिंह। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

कुशीनगर जिला एवं सत्र न्यायालय के अपर सत्र न्यायालय फास्ट ट्रैक कोर्ट में एक ऐसा मामला सामने आया, जो अक्सर फिल्मों में ही देखने को मिलता है। वर्ष 2015 में सड़क पर लावारिस हाल में कार में काले रंग की पॉलिथीन में 125 पैकेट (64 किलो 100 ग्राम) डूडा अफीम मिलने और दो साल बाद इसी क्षेत्र में पांच किलोग्राम गांजा के साथ पकड़े जाने के आरोप में जून 2017 से एक ऐसा व्यक्ति सजा काट रहा था, जिसकी न तो वह गाड़ी थी और न ही असल में वह व्यक्ति था। न्यायालय में विवेचक और गवाह उसे दोषी होने का साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके, वहीं सजा काटने वाले व्यक्ति के बेटे और रिश्तेदार की तरफ से पहचान करने के बाद न्यायालय ने दोषमुक्त कर दिया।

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बचाव पक्ष की ओर से इस मुकदमे की पैरवी कर रहे अधिवक्ता विजय कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि वर्ष 2015 में एनएच-28 पर कसया थाना क्षेत्र के प्रेमवलिया गांव के पास एक कार क्षतिग्रस्त हाल में मिली थी। जांच में पुलिस को उसमें अलग-अलग जगह 125 पैकेट डूडा अफीम मिली थी। गाड़ी के नंबर प्लेट लटके हुए थे। अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी थी। नंबर के आधार पर गाड़ी पंजाब के कल्याण गुरुद्वारा, इंदौर निवासी हरमेल सिंह नाम से निकली थी। पुलिस ने उस व्यक्ति की खोजबीन की, लेकिन वह नहीं मिला। उसके बाद वारंट और कुर्की का आदेश हुआ था।
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अधिवक्ता ने बताया कि जून 2017 में कसया थाना क्षेत्र के जैन धर्मकांटा के पास एक व्यक्ति पांच किलोग्राम गांजा के साथ पकड़ा गया। इस व्यक्ति का नाम भी वही था, जो कार मालिक का था। पुलिस ने दोनों मामलों में केस दर्ज कर पकड़े गए व्यक्ति को जेल भेज दिया। बाद में उस व्यक्ति ने जेलर को बताया कि उसका नाम हरमेल नहीं, बल्कि बलवीर सिंह है। वह पंजाब के संगरुर जिले के मलेर कोटला का रहने वाला है। उन्होंने आर्थिक स्थिति ठीक न होने की बात कहते हुए सरकारी खर्चे पर मुकदमा लड़ने की मांग की थी। इसके बाद जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की संस्तुति पर डूडा अफीम के मामले की पैरवी के लिए विजय कुमार विश्वकर्मा और गांजा के मामले में अजय कुमार राय को बलवीर का अधिवक्ता नामित किया गया।
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अधिवक्ता ने बताया कि इस मुकदमे की सुनवाई के दौरान सोमवार को अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी प्रथम मदनमोहन के समक्ष विवेचक, सभी गवाह और बलवीर की शिनाख्त के लिए उनके पुत्र और एक रिश्तेदार प्रस्तुत हुए। विवेचक और गवाह बलवीर सिंह का दोष साबित नहीं कर पाए। उधर, बलवीर के पुत्र और रिश्तेदार ने उन्हें हरमेल सिंह की जगह बलवीर सिंह बताया। उनकी पहचान से संबंधित प्रमाण प्रस्तुत किए। इसके बाद न्यायाधीश ने बलवीर सिंह को दोषमुक्त करते हुए जेल से रिहा करने का आदेश दिया। अधिवक्ता ने बताया कि मंगलवार को बलदेव सिंह को जेल से रिहा कर दिया गया।

ड्रग डिस्पोजल कमेटी को जांच की जिम्मेदारी

अधिवक्ता विजय कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी प्रथम मदनमोहन ने इस मामले में विवेचक की भूमिका की जांच करने का भी निर्देश दिया है। उन्होंने बताया कि ड्रग डिस्पोजल कमेटी (एनडीपीएस एक्ट से संबंधित कमेटी) इस मामले में विवेचक की भूमिका की गहन जांच कर कार्रवाई कर सकती है।

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