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Kushinagar News: पुलिस के सूचनातंत्र पर तस्करों का नेटवर्क भारी
Tue, 24 Dec 2024 12:11 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Tue, 24 Dec 2024 12:11 AM IST
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कुशीनगर। पशु तस्करों का नेटवर्क पुलिस के सूचना तंत्र और मुखबिरों पर भारी पड़ रहा है। कुछ एक मामलों में पुलिस भले ही तस्करों की धर-पकड़ कर ले, लेकिन तस्करों के खेल से खाकी अब भी अंजान है। बिहार के कुख्यातों के साथ मिलकर स्थानीय तस्कर मजबूत रणनीति से हाईवे और बिहार जाने वाली अन्य लिंक सड़कों के रास्ते तस्करी की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं।
पिछले दिनों गोरखपुर में कुशीनगर और बिहार के कुछ तस्करों ने उत्पात मचाया था। विरोध के बाद पत्थरबाजी और पिस्टल निकालकर धमकाते हुए फरार हो गए। यह पहली घटना नहीं है, इससे पहले भी जिले में कई दफा तस्करों की घेराबंदी और पीछा करने पर पुलिस को पत्थरबाजी और बड़ी दुर्घटना का सामना करना पड़ा है। इसके चलते माफियाओं की चूड़ी कसने वाली खाकी तस्करों के आगे नतमस्तक है।
कुछ मामलों में खाकी के यह रखवाले कुख्यात तस्करों का पीछा करने के बजाय सेटिंग कर लेते हैं। यहां तक कि पुलिस की योजनाओं को भी लीक कर देते हैं। इससे तस्कर आगाह हो जाते हैं और रास्ता बदल लेते हैं। खाकी की संलिप्तता के बाद कई बार इनपर हुई कार्रवाई इस बात की तस्दीक दे रही है।
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सूत्रों के अनुसार, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, बिहार और बंगाल तक जिले के रास्ते हो रही पशुओं की तस्करी में स्थानीय के अलावा बिहार के गोपालगंज और सिवान के कुख्यात तस्कर जुड़े हैं। इस पूरे खेल में रेकी कर जगह-जगह गांव में बंधे पशुओं की जानकारी जुटाई जाती है। बाद में गाड़ियों के दल बल के साथ पहुंचे तस्कर पशुओं को लाद फरार हो जाते हैं। इन पशुओं को रातों-रात बिहार पहुंचा दिया जाता है। इसके बाद यह बंगाल भेजे जाते हैं। तस्करी के इस पूरे प्रक्रिया में कुशीनगर की भौगोलिक परिस्थिति और यहां खाकी के मददगारों की मदद से खेल होता है।
अगस्त में तुर्कपट्टी और पटहेरवा थाने के सिपाही और दीवान की भूमिका संदिग्ध मिलने पर पुलिस कप्तान ने उन्हें लाइन हाजिर किया था।
पिछले दिनों कुशीनगर और बिहार के तस्करों ने गोरखपुर से दरवाजे से पहले गाय चुराई और फिर विरोध करने पर पत्थरबाजी के साथ पिस्टल दिखाकर डराया। इसके अलावा पिछले माह ही तुर्कपट्टी पुलिस की नाकाबंदी के बाद कुचलने का प्रयास कर भागे तस्करों को पुलिस ने देवरिया से गिरफ्तार किया था। बावजूद इसके ऐसे मामलों में पुलिस के हाथ सिर्फ कैरियर ही लगते हैं। मुख्य सरगना के मिले कनेक्शन के बावजूद भी पुलिस वहां तक नहीं पहुंच पाती है।
खाकी बनती है साथी...आंखों-आंखों में डीलिंग : जिले की खाकी का नाम कई दफा तस्करों की मदद करने में सामने आ चुका है। उच्चाधिकारियों तक मामला पहुंचने पर कार्रवाई भी हुई है। पिछले दिनों कुछ सिपाहियों का नाम तस्करी के सपोर्ट के नाम पर सामने आया था, जिसमें पता चला था कि शुरू से ही हाईवे के थानों की उनकी चाह रही थी। सूत्रों के मुताबिक रुपये लेकर न केवल तस्करों के गाड़ियों को सीमा पार कराया जाता है, बल्कि यह गाड़ी के आगे-आगे पथ प्रदर्शक की भूमिका का निर्वहन करते हैं। यही नहीं ऐसे सिपाही हर उस थाने पर हैं, जहां से जिले का भू-भाग बिहार से जुड़ता है। चाहे वह तरयासुजान हो, तमकुही रोड या पडरौना और खड्डा का इलाका, इन सभी इलाकों के रास्ते बिहार में तस्कर दाखिल होते हैं। संवाद
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पिछले दिनों गोरखपुर में कुशीनगर और बिहार के कुछ तस्करों ने उत्पात मचाया था। विरोध के बाद पत्थरबाजी और पिस्टल निकालकर धमकाते हुए फरार हो गए। यह पहली घटना नहीं है, इससे पहले भी जिले में कई दफा तस्करों की घेराबंदी और पीछा करने पर पुलिस को पत्थरबाजी और बड़ी दुर्घटना का सामना करना पड़ा है। इसके चलते माफियाओं की चूड़ी कसने वाली खाकी तस्करों के आगे नतमस्तक है।
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कुछ मामलों में खाकी के यह रखवाले कुख्यात तस्करों का पीछा करने के बजाय सेटिंग कर लेते हैं। यहां तक कि पुलिस की योजनाओं को भी लीक कर देते हैं। इससे तस्कर आगाह हो जाते हैं और रास्ता बदल लेते हैं। खाकी की संलिप्तता के बाद कई बार इनपर हुई कार्रवाई इस बात की तस्दीक दे रही है।
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सूत्रों के अनुसार, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, बिहार और बंगाल तक जिले के रास्ते हो रही पशुओं की तस्करी में स्थानीय के अलावा बिहार के गोपालगंज और सिवान के कुख्यात तस्कर जुड़े हैं। इस पूरे खेल में रेकी कर जगह-जगह गांव में बंधे पशुओं की जानकारी जुटाई जाती है। बाद में गाड़ियों के दल बल के साथ पहुंचे तस्कर पशुओं को लाद फरार हो जाते हैं। इन पशुओं को रातों-रात बिहार पहुंचा दिया जाता है। इसके बाद यह बंगाल भेजे जाते हैं। तस्करी के इस पूरे प्रक्रिया में कुशीनगर की भौगोलिक परिस्थिति और यहां खाकी के मददगारों की मदद से खेल होता है।
अगस्त में तुर्कपट्टी और पटहेरवा थाने के सिपाही और दीवान की भूमिका संदिग्ध मिलने पर पुलिस कप्तान ने उन्हें लाइन हाजिर किया था।
पिछले दिनों कुशीनगर और बिहार के तस्करों ने गोरखपुर से दरवाजे से पहले गाय चुराई और फिर विरोध करने पर पत्थरबाजी के साथ पिस्टल दिखाकर डराया। इसके अलावा पिछले माह ही तुर्कपट्टी पुलिस की नाकाबंदी के बाद कुचलने का प्रयास कर भागे तस्करों को पुलिस ने देवरिया से गिरफ्तार किया था। बावजूद इसके ऐसे मामलों में पुलिस के हाथ सिर्फ कैरियर ही लगते हैं। मुख्य सरगना के मिले कनेक्शन के बावजूद भी पुलिस वहां तक नहीं पहुंच पाती है।
खाकी बनती है साथी...आंखों-आंखों में डीलिंग : जिले की खाकी का नाम कई दफा तस्करों की मदद करने में सामने आ चुका है। उच्चाधिकारियों तक मामला पहुंचने पर कार्रवाई भी हुई है। पिछले दिनों कुछ सिपाहियों का नाम तस्करी के सपोर्ट के नाम पर सामने आया था, जिसमें पता चला था कि शुरू से ही हाईवे के थानों की उनकी चाह रही थी। सूत्रों के मुताबिक रुपये लेकर न केवल तस्करों के गाड़ियों को सीमा पार कराया जाता है, बल्कि यह गाड़ी के आगे-आगे पथ प्रदर्शक की भूमिका का निर्वहन करते हैं। यही नहीं ऐसे सिपाही हर उस थाने पर हैं, जहां से जिले का भू-भाग बिहार से जुड़ता है। चाहे वह तरयासुजान हो, तमकुही रोड या पडरौना और खड्डा का इलाका, इन सभी इलाकों के रास्ते बिहार में तस्कर दाखिल होते हैं। संवाद