फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kushinagar News ›   shiv paRWATI katha

पार्वती ने कठिन तपस्या से भगवान शिव को प्राप्त किया

Thu, 28 Jan 2021 01:08 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 28 Jan 2021 01:08 AM IST
विज्ञापन
shiv paRWATI katha
कुशीनगर : कथा वाचक मोरारी बापू ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अंग वस्त्र भी भेंट किया। संवाद न - फोटो : KUSHINAGAR
पार्वती ने कठिन तपस्या से भगवान शिव को प्राप्त किया
विज्ञापन

कथा के पांचवें दिन कामदेव के भस्म होने और पार्वती की तपस्या, चौथे दिन शिव चरित्र की कथा सुनाई
संवाद न्यूज एजेंसी
कसया। कुशीनगर में चल रही रामकथा के पांचवें दिन देवी मां पार्वती के जन्म, कामदेव के भस्म होने और भगवान शिव द्वारा विवाह के लिए मान जाने की कथा सुनाई। कथा व्यास मोरारी बापू ने कहा कि जब भगवान शंकर माता सती को राम कथा सुना रहे थे, तभी आकाश मार्ग से कई देवता जा रहे थे। सती के पूछने पर भगवान शंकर ने बताया कि दक्ष प्रजापति ने घमंडवश ब्रह्मा, विष्णु व महेश का अपमान करने के लिए अपने घर महायज्ञ का आयोजन किया था। इसमें तीनों देवताओं को नहीं बुलाया गया। सती ने जब वहां जाने की इच्छा जताई तो भगवान शंकर ने बिना बुलाए जाने पर कष्ट का भागी बनने की बात कही। इसके बाद भी सती नहीं मानी और पिता के घर चली र्गइं। यज्ञ में भगवान शंकर, विष्णु व ब्रह्मा का अपमान देखकर हवन कुंड में कूदकर खुद को अग्नि के समर्पित कर दिया। इसके बाद भगवान शंकर के दूतों ने यज्ञ स्थल को तहस-नहस कर दिया। भगवान शंकर भी शोकाकुल होकर समाधि में लीन हो गए।
कालांतर में माता सती देवराज हिमालय के घर में पार्वती के रूप में पैदा हुईं। वहां पहुंचे देवर्षि नारद ने हिमालय राज और माता मैनावती के सम्मुख बेटी का भाग्य बताते हुए कहा कि इसे जो वर मिलेगा वह शिव जैसा होगा। माता पार्वती ने भगवान शिव को ही पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कठिन तपस्या शुरू कर दी।
विज्ञापन

दूसरी ओर भगवान शंकर समाधि में लीन थे। देवी पार्वती का शिव से विवाह कराने के लिए समाधि भंग करना जरूरी था। ऐसे में देवताओं ने कामदेव को भेजा। कामदेव ने ध्यान भंग करने का प्रयास किया तो नाराज भगवान शंकर ने तीसरा नेत्र खोल दिया। जिससे कामदेव वहीं भस्म हो गए। कामदेव की पत्नी रति विलाप करते हुए भगवान शंकर के पास पहुंची। क्षमा याचना के बाद शिव ने कामदेव को द्वापर युग में श्रीकृष्ण के पुत्र के रूप में जन्म लेने का आशीर्वाद दिया था। समाधि टूटने के बाद भगवान विष्णु ने भगवान शंकर से पार्वती को पुन: अंगीकार करने की प्रार्थना की। भगवान शंकर ने सप्तऋषियों को पार्वती की परीक्षा लेने के लिए भेजा। पार्वती ने केवल शिव को ही अपना वर चुनने की बात कही। इसके बाद शिव पार्वती को पुन: अपनाने के लिए राजी हो गए।
विज्ञापन
विज्ञापन

प्रभु श्रीराम की कथा से पूर्व भगवान शिव की कथा जरूरी
कथा वाचक मोरारी बापू ने रामचरित मानस की मंगलवार को कथा को विस्तार देते हुए कहा कि भगवान राम और शिव एक दूसरे की पूजा करते हैं। ऐसे में भगवान राम की कथा तब तक आरंभ नहीं हो सकती है, जब तक भगवान शिव की कथा न सुन ली जाए। राम की यह कथा भगवान शिव ने माता सती को भी सुनाई थी।
कथा व्यास ने कहा कि प्रयागराज में कुंभ में पहुंचे भारद्वाज ऋषि ने याज्ञवल्क्य से पूछा था कि राम कौन हैं। इस पर उन्होंने कथा सुनाते हुए कहा था कि त्रेता युग में भगवान शिव ने कुंभज ऋषि से यह कथा सुनी थी। कथा सुनने के लिए भगवान शिव माता सती के साथ कुंभज ऋषि के आश्रम में पहुंचे। वहां ऋषि ने भगवान शिव व माता सती की पूजा की। इससे माता सती के मन में संशय पैदा हो गया। कथा में उनका मन नहीं रमा। कथा समाप्त होने पर कैलाश लौटते समय रास्ते में पत्नी वियोग में भटक रहे भगवार राम को देखकर शिव ने उन्हें प्रणाम किया। यह देख सती को फिर संशय हुआ। भगवान शंकर ने बताया कि यही मेरे अराध्य राम हैं। संशय वश माता सती ने सीता का रूप धारण कर राम की परीक्षा ली। राम ने सती को पहचान लिया। भगवान शिव ने भी अपने योग बल से इस घटना को देख लिया। इसके बाद कैलाश पहुंचकर महेश्वर समाधि में लीन हो गए। 86 हजार वर्ष बाद जब उनकी समाधि टूटी तो माता सती की हालत देखकर वे दु:खी हो गए और वहीं अपने सम्मुख बैठाकर राम कथा सुनाई थी।

मोरारी बापू ने गणतंत्र दिवस व पुरस्कार पाने वालों को दी बधाई
कसया। कथा वाचक मोरारी बापू ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर अपनी कुटिया के सामने ध्वजारोहण किया। इसके बाद व्यास पीठ पर आते ही सभी देशवासियों और दूसरे देशों में रह रहे भारतीयों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई दी। इसी क्रम में पद्म पुरस्कारों समेत अन्य पुरस्कार पाने वाले लोगों को भी बधाई दी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed