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Kushinagar News: ट्रेनों की सुरक्षा भगवान भरोसे, असलहा या विस्फोटक लेकर जाइए कोई जांच नहीं

Wed, 11 Oct 2023 01:26 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 11 Oct 2023 01:26 AM IST
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Safety of trains depends on God, carry weapons or explosives, no investigation
- दो रूटों से हर रोज गुजरती हैं 22 जोड़ी ट्रेनें, सिर्फ नाम की बनी है जीआरपी और आरपीएफ की चौकियां
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- रेलवे स्टेशन से गुजरने वाली ट्रेनों की पड़ताल में सुरक्षा की खुली पोल, लगेज बोगी में रखे थे लावारिस सामान
- पडरौना में जीआरपी और कप्तानगंज में है आरपीएफ की चौकी, सुरक्षा के नाम पर कोई इंतजाम तक नहीं

पडरौना। गोरखपुर से बिहार जाने वाली ट्रेनों में तस्करों का बोलबाला है। अपराधियों के लिए यह सबसे सुरक्षित साधन हो गया है। इससे असलहा, गांजा व शराब की तस्करी की जा रही है। सुरक्षा के नाम पर कोई बंदोबस्त नहीं है। इस रूट पर सिर्फ नाम के लिए जीआरपी और आरपीएफ की चौकियां हैं। रेलवे स्टेशन पर पहुंचने वाली ट्रेनों में बिना जांच पड़ताल किए यात्री कोच में बोरा, झोला, गत्ता आदि में सामान लेकर चढ़ जा रहे हैं। हाल ही में ट्रेन में यूएसए निर्मित दो पिस्टल के साथ दबोचे गए दो युवक और गांजा के साथ पकड़ी गई युवतियां ट्रेनों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल रही हैं। मंगलवार को रेलवे स्टेशन से गुजरने वाली ट्रेनों की लाइव पड़ताल की गई तो सुरक्षा व्यवस्था गायब मिली।
गोरखपुर-नरकटियागंज रूट स्थित कप्तानगंज जंक्शन से कप्तानगंज-गोरखपुर, कप्तानगंज-नरकटियागंज और कप्तानगंज-सिवान रूट की ट्रेनों के अलावा लंबी दूरी की ट्रेनों का संचालन होता है। स्टेशन पर यात्रियों की अधिकांश समय भीड़ रहती है। दिल्ली से रक्सौल को जाने वाली 15274 सत्याग्रह एक्सप्रेस प्लेटफार्म नंबर-एक पर 11.45 बजे पहुंची। प्लेटफार्म पर यात्रियों का ट्रेन में दाखिल होने और उतरने का सिलसिला भीड़ के बीच जारी रहा, लेकिन सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं दिखा। एक भी सुरक्षाकर्मी नजर नहीं आया। बोरे में सामान रखकर यात्री इधर-उधर दौड़ रहे थे। ट्रेन की सीट पर तो भीड़ थी, खिड़की पर लटककर यात्रा करते भी यात्री नजर आए।
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स्टेशन के गेट पर नहीं दिखे सुरक्षाकर्मी
सिवान से गोरखपुर को जाने वाली 05153 डेमू स्पेशल 12 बजे प्लेटफार्म नंबर तीन पर रूकी। यात्री स्टेशन से बाहर जाने के लिए ओवरब्रिज के बजाय जान जोखिम में डालकर रेलवे लाइन पार कर प्लेटफार्म नंबर एक पर जाने लगे। बांद्रा से बरौनी जाने वाली 19037 अवध एक्सप्रेस दोपहर 1.10 बजे प्लेटफार्म नंबर दो पर रूकी तो यात्रियों की भीड़ बढ़ गई और रेलवे स्टेशन से बाहर निकलने के लिए धक्का मुक्की हुई। थावे से कप्तानगंज तक आने वाली 05165 सवारी गाड़ी प्लेटफार्म नंबर-एक पर दोपहर में एक बजे पहुंची तो मुख्य गेट पर कोई सुरक्षाकर्मी नहीं दिखाई दिया। बिना रोेक टोक के ट्रेनों में सामान का खेप रखा और उतारा जाता रहा। वहीं तमकुहीरोड रेलवे स्टेशन पर कप्तानगंज से थावे तक जाने वाली पैसेंजर ट्रेन दिन में 15.12 बजे पहुंची। यात्रियों का कहना है कि इस रूट पर चार पैसेंजर ट्रेनें चलती हैं। कोच में ही लोग सामान लाकर फेंक दिए जाते हैं। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था न होना चिंता का विषय है। तमकुहीरोड यूपी-बिहार सीमा का बड़ा व्यावसायिक केंद्र है। यहां रोजाना दोनों प्रदेशों के सैकड़ों यात्री आते-जाते हैं। इस रूट पर छह ट्रेनों में मात्र गोमतीनगर-छपरा एक्सप्रेस और गोरखपुर-पाटलिपुत्र मेल ट्रेन में यात्रियों की सुरक्षा व तस्करी रोकने को लेकर आरपीएफ कभी-कभी सक्रिय नजर आती है।
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सादे में खड़ा जीआरपी का सिपाही नहीं कर रहा था जांच
दोपहर 2.29 बजे पडरौना रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर-एक पर थावे जंक्शन तक जाने वाली पैंसेंजर ट्रेन पहुंची। चिलचिलाती धूप में खड़े यात्रियों के ट्रेन में बैठने की होड़ लग गई। शौचालय के पास दो बोरे में रखे सामान को एक शख्स सिर पर उठाकर बोगी में रखा। इसके अलावा अन्य कई लोगों ने बोरे में भरा सामान रखा, लेकिन साथ नहीं गए। पूछने पर बताया कि फल और बाजार के सामान थे, जो आगे के स्टेशन पर उतार लिए जाएंगे। सैकड़ों यात्रियों की भीड़ में एक जीआरपी का सिपाही सादे वर्दी में दिखा। वह भी न तो किसी सामान की जांच किया और न ही ट्रेन की सुरक्षा को देखा।

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रेलवे पुलिस बल की स्थायी व्यवस्था की मांग
तमकुहीरोड के कस्बे के लोगों का कहना है कि यहां यात्रियों की संख्या और पड़ोसी प्रांत बिहार होने के कारण बराबर रेलवे पुलिस की एक यूनिट की स्थापित करने की मांग की जा रही है। पर, रेलवे की तरफ से कोई पहल नहीं हुई। कस्बे के व्यापारी नेता पप्पू जायसवाल व शुकदेव रौनियार का कहना है कि ट्रेनों की आवाजाही के चलते स्टेशन पर देर रात तक चहल पहल रहती है। लोगों ने रेल प्रशासन से सुरक्षा की दृष्टि से तमकुहीरोड स्टेशन पर रेलवे पुलिस बल की एक यूनिट की स्थापना की मांग की है।

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वर्जन-
सवारी गाड़ियों में (पैसेंजर) स्थानीय यात्री ही होते हैं। वे अपनी सुरक्षा को लेकर सक्षम होते हैं। इसलिए पैसेंजर ट्रेनों की सुरक्षा को लेकर जीआरपी की जिम्मेदारी रेलवे स्टेशनों पर जांच की है। बाकी लंबी दूरी की ट्रेनों में आरपीएफ की टीम चलती है। यदि सुरक्षा के लिहाज से कोई शिकायत मिलती है तो वहां आरपीएफ और जीआरपी की संयुक्त टीम भेजी जाती है।
हिमांशु राव, जनसंपर्क अधिकारी, पूर्वोंत्तर रेलवे
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