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तस्करी : वाहनों के दगा देने पर पकड़ती है पुलिस

Thu, 27 Feb 2025 12:16 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Thu, 27 Feb 2025 12:16 AM IST
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Smuggling: Police catches vehicles when they betray them
पडरौना। पशु तस्करी के धंधे पर लगाम कसने में पुलिस नाकाम है। उत्तर प्रदेश के पश्चिमी छोर पर मुज्जफरनगर, शामली, रामपुर आदि जगहों से निकलकर पूरब में बिहार और बंगाल की खाड़ी तक पहुंच अपने मंसूबे में कामयाब हो जा रहे हैं। लगातार बरामद हो रही पशुओं की खेप पुलिस की सक्रियता की पोल खोल रही है।
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सोमवार शाम प्रेमवलिया के पास खराब गाड़ी से गोवंश बरामद हुए, जबकि तस्कर फरार हो चुके थे। यह पहली घटना नहीं है जब पुलिस को गाड़ियों के खराब होने के बाद गोवंश हाथ लगे हो इससे पहले भी कभी पंक्चर तो कभी गाड़ी पलटने पर तस्कर गाड़ी छोड़ फरार हो जाते हैं।
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अंतरराज्यीय स्तर पर पशुधन तस्करी करने वाले धंधेबाजों के लिए जिले का भौगोलिक परिस्थिति सुरक्षित साबित होता रहा है। जिले की सीमा बिहार के दो जिलों से जुड़ी है, ऐसे में तस्कर पुलिस की निष्क्रियता का फायदा पूरी तरह उठाते हैं। यहां अगर मुखबिर तंत्र से सूचना मिल गई तो बात बन जाती है, वरना तस्कर अपने मंसूबों में कामयाब हो जाते हैं।
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बंगाल तक होने वाली पशु की तस्करी में कुशीनगर की भौगोलिक परिस्थिति (राष्ट्रीय राजमार्ग और ग्रामीण सड़कें) तस्करों को भा रही है। तस्कर पूर्वांचल के सोनभद्र, बलिया, देवरिया के रास्ते बिहार में दाखिल होने के बजाय कुशीनगर होते हुए बिहार में आसानी से दाखिल हो जा रहे हैं। कुशीनगर की सीमा बिहार की पश्चिम चंपारण और गोपालगंज जिले से जुड़ती है। अगर एक सीमावर्ती क्षेत्र में तस्करों को भय होता है तो दूसरे जिले के रास्ते निकल लेते हैं।
दूसरा कुशीनगर के राष्ट्रीय राजमार्ग होते हुए गोपालगंज के एनएच-27 से तस्कर जुड़ जाते हैं जो गोपालगंज, मोतिहारी, दरभंगा होते हुए सीधे अररिया, पूर्णिया, किशनगंज होते हुए पश्चिम बंगाल सिलीगुड़ी, सोनपुर आदि जगहों तक जाती है। यही एनएच असम के सिलचर में जाकर समाप्त होती है, ऐसे में बंगाल और असम तक पशुओं के खेप पहुंचाने का मुख्य रूट तो यह ही है। तस्करों के लिए मुख्य रूट होने और तस्करी के कारण लगातार संवेदनशील होने के बावजूद जिले की पुलिस की तस्करों के लिए कोई खास योजना नहीं होती है। पुलिस मुखबिर पर निर्भर रहती है और मुखबिरी की सूचना पर नाकाबंदी करती है तो तस्कर सामने से खेतों पगडंडियों के सहारे भाग जाते हैं। कभी कभार हमला भी कर देते हैं। इसका प्रमाण गत वर्ष में एक कांस्टेबल की कुचलकर हुई मौत भी है। इधर तस्करों की गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त या खराब होने की स्थिति में पुलिस को जबतक पता चलता है, तस्कर वहां से भी फरार हो गए रहते हैं। इसके बाद पुलिस गाड़ी जब्त कर गोवंश मुक्त जरूर करा लेती हैं, लेकिन तस्कर न पकड़े जाने के कारण तस्करी पर लगाम नहीं लगती है।
पिछले कुछ समय में पकड़े गए गाड़ियों और गोवंश में अधिकांश तस्कर कसया और तुर्कपट्टी थाना क्षेत्र के अंतर्गत भाग खड़े हुए, जबकि वह राष्ट्रीय राजमार्ग के सहारे बिहार की ओर पशुओं को ले जा रहे थे। सोमवार को भी क्लच प्लेट खराब होने के बाद पशुओं और गाड़ियों को छोड़ तस्करों को भागना पड़ा। इसके बाद पुलिस ने पशुओं की खेप बरामद की।

एएसपी रितेश सिंह ने बताया कि हाईवे पर जो पिकअप पकड़ी थी। वह बस्ती के शुक्लपुर निवासी सुरेंद्र यादव के नाम से है। उसके खिलाफ केस दर्ज किया गया है। पुलिस टीम उसको गिरफ्तार करने के लिए लगाई गई है। संवाद
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