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Kushinagar News: डूबे गांव, जागती आंखें...रात ढाई बजे बांध पर मदद का इंतजार
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गुरवलिया बाजार (कुशीनगर)। सोमवार रात करीब 2:30 बजे एपी बांध पर बैठे ग्रामीणों की आंखों में नींद नहीं, उम्मीद थी। गांव में पानी घुसने के बाद घरों से निकलकर ये लोग चैन पट्टी के पास बांध पर आ गए थे। कोई जरूरी सामान साथ लाया था तो कोई बच्चों और पशुओं को सुरक्षित जगह पहुंचाकर बैठा था। अंधेरे में जब डीएम, मंडलायुक्त, विधायक और पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों की गाड़ियां बांध से गुजरतीं तो बैठे लोगों की निगाहें अनायास उन्हीं पर टिक जातीं। शायद कोई रुकेगा, हाल पूछेगा और गांव तक मदद पहुंचाने का रास्ता बताएगा।
बांध टूटने के बाद देर रात तक अधिकारियों और बचाव टीमों की आवाजाही जारी रही। करीब तीन बजे जब मंडलायुक्त, विधायक, डीएम और एसपी समेत अधिकारियों के वाहन लौटने लगे और चैनपट्टी ठोकर के पास से होकर गुजरने लगे तो बांध का पूरा दृश्य अलग था। जगह-जगह लोग रात काटते नजर आए। कोई बांध की चौकी पर लेटा था, कोई सड़क किनारे नीचे जमीन पर बैठा था तो कोई अपनी बाइक के सहारे ही आंखें बंद किए था।अंधेरे में एक के बाद एक नीली और लाल बत्तियां गुजरती रहीं। सरकारी वाहनों का काफिला बिना रुके आगे बढ़ता गया और बांध पर बैठे ग्रामीण उन्हें देखते रहे। कुछ लोग उठकर खड़े हो गए, कुछ दूर तक गाड़ियों की रोशनी को देखते रहे। खासकर बुजुर्गों के चेहरों पर चिंता साफ पढ़ी जा सकती थी। उनके घरों में पानी था और रात बांध पर कट रही थी।
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बांध टूटने के बाद देर रात तक अधिकारियों और बचाव टीमों की आवाजाही जारी रही। करीब तीन बजे जब मंडलायुक्त, विधायक, डीएम और एसपी समेत अधिकारियों के वाहन लौटने लगे और चैनपट्टी ठोकर के पास से होकर गुजरने लगे तो बांध का पूरा दृश्य अलग था। जगह-जगह लोग रात काटते नजर आए। कोई बांध की चौकी पर लेटा था, कोई सड़क किनारे नीचे जमीन पर बैठा था तो कोई अपनी बाइक के सहारे ही आंखें बंद किए था।अंधेरे में एक के बाद एक नीली और लाल बत्तियां गुजरती रहीं। सरकारी वाहनों का काफिला बिना रुके आगे बढ़ता गया और बांध पर बैठे ग्रामीण उन्हें देखते रहे। कुछ लोग उठकर खड़े हो गए, कुछ दूर तक गाड़ियों की रोशनी को देखते रहे। खासकर बुजुर्गों के चेहरों पर चिंता साफ पढ़ी जा सकती थी। उनके घरों में पानी था और रात बांध पर कट रही थी।
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