{"_id":"613502168ebc3e5fa0786081","slug":"teachers-should-establish-a-civilized-society-kushinagar-news-gkp408067852","type":"story","status":"publish","title_hn":"शिक्षक दिवस से संबंधित एडवाइजरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शिक्षक दिवस से संबंधित एडवाइजरी
विज्ञापन
‘सभ्य समाज की स्थापना करें शिक्षक’
राष्ट्रपति और राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित बोले
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। जिले के राष्ट्रपति और राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित शिक्षकों ने कहा कि शिक्षक समाज का दर्पण होता है। इसलिए शिक्षकों को समय और कर्तव्य से समझौता नहीं करना चाहिए। तभी विद्यार्थियों में अनुशासन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जा सकती है।
किसान इंटर कॉलेज धौरहरा के प्रधानाचार्य रहे मुन्नी प्रसाद गुप्ता ने शिक्षा के प्रसार के साथ विद्यालय में शैक्षिक गुणवत्ता बेहतर करने का कार्य किया था। इसके लिए उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया। उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज का दर्पण होता है। शिक्षकों को आदर्श मानकर विद्यार्थी अपने जीवन में ऊंचाइयां छूते हैं। इसलिए शिक्षकों को सभ्य समाज की स्थापना के लिए सकारात्मक ऊर्जा लगानी चाहिए। फतेह मेमोरियल इंटर कॉलेज तमकुहीराज के प्रधानाचार्य रहे अविनाश केवट को वर्ष 2012 में राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्होंने बताया कि योग्य शिष्य पर गुरु अपना सर्वस्व न्योछावर कर देता है। लेकिन शिष्य पर निर्भर करता है कि वह अपने से कितना ज्ञान हासिल कर ले। वर्तमान में गुरु शिष्य के परंपरा का लोप होता जा रहा है। समाज के बुद्धिजीवी लोगों को इस कुरीति को रोकने का प्रयास करना चाहिए। श्री अन्नपूर्ण इंटर कॉलेज गुरवलिया के प्रधानाचार्य डॉ. शक्ति प्रकाश पाठक को वर्ष 2016 में राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्हें यह सम्मान पिछड़े क्षेत्र में शिक्षा की अलख जगाने के लिए मिला था। उन्होंने बताया कि शिक्षकों की पहचान उनके बेहतर शिक्षण कार्य से होता है। कक्षाओं में पढ़ाई करने आए विद्यार्थी शिक्षकों के गुणों को आत्मसात करते हैं। यदि शिक्षक समय और कर्तव्य के प्रति पाबंद होगा तो उनके पढ़ाए छात्र-छात्राएं भी उनका अनुसरण करते हैं। इसलिए शिक्षकों को निर्धारित समय पर अपने कक्षाओं में पहुंचकर बेहतर शिक्षण कौशल प्रस्तुत करना चाहिए। महर्षि वाल्मीकि इंटर कॉलेज पिपरैचा हाटा के पूर्व प्रधानाचार्य एसपी सिंह को वर्ष 2014 में राज्यपाल पुरस्कार, 2014 इंदिरा प्रियदर्शिनी वृक्षमित्र, वर्ष 2001 में इंदिरा गांधी पर्यावरण और वर्ष 1995 में आपरेशन ग्रीन अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि समाज को स्वथ्य, सुंदर और चरित्रवान बनाना शिक्षकों की नैतिक जिम्मेदारी होती है। क्योंकि समाज के युवा सबसे अधिक समय शिक्षकों के सानिध्य में बिताते हैं। शिक्षकों की जैसी सोच होती है, उनके पढ़ाए विद्यार्थी भी उसी राह पर चलते हैं। इसलिए शिक्षकों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षण कार्य करने के साथ ही पर्यावरण सुरक्षा के लिए विशेष रूप से कार्य करना चाहिए।
विज्ञापन
राष्ट्रपति और राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित बोले
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। जिले के राष्ट्रपति और राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित शिक्षकों ने कहा कि शिक्षक समाज का दर्पण होता है। इसलिए शिक्षकों को समय और कर्तव्य से समझौता नहीं करना चाहिए। तभी विद्यार्थियों में अनुशासन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जा सकती है।
किसान इंटर कॉलेज धौरहरा के प्रधानाचार्य रहे मुन्नी प्रसाद गुप्ता ने शिक्षा के प्रसार के साथ विद्यालय में शैक्षिक गुणवत्ता बेहतर करने का कार्य किया था। इसके लिए उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया। उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज का दर्पण होता है। शिक्षकों को आदर्श मानकर विद्यार्थी अपने जीवन में ऊंचाइयां छूते हैं। इसलिए शिक्षकों को सभ्य समाज की स्थापना के लिए सकारात्मक ऊर्जा लगानी चाहिए। फतेह मेमोरियल इंटर कॉलेज तमकुहीराज के प्रधानाचार्य रहे अविनाश केवट को वर्ष 2012 में राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्होंने बताया कि योग्य शिष्य पर गुरु अपना सर्वस्व न्योछावर कर देता है। लेकिन शिष्य पर निर्भर करता है कि वह अपने से कितना ज्ञान हासिल कर ले। वर्तमान में गुरु शिष्य के परंपरा का लोप होता जा रहा है। समाज के बुद्धिजीवी लोगों को इस कुरीति को रोकने का प्रयास करना चाहिए। श्री अन्नपूर्ण इंटर कॉलेज गुरवलिया के प्रधानाचार्य डॉ. शक्ति प्रकाश पाठक को वर्ष 2016 में राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्हें यह सम्मान पिछड़े क्षेत्र में शिक्षा की अलख जगाने के लिए मिला था। उन्होंने बताया कि शिक्षकों की पहचान उनके बेहतर शिक्षण कार्य से होता है। कक्षाओं में पढ़ाई करने आए विद्यार्थी शिक्षकों के गुणों को आत्मसात करते हैं। यदि शिक्षक समय और कर्तव्य के प्रति पाबंद होगा तो उनके पढ़ाए छात्र-छात्राएं भी उनका अनुसरण करते हैं। इसलिए शिक्षकों को निर्धारित समय पर अपने कक्षाओं में पहुंचकर बेहतर शिक्षण कौशल प्रस्तुत करना चाहिए। महर्षि वाल्मीकि इंटर कॉलेज पिपरैचा हाटा के पूर्व प्रधानाचार्य एसपी सिंह को वर्ष 2014 में राज्यपाल पुरस्कार, 2014 इंदिरा प्रियदर्शिनी वृक्षमित्र, वर्ष 2001 में इंदिरा गांधी पर्यावरण और वर्ष 1995 में आपरेशन ग्रीन अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि समाज को स्वथ्य, सुंदर और चरित्रवान बनाना शिक्षकों की नैतिक जिम्मेदारी होती है। क्योंकि समाज के युवा सबसे अधिक समय शिक्षकों के सानिध्य में बिताते हैं। शिक्षकों की जैसी सोच होती है, उनके पढ़ाए विद्यार्थी भी उसी राह पर चलते हैं। इसलिए शिक्षकों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षण कार्य करने के साथ ही पर्यावरण सुरक्षा के लिए विशेष रूप से कार्य करना चाहिए।
विज्ञापन