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Kushinagar News: हादसे ने छीन लीं दो परिवारों की खुशियां
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कोटवा सीएचसी जुटे ग्रामीणों की भीड़,संवाद
पकड़ियार बाजार। नेबुआ नौरंगिया थाना क्षेत्र में हुए बाइक हादसे ने दो परिवारों की खुशियां छीन लीं। हादसे में जहां एक परिवार ने अपने कमाऊ बेटे को खो दिया, वहीं दूसरे परिवार का बेटे को इंजीनियर बनने का सपना भी हादसे की भेंट चढ़ गया। दोनों युवकों की मौत की खबर मिलते ही उनके गांवों में मातम पसर गया। कोटवा सीएचसी पर परिजनों और ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। परिजनों के विलाप से अस्पताल का माहौल गमगीन हो गया।
रामपुर निवासी छांगुर किसान हैं। उन्होंने बेटे सत्यम (23) को इंजीनियर बनाने का सपना संजोया था। सत्यम लखनऊ के एक कॉलेज से एमटेक की पढ़ाई कर रहे थे। कुछ दिन पहले वह घर आए थे। सोमवार को दवा लेने के लिए महराजगंज गए थे। वहां से बाइक से घर लौटते समय हादसे का शिकार हो गए। हादसे में उनकी मौत हो गई।
जवान बेटे की मौत की खबर सुनकर पिता छांगुर बदहवास हो गए। सत्यम दो भाइयों में बड़े थे और अभी उनकी शादी भी नहीं हुई थी। बेटे के भविष्य को लेकर परिवार ने जो सपने संजोए थे, वे एक झटके में बिखर गए।
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वहीं, देवतहा बाली निवासी नंदू विश्वकर्मा रायपुर स्थित एक ईंट-भट्ठे पर ट्रैक्टर चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते थे। मजदूरी से होने वाली आमदनी ही परिवार का सहारा थी। नंदू की मौत के बाद पत्नी और तीन बच्चों के सामने जीवन-यापन का संकट खड़ा हो गया है। उनके दो बेटे और एक बेटी अभी नाबालिग हैं। परिवार की जिम्मेदारी संभालने वाले नंदू की मौत ने बच्चों के भविष्य पर भी सवाल खड़ा कर दिया है।
दोनों युवकों की मौत के बाद कोटवा सीएचसी पर रामपुर और देवतहा बाली गांव के लोगों की भीड़ जुट गई। परिजनों के रोने-बिलखने से अस्पताल का माहौल बेहद गमगीन रहा। जवान मौत की पीड़ा देख वहां मौजूद लोगों की आंखों से भी आंसू छलक पड़े। अचानक उमड़ी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
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रामपुर निवासी छांगुर किसान हैं। उन्होंने बेटे सत्यम (23) को इंजीनियर बनाने का सपना संजोया था। सत्यम लखनऊ के एक कॉलेज से एमटेक की पढ़ाई कर रहे थे। कुछ दिन पहले वह घर आए थे। सोमवार को दवा लेने के लिए महराजगंज गए थे। वहां से बाइक से घर लौटते समय हादसे का शिकार हो गए। हादसे में उनकी मौत हो गई।
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जवान बेटे की मौत की खबर सुनकर पिता छांगुर बदहवास हो गए। सत्यम दो भाइयों में बड़े थे और अभी उनकी शादी भी नहीं हुई थी। बेटे के भविष्य को लेकर परिवार ने जो सपने संजोए थे, वे एक झटके में बिखर गए।
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वहीं, देवतहा बाली निवासी नंदू विश्वकर्मा रायपुर स्थित एक ईंट-भट्ठे पर ट्रैक्टर चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते थे। मजदूरी से होने वाली आमदनी ही परिवार का सहारा थी। नंदू की मौत के बाद पत्नी और तीन बच्चों के सामने जीवन-यापन का संकट खड़ा हो गया है। उनके दो बेटे और एक बेटी अभी नाबालिग हैं। परिवार की जिम्मेदारी संभालने वाले नंदू की मौत ने बच्चों के भविष्य पर भी सवाल खड़ा कर दिया है।
दोनों युवकों की मौत के बाद कोटवा सीएचसी पर रामपुर और देवतहा बाली गांव के लोगों की भीड़ जुट गई। परिजनों के रोने-बिलखने से अस्पताल का माहौल बेहद गमगीन रहा। जवान मौत की पीड़ा देख वहां मौजूद लोगों की आंखों से भी आंसू छलक पड़े। अचानक उमड़ी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी।