{"_id":"5f7b579e8ebc3e9bc9199688","slug":"rhinoeros-died-in-river-kushinagar-news-gkp368212055","type":"story","status":"publish","title_hn":"नेपाल से बहकर आए गैंडे की बैराज के फाटक में फंसकर मौत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नेपाल से बहकर आए गैंडे की बैराज के फाटक में फंसकर मौत
विज्ञापन
जिन्दगी के लिए वाल्मीकि गंडक बैराज फाटक पर सघर्ष करत गैंडा ।
- फोटो : KUSHINAGAR
नेपाल से बहकर आए गैंडे की बैराज के फाटक में फंसकर मौत
मृत गैंडे के कई अंगों का सैंपल सुरक्षित कर लिया गया है
अमर उजाला ब्यूरो
खड्डा/कुशीनगर। गंडक नदी की तेज धारा में नेपाल के चितवन वन पार्क से बहकर भारत की तरफ आए मेहमान गैंडे की गंडक बैराज के फाटक में फंसकर मौत हो गई। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के वनकर्मियों ने मेहमान गैंडे को बचाने की पूरी कोशिश की। गैंडे के शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद गड्ढा खोदकर दफन कर दिया गया।
नेपाल के चितवन प्राणी उद्यान से गंडक नदी के रास्ते बहते हुए एक गैंडा गंडक बैराज के फाटक नंबर चार पर आकर फंस गया था। पानी के तीव्र दबाव से जूझ रहे इस वन्यजीव की जानकारी होते ही सोमवार को जल संसाधन विभाग के सहयोग से फाटक उठाकर निकाला गया। परंतु जब तक वनकर्मी उसे नदी से निकाल पाते, गैंडे की मौत हो चुकी थी। डीएफओ ने बताया कि इस अंतरराष्ट्रीय पशु को बचाने के लिए रेस्क्यू किया गया लेकिन सफलता नहीं मिली। मृत गैंडे के शरीर के कई अंगों का सैंपल सुरक्षित कर लिया गया है। इसे जांच के लिए देहरादून व बरेली पशु चिकित्सा अनुसंधान भेजा जाएगा । इस दौरान वन संरक्षक हेमकांत राय, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के कमलेश मौर्य, प्रशिक्षु एसीएफ अतीश कुमार, पशु चिकित्साधिकारी डॉ एसबी रंजन, डॉ मनोज कुमार टोनी, रेंजर महेश प्रसाद, फील्ड बॉयोलॉजिस्ट सौरभ वर्मा आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
मृत गैंडे के कई अंगों का सैंपल सुरक्षित कर लिया गया है
अमर उजाला ब्यूरो
खड्डा/कुशीनगर। गंडक नदी की तेज धारा में नेपाल के चितवन वन पार्क से बहकर भारत की तरफ आए मेहमान गैंडे की गंडक बैराज के फाटक में फंसकर मौत हो गई। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के वनकर्मियों ने मेहमान गैंडे को बचाने की पूरी कोशिश की। गैंडे के शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद गड्ढा खोदकर दफन कर दिया गया।
नेपाल के चितवन प्राणी उद्यान से गंडक नदी के रास्ते बहते हुए एक गैंडा गंडक बैराज के फाटक नंबर चार पर आकर फंस गया था। पानी के तीव्र दबाव से जूझ रहे इस वन्यजीव की जानकारी होते ही सोमवार को जल संसाधन विभाग के सहयोग से फाटक उठाकर निकाला गया। परंतु जब तक वनकर्मी उसे नदी से निकाल पाते, गैंडे की मौत हो चुकी थी। डीएफओ ने बताया कि इस अंतरराष्ट्रीय पशु को बचाने के लिए रेस्क्यू किया गया लेकिन सफलता नहीं मिली। मृत गैंडे के शरीर के कई अंगों का सैंपल सुरक्षित कर लिया गया है। इसे जांच के लिए देहरादून व बरेली पशु चिकित्सा अनुसंधान भेजा जाएगा । इस दौरान वन संरक्षक हेमकांत राय, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के कमलेश मौर्य, प्रशिक्षु एसीएफ अतीश कुमार, पशु चिकित्साधिकारी डॉ एसबी रंजन, डॉ मनोज कुमार टोनी, रेंजर महेश प्रसाद, फील्ड बॉयोलॉजिस्ट सौरभ वर्मा आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन