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Kushinagar News: अपनी ही अदालत में फंसे तहसीलदार, बचने के लिए साक्ष्यों से की छेड़छाड़
Sun, 10 May 2026 02:28 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sun, 10 May 2026 02:28 AM IST
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कप्तानगंज। तहसीलदार चंदन शर्मा अपनी मां के नाम से बैनामा ली जमीन के खारिज दाखिल में इतनी जल्दबाजी दिखाई कि वे अपने ही आदेश में फंसते जा रहे हैं। 6 मार्च को जमीन का बैनामा तहसीलदार की मां निर्मला शर्मा के नाम से हुआ और नौ मार्च को तहसीलदार कोर्ट में खारिज दाखिल के लिए वाद दाखिल हुआ।
11 मार्च सुनवाई शुरू हुई और 20 मार्च को खारिज दाखिल का आदेश हो गया। तहसीलदार ने इस मामले की 11,12, 13, 17, 19 और 20 मार्च को लगातार सुनवाई की। मामला उजागर होने के बाद खुद के बचाव में साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ शुरू कर दी हैं। इसकी भी शिकायत उच्चाधिकारियों तक पहुंच गई है।
तहसील क्षेत्र के ग्राम बसहिया उर्फ कप्तानगंज के विक्रेता चंद्रिका ने गाटा संख्या 2706 में तहसीलदार कप्तानगंज चंदन शर्मा की मां निर्मला शर्मा पत्नी रामाश्रय निवासी बास देवरिया को 6 मार्च 2026 को साढ़े सोलह डिस्मिल जमीन बैनामा की। बैनामा के बाद खारिज दाखिल के लिए नौ मार्च को तहसीलदार कोर्ट में वाद दाखिल हुआ। 11 मार्च से सुनवाई शुरू कर 20 मार्च 2026 को खारिज दाखिल का आदेश कर दिया गया। खतौनी में निर्मला शर्मा पत्नी रामाश्रय शर्मा निवासी बांस देवरिया का नाम दर्ज हो गया।
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विक्रय पत्र संख्या 842 दिनांक 6 मार्च 2026 के आधार पर बतौर संक्रमणीय भूमिधर सहखातेदार दर्ज करने के आदेश होने के बाद 21 मार्च 2026 को कायमी प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया, जो 24 मार्च को स्वीकार किया गया। तहसीलदार कोर्ट ने 20 मार्च को जारी किए गए आदेश को तकनीकी त्रुटि मानते हुए निरस्त कर दोबारा 20 अप्रैल 2026 को आदेश जारी किया गया है। इसमें पुराने वाद नंबर को कायम रखा गया। आदेश में कोई अलग से तर्क नहीं दिया गया है।
दोबारा किए गए आदेश से पहले 13 अप्रैल 2026 को खतौनी में धारा 38 (6) के तहत संशोधन कर मां का बसहिया उर्फ कप्तानगंज का निवासी बना दिया गया है। कानून के जानकारों का कहना है कि राजस्व संहिता नियमावली 2016 के अनुसार कोई भी खारिज दाखिल 35 दिन के बाद ही होने का प्रावधान है। इसका पालन न करने पर राजस्व संहिता नियमावली का उल्लंघन माना जाएगा।
35 दिन का जो समय दिया जाता है, उसमें गाटे से जुड़े अन्य खातेदारों को नोटिस तामिल होने के बाद आपत्ति करने का समय दिया जाता है। एसडीएम हाटा योगेश्वर सिंह ने बताया कि जांच का निर्देश मिला है। जांच के बाद रिपोर्ट डीएम को भेजी जाएगी। आगे की कार्रवाई उनके स्तर से होगी।
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11 मार्च सुनवाई शुरू हुई और 20 मार्च को खारिज दाखिल का आदेश हो गया। तहसीलदार ने इस मामले की 11,12, 13, 17, 19 और 20 मार्च को लगातार सुनवाई की। मामला उजागर होने के बाद खुद के बचाव में साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ शुरू कर दी हैं। इसकी भी शिकायत उच्चाधिकारियों तक पहुंच गई है।
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तहसील क्षेत्र के ग्राम बसहिया उर्फ कप्तानगंज के विक्रेता चंद्रिका ने गाटा संख्या 2706 में तहसीलदार कप्तानगंज चंदन शर्मा की मां निर्मला शर्मा पत्नी रामाश्रय निवासी बास देवरिया को 6 मार्च 2026 को साढ़े सोलह डिस्मिल जमीन बैनामा की। बैनामा के बाद खारिज दाखिल के लिए नौ मार्च को तहसीलदार कोर्ट में वाद दाखिल हुआ। 11 मार्च से सुनवाई शुरू कर 20 मार्च 2026 को खारिज दाखिल का आदेश कर दिया गया। खतौनी में निर्मला शर्मा पत्नी रामाश्रय शर्मा निवासी बांस देवरिया का नाम दर्ज हो गया।
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विक्रय पत्र संख्या 842 दिनांक 6 मार्च 2026 के आधार पर बतौर संक्रमणीय भूमिधर सहखातेदार दर्ज करने के आदेश होने के बाद 21 मार्च 2026 को कायमी प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया, जो 24 मार्च को स्वीकार किया गया। तहसीलदार कोर्ट ने 20 मार्च को जारी किए गए आदेश को तकनीकी त्रुटि मानते हुए निरस्त कर दोबारा 20 अप्रैल 2026 को आदेश जारी किया गया है। इसमें पुराने वाद नंबर को कायम रखा गया। आदेश में कोई अलग से तर्क नहीं दिया गया है।
दोबारा किए गए आदेश से पहले 13 अप्रैल 2026 को खतौनी में धारा 38 (6) के तहत संशोधन कर मां का बसहिया उर्फ कप्तानगंज का निवासी बना दिया गया है। कानून के जानकारों का कहना है कि राजस्व संहिता नियमावली 2016 के अनुसार कोई भी खारिज दाखिल 35 दिन के बाद ही होने का प्रावधान है। इसका पालन न करने पर राजस्व संहिता नियमावली का उल्लंघन माना जाएगा।
35 दिन का जो समय दिया जाता है, उसमें गाटे से जुड़े अन्य खातेदारों को नोटिस तामिल होने के बाद आपत्ति करने का समय दिया जाता है। एसडीएम हाटा योगेश्वर सिंह ने बताया कि जांच का निर्देश मिला है। जांच के बाद रिपोर्ट डीएम को भेजी जाएगी। आगे की कार्रवाई उनके स्तर से होगी।