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Kushinagar News: मूल्यांकन प्रकोष्ठ का शिक्षक कर रहे विरोध
Tue, 02 May 2023 12:09 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Tue, 02 May 2023 12:09 AM IST
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परिषदीय विद्यालयों के लिए गठित मूल्यांकन प्रकोष्ठ का शिक्षक कर रहे विरोध
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। परिषदीय विद्यालयों के लिए गठित मूल्यांकन प्रकोष्ठ का जिले के शिक्षक संगठन विरोध कर रहे हैं। शिक्षक नेता इस आदेश को दुर्भायपूर्ण बताकर बीएसए के माध्यम से महानिदेशक को पत्र भेजकर यह निर्णय वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद ने डायट प्राचार्य और बीएसए के नाम पत्र जारी कर निपुण भारत मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन और शैक्षिक गतिविधि के सही से संचालन के लिए मूल्यांकन प्रकोष्ठ का गठन करने का आदेश दिया है। मूल्यांकन प्रकोष्ठ में डायट प्राचार्य, एक वरिष्ठ प्रवक्ता, दो प्रवक्ता व एक तकनीकी सहायक शामिल होंगे। यह टीम प्रत्येक दिन 10 विद्यालयों का चयन कर उनका ऑनलाइन अनुश्रवण करेगी। ऑनलाइन अनुश्रवण के लिए बीएसए जिले के सभी परिषद के विद्यालयों और कस्तूरबा गांधी विद्यालय के शिक्षक, शिक्षामित्रों और अनुदेशको का नंबर मूल्यांकन प्रकोष्ठ उपलब्ध कराएंगे। ऑनलाइन अनुश्रवण करते टीम विद्यालय से संबंधित विभिन्न सूचनाओं को संकलित करेगी।
शिक्षकों की गतिविधि जांच करने के लिए प्रकोष्ठ शिक्षक को अलग-अलग दिनों में तीन बार कॉल करेगी। यदि शिक्षक फोन रिसीव नहीं करते हैं, तो उन्हें चिन्हित कर उनके खिलाफ कार्रवाई करेगी। लेकिन शिक्षक संगठन इस आदेश को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।
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शिक्षक नेताओं का कहना है कि परिषदीय विद्यालयों में गठित मूल्यांकन प्रकोष्ठ के ऑनलाइन अनुश्रवण में नेटवर्क रोड़ा बन सकता है। इसके अलावा जिले के बहुत सभी परिषदीय विद्यालयों में हमेशा नेटवर्क की दिक्कत होती रहती है। कई अध्यापक एंड्राॅयड मोबाइल का उपयोग ही नहीं करते हैं। ऐसे में शिक्षकों पर बेवजह कार्रवाई की हो सकती है।
कोट
सरकार का यह फैसला मनमाना है। लेकिन इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा। विभाग की तरफ से शिक्षकों को कोई भी ऐसा व्यवस्था नहीं मिटी है, जिससे ऑनलाइन निरीक्षण किया जा सके।
- कुंजेश्वर सिंह, ब्लॉक मंत्री जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ
ऐसी व्यवस्था लागू करने से पहले शिक्षकों को टैबलेट उपलब्ध कराया जाना चाहिए। ऐसे निरीक्षण भ्रष्टाचार को बढ़ावा देंगे। तत्काल इस आदेश को वापस लेना चाहिए।
- मनीष तिवारी, जिला महामंत्री राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ
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सरकार की तरफ से लिया गया यह निर्णय गलत है। जिले के कई विद्यालयों के आसपास नेटवर्क की समस्या बनी रहती है। कुछ अध्यापकों के पास एंड्राइड मोबाइल तक नहीं है। ऐसे में ऑनलाइन निगरानी से शिक्षकों पर बेवजह कार्रवाई हो सकती है।
- देवेंद्र ओझा, ब्लॉक मंत्री तमकुही प्राथमिक शिक्षक संघ
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संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। परिषदीय विद्यालयों के लिए गठित मूल्यांकन प्रकोष्ठ का जिले के शिक्षक संगठन विरोध कर रहे हैं। शिक्षक नेता इस आदेश को दुर्भायपूर्ण बताकर बीएसए के माध्यम से महानिदेशक को पत्र भेजकर यह निर्णय वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद ने डायट प्राचार्य और बीएसए के नाम पत्र जारी कर निपुण भारत मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन और शैक्षिक गतिविधि के सही से संचालन के लिए मूल्यांकन प्रकोष्ठ का गठन करने का आदेश दिया है। मूल्यांकन प्रकोष्ठ में डायट प्राचार्य, एक वरिष्ठ प्रवक्ता, दो प्रवक्ता व एक तकनीकी सहायक शामिल होंगे। यह टीम प्रत्येक दिन 10 विद्यालयों का चयन कर उनका ऑनलाइन अनुश्रवण करेगी। ऑनलाइन अनुश्रवण के लिए बीएसए जिले के सभी परिषद के विद्यालयों और कस्तूरबा गांधी विद्यालय के शिक्षक, शिक्षामित्रों और अनुदेशको का नंबर मूल्यांकन प्रकोष्ठ उपलब्ध कराएंगे। ऑनलाइन अनुश्रवण करते टीम विद्यालय से संबंधित विभिन्न सूचनाओं को संकलित करेगी।
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शिक्षकों की गतिविधि जांच करने के लिए प्रकोष्ठ शिक्षक को अलग-अलग दिनों में तीन बार कॉल करेगी। यदि शिक्षक फोन रिसीव नहीं करते हैं, तो उन्हें चिन्हित कर उनके खिलाफ कार्रवाई करेगी। लेकिन शिक्षक संगठन इस आदेश को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।
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शिक्षक नेताओं का कहना है कि परिषदीय विद्यालयों में गठित मूल्यांकन प्रकोष्ठ के ऑनलाइन अनुश्रवण में नेटवर्क रोड़ा बन सकता है। इसके अलावा जिले के बहुत सभी परिषदीय विद्यालयों में हमेशा नेटवर्क की दिक्कत होती रहती है। कई अध्यापक एंड्राॅयड मोबाइल का उपयोग ही नहीं करते हैं। ऐसे में शिक्षकों पर बेवजह कार्रवाई की हो सकती है।
कोट
सरकार का यह फैसला मनमाना है। लेकिन इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा। विभाग की तरफ से शिक्षकों को कोई भी ऐसा व्यवस्था नहीं मिटी है, जिससे ऑनलाइन निरीक्षण किया जा सके।
- कुंजेश्वर सिंह, ब्लॉक मंत्री जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ
ऐसी व्यवस्था लागू करने से पहले शिक्षकों को टैबलेट उपलब्ध कराया जाना चाहिए। ऐसे निरीक्षण भ्रष्टाचार को बढ़ावा देंगे। तत्काल इस आदेश को वापस लेना चाहिए।
- मनीष तिवारी, जिला महामंत्री राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ
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सरकार की तरफ से लिया गया यह निर्णय गलत है। जिले के कई विद्यालयों के आसपास नेटवर्क की समस्या बनी रहती है। कुछ अध्यापकों के पास एंड्राइड मोबाइल तक नहीं है। ऐसे में ऑनलाइन निगरानी से शिक्षकों पर बेवजह कार्रवाई हो सकती है।
- देवेंद्र ओझा, ब्लॉक मंत्री तमकुही प्राथमिक शिक्षक संघ