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प्रदेश के तीसरे बॉक्सिंग कोच हैं सिकंदर
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प्रदेश के तीसरे बॉक्सिंग कोच हैं सिकंदर
राष्ट्रीय खेल संस्थान पटियाला में असिस्टेंट बॉक्सिंग कोच हैं
यूपी अंडर-19 के खिलाड़ियों को बॉक्सिंग सिखा रहे हैं
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरवलिया बाजार (कुशीनगर)। तमकुही क्षेत्र के बरवा राजापाकड़ गांव के जमुआन टोला निवासी सिकंदर पटेल मंडल के पहले और प्रदेश के तीसरे कोच बन गए हैं। वह खिलाड़ियों को बॉक्सिंग की बारीकियां सिखा रहे हैं। भारतीय खेल प्राधिकरण (साईं) के नेताजी सुभाषचंद्र बोस राष्ट्रीय खेल संस्थान पटियाला में बतौर असिस्टेंट कोच (बाक्सिंग) तैनात हैं। सिकंदर ने अंतरराष्ट्रीय बाक्सिंग कोच की परीक्षा तीन वर्ष पहले उत्तीर्ण कर चुके हैं। वह वर्तमान में उत्तराखंड के कांशीराम स्टेडियम में यूपी अंडर-19 के खिलाड़ियों को बॉक्सिंग के गुर सिखा रहे हैं। इनके सिखाए दो खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर ब्रॉंज मेडल हासिल किए हैं। एक निम्नवर्गीय किसान हरिहर पटेल और गृहिणी मंजू देवी के दो बेटों में छोटे पुत्र सिकंदर पटेल की प्रारंभिक शिक्षा प्राथमिक विद्यालय जमुआन से हुई। उच्च प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा श्री लालबहादुर शास्त्री इंटर कॉलेज सपही टड़वा से करने के बाद सिकंदर आगे की पढ़ाई करने के लिए वाराणसी चले गए थे। सिकंदर के मामा ने उन्हें बॉक्सिंग के प्रति प्रेरित किया और इसकी बारीकियां सिखाई थीं। सिकंदर ने वर्ष 2005 में नोएडा में आयोजित सब जूनियर नेशनल प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया था। वर्ष 2010 से 2014 तक चार बार अखिल भारतीय अंतर विश्वविद्यालयी प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया। वर्ष 2011 में राज्य खेल उत्तर प्रदेश में रजत पदक प्राप्त करने वाले सिकंदर को उसी वर्ष मेरठ में आयोजित सीनियर स्टेट बॉक्सिंग चैंपियनशिप में बेस्ट बॉक्सर का खिताब हासिल हुआ। वर्ष 2013 में छत्तीसगढ़ सीनियर स्टेट बॉक्सिंग चैंपियनशिप में सिकंदर ने रजत पदक जीता। चार बार कांशीराम गेम्स के बॉक्सिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल का रिकॉर्ड भी शामिल है।
यूं शुरू हुआ बॉक्सिंग प्रशिक्षक का सफर
उसके बाद नए खिलाड़ियों को सिखाने की इच्छा प्रबल हुई तो वर्ष 2015 में केडी सिंह बाबू स्टेडियम लखनऊ में संविदा पर राज्य मुक्केबाजी प्रशिक्षक के तौर पर खिलाड़ियों खेल सिखाने लगे। छह नवंबर 2017 को सिकंदर का चयन भारतीय खेल प्राधिकरण (साईं) के हेडक्वार्टर जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम नई दिल्ली में मुक्केबाजी के असिस्टेंट कोच के लिए हुआ। 11 दिसंबर 2017 को उनकी तैनाती इसी पद पर नेताजी सुभाष नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स पटियाला में कर दी गई। जहां वह मुक्केबाजी का गुर सिखा रहे थे। इस दौरान रोहतक में 21 अक्तूबर 2018 से 27 अक्तूबर 2018 तक इंटरनेशनल बॉक्सिंग एसोसिएशन (एआईबीए) की ओर से वन स्टार कोच सर्टिफिकेट कोर्स की परीक्षा आयोजित की गई। इसमें नेपाल, बांग्लादेश, भूटान, कनाडा, मलेशिया के अलावा भारत के मुक्केबाजी के 50 प्रशिक्षक शामिल हुए। एआईबीए कोचेज कमीशन के चेयर पर्सन एडम कुशियर ने बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष अजय सिंह को भेजे परिणाम में 47 प्रशिक्षकों को उत्तीर्ण होने की सूचना दी। सूची में सिकंदर का नाम 43वें स्थान पर है। इस उपलब्धि से सिकंदर को कोच के तौर पर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय टीम के प्रतिनिधित्व का अवसर हासिल होगा।
सामने आईं चुनौतियां
सिकंदर कहते हैं भारतीय खेल प्राधिकरण (साईं) के नेताजी सुभाषचंद्र बोस राष्ट्रीय खेल संस्थान पटियाला में बतौर असिस्टेंट कोच (बाक्सिंग) तैनात हैं। वह बताते हैं कि मध्यम व गरीब परिवार के खिलाड़ियों को बॉक्सिंग के क्षेत्र में काफी दिक्कतें होती हैं। गरीबी के कारण कई बार खाना तक नहीं मिल पाता। एक ग्लब्स को खरीदने में 1500 रुपये खर्च होता है, जो गरीब परिवार के खिलाड़ी के लिए मुश्किल है। उन्होंने कहा कि मेरा एक और सपना है कि राजापाकड़ के सीताराम चौराहे पर जमीन खरीद बॉक्सिंग का हब बनाऊं।
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राष्ट्रीय खेल संस्थान पटियाला में असिस्टेंट बॉक्सिंग कोच हैं
यूपी अंडर-19 के खिलाड़ियों को बॉक्सिंग सिखा रहे हैं
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरवलिया बाजार (कुशीनगर)। तमकुही क्षेत्र के बरवा राजापाकड़ गांव के जमुआन टोला निवासी सिकंदर पटेल मंडल के पहले और प्रदेश के तीसरे कोच बन गए हैं। वह खिलाड़ियों को बॉक्सिंग की बारीकियां सिखा रहे हैं। भारतीय खेल प्राधिकरण (साईं) के नेताजी सुभाषचंद्र बोस राष्ट्रीय खेल संस्थान पटियाला में बतौर असिस्टेंट कोच (बाक्सिंग) तैनात हैं। सिकंदर ने अंतरराष्ट्रीय बाक्सिंग कोच की परीक्षा तीन वर्ष पहले उत्तीर्ण कर चुके हैं। वह वर्तमान में उत्तराखंड के कांशीराम स्टेडियम में यूपी अंडर-19 के खिलाड़ियों को बॉक्सिंग के गुर सिखा रहे हैं। इनके सिखाए दो खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर ब्रॉंज मेडल हासिल किए हैं। एक निम्नवर्गीय किसान हरिहर पटेल और गृहिणी मंजू देवी के दो बेटों में छोटे पुत्र सिकंदर पटेल की प्रारंभिक शिक्षा प्राथमिक विद्यालय जमुआन से हुई। उच्च प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा श्री लालबहादुर शास्त्री इंटर कॉलेज सपही टड़वा से करने के बाद सिकंदर आगे की पढ़ाई करने के लिए वाराणसी चले गए थे। सिकंदर के मामा ने उन्हें बॉक्सिंग के प्रति प्रेरित किया और इसकी बारीकियां सिखाई थीं। सिकंदर ने वर्ष 2005 में नोएडा में आयोजित सब जूनियर नेशनल प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया था। वर्ष 2010 से 2014 तक चार बार अखिल भारतीय अंतर विश्वविद्यालयी प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया। वर्ष 2011 में राज्य खेल उत्तर प्रदेश में रजत पदक प्राप्त करने वाले सिकंदर को उसी वर्ष मेरठ में आयोजित सीनियर स्टेट बॉक्सिंग चैंपियनशिप में बेस्ट बॉक्सर का खिताब हासिल हुआ। वर्ष 2013 में छत्तीसगढ़ सीनियर स्टेट बॉक्सिंग चैंपियनशिप में सिकंदर ने रजत पदक जीता। चार बार कांशीराम गेम्स के बॉक्सिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल का रिकॉर्ड भी शामिल है।
यूं शुरू हुआ बॉक्सिंग प्रशिक्षक का सफर
उसके बाद नए खिलाड़ियों को सिखाने की इच्छा प्रबल हुई तो वर्ष 2015 में केडी सिंह बाबू स्टेडियम लखनऊ में संविदा पर राज्य मुक्केबाजी प्रशिक्षक के तौर पर खिलाड़ियों खेल सिखाने लगे। छह नवंबर 2017 को सिकंदर का चयन भारतीय खेल प्राधिकरण (साईं) के हेडक्वार्टर जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम नई दिल्ली में मुक्केबाजी के असिस्टेंट कोच के लिए हुआ। 11 दिसंबर 2017 को उनकी तैनाती इसी पद पर नेताजी सुभाष नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स पटियाला में कर दी गई। जहां वह मुक्केबाजी का गुर सिखा रहे थे। इस दौरान रोहतक में 21 अक्तूबर 2018 से 27 अक्तूबर 2018 तक इंटरनेशनल बॉक्सिंग एसोसिएशन (एआईबीए) की ओर से वन स्टार कोच सर्टिफिकेट कोर्स की परीक्षा आयोजित की गई। इसमें नेपाल, बांग्लादेश, भूटान, कनाडा, मलेशिया के अलावा भारत के मुक्केबाजी के 50 प्रशिक्षक शामिल हुए। एआईबीए कोचेज कमीशन के चेयर पर्सन एडम कुशियर ने बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष अजय सिंह को भेजे परिणाम में 47 प्रशिक्षकों को उत्तीर्ण होने की सूचना दी। सूची में सिकंदर का नाम 43वें स्थान पर है। इस उपलब्धि से सिकंदर को कोच के तौर पर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय टीम के प्रतिनिधित्व का अवसर हासिल होगा।
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सामने आईं चुनौतियां
सिकंदर कहते हैं भारतीय खेल प्राधिकरण (साईं) के नेताजी सुभाषचंद्र बोस राष्ट्रीय खेल संस्थान पटियाला में बतौर असिस्टेंट कोच (बाक्सिंग) तैनात हैं। वह बताते हैं कि मध्यम व गरीब परिवार के खिलाड़ियों को बॉक्सिंग के क्षेत्र में काफी दिक्कतें होती हैं। गरीबी के कारण कई बार खाना तक नहीं मिल पाता। एक ग्लब्स को खरीदने में 1500 रुपये खर्च होता है, जो गरीब परिवार के खिलाड़ी के लिए मुश्किल है। उन्होंने कहा कि मेरा एक और सपना है कि राजापाकड़ के सीताराम चौराहे पर जमीन खरीद बॉक्सिंग का हब बनाऊं।
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