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Kushinagar News: संसाधनों व कर्मियों का टोटा, आग लगी तो खड़ी हो जाएगी मुश्किल
Sat, 28 Mar 2026 01:38 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sat, 28 Mar 2026 01:38 AM IST
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पडरौना रविंद्र पगर स्थित अग्निशमन केंद्र।संवाद
पडरौना। आग लगने का सीजन शुरू हो वाला है, लेकिन जिले में आग बुझाने के लिए के लिए संसाधनों की कमी है। सर्वाधिक कमी चालकों की है। अग्निशमन विभाग के पास नौ फायर टेंडर है, लेकिन चालक सिर्फ चार ही हैं। ऐसे में चार से अधिक स्थानों पर आग लग गई तो पांचवें स्थान पर लगी आग को बुझाना मुश्किल होगा। लोगों का कहना है कि अप्रैल, मई व जून में आग की सर्वाधिक घटनाएं होती हैं। एक साथ कई जगहों पर आग लगने पर चालकोंं की कमी खल जाती है। उस समय अग्निशमन विभाग भी असहाय नगर आता है। इसका खामियाजा अग्निपीड़ित को भुगतना पड़ता है। मौजूदा संसाधन से लोगों के आशियानों को आग की विभीषिका से बचाया नहीं जा सकता है। हालांकि, विभाग के जिम्मेदारों का कहना है कि घटना के मुताबिक वैकल्पिक प्रबंध किए जाते हैं। विभाग के दूसरे कर्मियों की भी मदद ली जाती है। जो फायर टेंडर चलाने में पारंगत होते हैं।
मार्च का अंतिम सप्ताह चल रहा है। अप्रैल में गर्मी बढ़ने के साथ ही आग का सीजन शुरू हो जाएगा। एक छोटी सी चिंगारी सैकड़ों एकड़ खेतों में पककर तैयार गेहूं की फसल के साथ कई रिहायशी झोपड़ी को अपने आगोश में ले लेती है। इसलिए इस मौसम में लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। खेतों में अभी फसल पकने के कगार पर है। संसाधनों की अनुपलब्धता व फायर कर्मियों की कमी से हर साल सैकड़ों हेक्टेयर फसल जलकर राख हो जाती है। वर्ष 2025 में जिले में आगलगी की करीब 250 घटनाएं हुई थीं। इनमें ग्रामीण व शहरी आबादी के साथ खेत व खलिहान में लगी आग भी शामिल है।
गर्मी के मौसम को देखते हुए गाड़ियों के मेंटेनेंस, पाइप, पंप आदि की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने का काम पूरा कर लिया गया है। कुल 48 कर्मचारियों के भरोसे तकरीबन 50 लाख की आबादी को बेहतर सेवा मुहैया कराने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अग्निशमन विभाग को कर्मियों की आवश्यकता है। वर्तमान में पूरे जिले में सिर्फ चार ही चालक हैं। विभाग का कहना है कि आग लगने की घटनाओं के समय बंदोबस्त कर लिया जाता है।
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जिले में संचालित हैं पांच फायर स्टेशन
जिले में वर्तमान में पांच फायर स्टेशन क्रियाशील हैं। आग लगने की सूचना मिलते के 52 सेकंड में टीम रवाना हो जाएगी। इनमें खड्डा, कप्तानगंज, सेवरही, रविंद्रनगर व कसया शामिल हैं। इन स्टेशनों पर मशीन, उपकरण व गाड़ियां मौजूद हैं। अब भी फायर स्टेशन, संसाधन व कर्मियों की जरूरत है। हाटा व तमकुहीराज क्षेत्र में आगलगी होने पर संसाधनों की कमी पड़ जाएगी।
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सिर्फ नौ वाटर टेंडर उपलब्ध
वर्तमान में अग्निशमन विभाग के बेड़े में अलग-अलग क्षमता के नौ बड़े वाहन हैं। इनमें दो 4500-4500 लीटर की क्षमता के अलावा शेष सात 2500-2500 लीटर क्षमता के वाहन हैं। इसके अलावा सिर्फ एक 400 लीटर क्षमता का एफक्यूआरवी व एक वाॅटर मिश्रित गाड़ी है। फोम टेंडर नहीं है। यह पेट्रोल पंप व रासायनिक आग से निपटने के लिए झाग वाले विशेष वाहन होते हैं। इसके अलावा एक 60 लीटर की बुलेट गाड़ी भी है। वहीं, 48 फायरमैन हैं, जिनमें पांच महिलाएं हैं।
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वाहन समय से नहीं पहुंचने से बढ़ जाती है क्षति
जिले के ग्रामीण इलाकों में सड़कें संकरी होने के कारण बड़े वाहन मौके तक नहीं पहुंच पाते, जिससे क्षति बढ़ जाती है। इसके अलावा आग बुझाते समय जब गाड़ी का पानी खत्म होता है, तो दोबारा भरने के लिए काफी दूर जाना पड़ता है। इसके लिए शहरों में पास के माॅल व हाईड्रेंट आदि का उपयोग करते हैं, लेकिन ग्रामीण इलाकों में इस तरह का कोई प्रबंध नहीं होता है। सिर्फ प्राकृतिक जलस्रोत अथवा पंपिंग मशीन से रिफिलिंग कर सकते हैं। ऐसे में आग फैलती जाती है और क्षति का दायरा बढ़ जाता है।
कोट:
गर्मी के दिनों में आग लगने की घटनाओं में वृद्धि हो जाती है। आग के फैलाव के लिए मौसम भी अनुकूल रहता है। इसमें कई घटनाएं ऐसी होती हैं, जो मानव जनित कारणों से उत्पन्न होती हैं। जागरूकता, सतर्कता, चेतनशीलता के साथ घटनाओं को कम किया जा सकता है। सावधानी ही बचाव या सुरक्षा है। -सुपात्र शंखधर, मुख्य अग्निशमन अधिकारी, कुशीनगर
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जिले में आगलगी की घटनाएं
अप्रैल 2024: रामकोला क्षेत्र के कई गांवों में गेहूं की खड़ी फसल जलकर राख हो गई थी। लगभग 50 से अधिक किसानों की सैकड़ों एकड़ फसल नष्ट हुई थी। कई झोपड़ियां भी जल गई थीं। पडरौना और कसया से दमकल की गाड़ियां पहुंची थीं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि गाड़ियां देरी से पहुंचीं। फायर ब्रिगेड ने घंटों मशक्कत के बाद आबादी में आग फैलने से रोक लिया था।
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मई 2025 : दुदही क्षेत्र में शॉर्ट सर्किट से लगी आग ने विकराल रूप ले लिया था। करीब 15-20 घर पूरी तरह जल गए थे और लाखों की संपत्ति का नुकसान हुआ था। कुछ पशुओं की झुलसकर मौत हो गई थी। पडरौना स्टेशन के बड़े वाटर टेंडर्स ने मोर्चा संभाला था। पानी खत्म होने के बाद स्थानीय पंप सेटों का सहारा लेकर रिफिलिंग की गई और आग पर काबू पाया गया।
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मार्च का अंतिम सप्ताह चल रहा है। अप्रैल में गर्मी बढ़ने के साथ ही आग का सीजन शुरू हो जाएगा। एक छोटी सी चिंगारी सैकड़ों एकड़ खेतों में पककर तैयार गेहूं की फसल के साथ कई रिहायशी झोपड़ी को अपने आगोश में ले लेती है। इसलिए इस मौसम में लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। खेतों में अभी फसल पकने के कगार पर है। संसाधनों की अनुपलब्धता व फायर कर्मियों की कमी से हर साल सैकड़ों हेक्टेयर फसल जलकर राख हो जाती है। वर्ष 2025 में जिले में आगलगी की करीब 250 घटनाएं हुई थीं। इनमें ग्रामीण व शहरी आबादी के साथ खेत व खलिहान में लगी आग भी शामिल है।
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गर्मी के मौसम को देखते हुए गाड़ियों के मेंटेनेंस, पाइप, पंप आदि की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने का काम पूरा कर लिया गया है। कुल 48 कर्मचारियों के भरोसे तकरीबन 50 लाख की आबादी को बेहतर सेवा मुहैया कराने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अग्निशमन विभाग को कर्मियों की आवश्यकता है। वर्तमान में पूरे जिले में सिर्फ चार ही चालक हैं। विभाग का कहना है कि आग लगने की घटनाओं के समय बंदोबस्त कर लिया जाता है।
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जिले में संचालित हैं पांच फायर स्टेशन
जिले में वर्तमान में पांच फायर स्टेशन क्रियाशील हैं। आग लगने की सूचना मिलते के 52 सेकंड में टीम रवाना हो जाएगी। इनमें खड्डा, कप्तानगंज, सेवरही, रविंद्रनगर व कसया शामिल हैं। इन स्टेशनों पर मशीन, उपकरण व गाड़ियां मौजूद हैं। अब भी फायर स्टेशन, संसाधन व कर्मियों की जरूरत है। हाटा व तमकुहीराज क्षेत्र में आगलगी होने पर संसाधनों की कमी पड़ जाएगी।
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सिर्फ नौ वाटर टेंडर उपलब्ध
वर्तमान में अग्निशमन विभाग के बेड़े में अलग-अलग क्षमता के नौ बड़े वाहन हैं। इनमें दो 4500-4500 लीटर की क्षमता के अलावा शेष सात 2500-2500 लीटर क्षमता के वाहन हैं। इसके अलावा सिर्फ एक 400 लीटर क्षमता का एफक्यूआरवी व एक वाॅटर मिश्रित गाड़ी है। फोम टेंडर नहीं है। यह पेट्रोल पंप व रासायनिक आग से निपटने के लिए झाग वाले विशेष वाहन होते हैं। इसके अलावा एक 60 लीटर की बुलेट गाड़ी भी है। वहीं, 48 फायरमैन हैं, जिनमें पांच महिलाएं हैं।
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वाहन समय से नहीं पहुंचने से बढ़ जाती है क्षति
जिले के ग्रामीण इलाकों में सड़कें संकरी होने के कारण बड़े वाहन मौके तक नहीं पहुंच पाते, जिससे क्षति बढ़ जाती है। इसके अलावा आग बुझाते समय जब गाड़ी का पानी खत्म होता है, तो दोबारा भरने के लिए काफी दूर जाना पड़ता है। इसके लिए शहरों में पास के माॅल व हाईड्रेंट आदि का उपयोग करते हैं, लेकिन ग्रामीण इलाकों में इस तरह का कोई प्रबंध नहीं होता है। सिर्फ प्राकृतिक जलस्रोत अथवा पंपिंग मशीन से रिफिलिंग कर सकते हैं। ऐसे में आग फैलती जाती है और क्षति का दायरा बढ़ जाता है।
कोट:
गर्मी के दिनों में आग लगने की घटनाओं में वृद्धि हो जाती है। आग के फैलाव के लिए मौसम भी अनुकूल रहता है। इसमें कई घटनाएं ऐसी होती हैं, जो मानव जनित कारणों से उत्पन्न होती हैं। जागरूकता, सतर्कता, चेतनशीलता के साथ घटनाओं को कम किया जा सकता है। सावधानी ही बचाव या सुरक्षा है। -सुपात्र शंखधर, मुख्य अग्निशमन अधिकारी, कुशीनगर
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जिले में आगलगी की घटनाएं
अप्रैल 2024: रामकोला क्षेत्र के कई गांवों में गेहूं की खड़ी फसल जलकर राख हो गई थी। लगभग 50 से अधिक किसानों की सैकड़ों एकड़ फसल नष्ट हुई थी। कई झोपड़ियां भी जल गई थीं। पडरौना और कसया से दमकल की गाड़ियां पहुंची थीं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि गाड़ियां देरी से पहुंचीं। फायर ब्रिगेड ने घंटों मशक्कत के बाद आबादी में आग फैलने से रोक लिया था।
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मई 2025 : दुदही क्षेत्र में शॉर्ट सर्किट से लगी आग ने विकराल रूप ले लिया था। करीब 15-20 घर पूरी तरह जल गए थे और लाखों की संपत्ति का नुकसान हुआ था। कुछ पशुओं की झुलसकर मौत हो गई थी। पडरौना स्टेशन के बड़े वाटर टेंडर्स ने मोर्चा संभाला था। पानी खत्म होने के बाद स्थानीय पंप सेटों का सहारा लेकर रिफिलिंग की गई और आग पर काबू पाया गया।