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Kushinagar News: कागजों में नहर, जमीन पर किसान उगा रहे फसल

Wed, 24 Dec 2025 12:32 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Wed, 24 Dec 2025 12:32 AM IST
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The canal exists only on paper, while farmers are growing crops on the land.
मनिकौरा गांव में मठिया शाखा नहर की भूमि पर फसल उगा रहे किसान।संवाद
पडरौना/मंसाछापर। यूपी-बिहार की सीमा से गुजरी बांसी नदी में अविरल जलप्रवाह के लिए प्रशासनिक कवायद शुरू हो चुकी है। इसके लिए जलप्रवाह को बाधित करने वाले अवरोधों को चिह्नित किया जा रहा है। इस दौरान जांच में विशुनपुरा ब्लॉक के पखनहा गांव से निकले चैती रजवाहा की जमीन पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण मिला है। जल प्रवाह में यह बड़ी बाधा है।
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चैती रजवाहा मनिकौरा गांव के पास जमैती चवर में आकर समाप्त हो रही है, जबकि सिंचाई विभाग के नक्शे में इस रजवाहे को आगे बांसी नदी से जुड़ा हुआ दिखाया गया है। जांच में तथ्य सामने आया है कि करीब 1.300 किलोमीटर रजवाहा की भूमि पर पिछले कई वर्षों से किसान कब्जा कर उसमें खेती रहे हैं।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इस राजवाहे की खोदाई कर इसे सीधे बांसी नदी से जोड़ दिया जाए तो बांसी नदी में सालभर पानी बना रह सकता है लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते आज तक इस ओर किसी का ध्यान नहीं गया। बांसी बचाओ संघर्ष समिति और ब्लॉक स्तर से इस मामले की रिपोर्ट कई बार डीएम को भेजी जा चुकी है लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। गांव के लोगों का कहना है कि जब तक रजवाहा की अतिक्रमित भूमि पर नहर की खोदाई नहीं होगी, तब तक बांसी नदी को रजवाहे से जोड़ने की योजना केवल कागजों तक ही सीमित रहेगी।
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जानकारी के मुताबिक वर्ष 1985 में नहर के लिए प्रशासन ने किसानों से जमीन ली थी। इसके लिए उन्हें मुआवजा भी दिया गया था। कई किसानों को उस भूमि के बदले दूसरे जगह पट्टे की जमीन दी गई थी, इसके बावजूद विभाग ने रजवाहे की खुदाई नहीं कराई। नतीजतन आज बड़ी संख्या में किसान उस भूमि पर खेती कर रहे हैं और नहर का अस्तित्व केवल रिकॉर्ड में रह गया है। वर्तमान में 30 से अधिक किसान कई एकड़ चैती रजवाहा की भूमि पर फसल उगाए हैं।




एक जिला एक नदी योजना में चयनित है बांसी


बांसी नदी के संरक्षण के लिए इसे ‘एक जिला-एक नदी’ योजना में चयन किया गया है। इसमें वर्ष भर जलप्रवाह बना रहे इसके लिए उपाय किए जा रहे हैं। इसमें मौजूद जलकुंभी और सिल्ट आदि की सफाई कराने के साथ टॉस्क फोर्स का गठन कर नदी के जीर्णोद्धार कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि उसमें निरंतर जलप्रवाह बना रहे।



बांसी नदी छितौनी बुलहवा से गंडक से निकलकर नकहवा, चिनबरदहा, पडरही, त्रिलोकपुर, बांसी के रास्ते बिहार में प्रवेश कर जाती है। इस तरह 114 किलोमीटर की दूरी तय कर यह नदी पुन: यूपी के सेवरही ब्लॉक स्थित पिपरा घाट के पास गंडक नदी में विलीन हो जाती है। यह नदी अपने उद्गम स्थल से 84 किलोमीटर तक सिल्ट और जलकुंभी से पटी पड़ी है। शेष हिस्सा साफ है, जहां निरंतर जलप्रवाह बना रहता है। इस नदी के शून्य से 60 किलोमीटर तक सिंचाई खंड द्वितीय और 60 किलोमीटर से 114 किलोमीटर तक का हिस्सा बाढ़ खंड की देखरेख में है। एक जिला एक नदी योजना के तहत इस नदी के चयन होने के बाद नदी की सफाई समेत इसमें निरंतर जलप्रवाह बन रहे इसके लिए योजना बनाई जा रही है। कौन-कौन सी नदी, नहर और बरसाती नाले का पानी बांसी नदी में लाया जा सकता है, इसकी व्यवस्था कराई जाएगी और प्रथम चरण में बांसी में गिरे झरही नाला से कटाई भरपुरवा तक सफाई करने के निर्देश दिए गए हैं।



बांसी नदी का यह है पौराणिक महत्व

बांसी नदी का इतिहास अतिप्राचीन है। त्रेतायुग में इस पौराणिक नदी का उद्भव तब हुआ, जब भगवान श्रीराम ने विवाह के बाद बरातियों के साथ रामघाट पर रात्रि विश्राम किया। वहां जल की कोई व्यवस्था नहीं थी। श्रीरामजानकी मंदिर रामघाट के महंथ गोपाल दास ने बताया कि भगवान श्रीराम के अतिप्राचीन नदी नारायणी से एक जल स्रोत की मांग पर माता नारायणी ने एक जल स्रोत प्रदान किया जो नारायणी नदी से निकलकर रामघाट बांसी होते हुए पिपरा घाट नारायणी में समाहित हो जाती है। इसी जल स्रोत के किनारे रामघाट व बांसी घाट स्थित है। इसीलिए इस जल स्रोत का नाम बांसी नदी के रूप में विख्यात है। बांसी नदी तट पर स्थित रामघाट बांसी व शिवाघाट और पिपरा घाट पर बांसी नदी में स्नान करने के लिए लाखों श्रद्धालु आते हैं।




नदी में जलप्रवाह के लिए दूर होगी हर बाधा




सीडीओ वंदिता श्रीवास्तव ने कहा कि बांसी नदी के पौराणिक महत्व को देखते हुए उसे एक जिला एक नदी योजना के रूप में विकसित किया गया है। इस नदी में निरंतर जलप्रवाह बना रहे, इसके लिए हर संभव उपाय किए जा रहे हैं। नदी में वर्ष भर जलप्रवाह बनाने के लिए इसमें आने वाली हर बाधा दूर कराई जाएगी। जिला प्रशासन की तरफ से व्यापक रूप से सर्वे कराने के साथ अधिकारियों की टीम लगाई गई है। बहुत जल्द सुखद परिणाम सामने आएंगे।
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