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Kushinagar News: कैशलेस चिकित्सा सुविधा नहीं, नियमितीकरण जरूरी
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पडरौना। अनुदानित महाविद्यालय स्ववित्तपोषित शिक्षक संघ उत्तर प्रदेश के आह्वान पर मंगलवार को शिक्षकों ने प्रदर्शन किया। चार अनुदानित महाविद्यालयों के स्ववित्तपोषित शिक्षकों ने नकदी रहित चिकित्सा सुविधा का बहिष्कार किया और नियमितीकरण की मांग की। उन्होंने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन कलेक्ट्रेट प्रभारी रवि प्रकाश श्रीवास्तव को सौंपा।
ज्ञापन में स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों को अनुदान पर लेने की मांग की गई। शिक्षकों ने कहा कि नकदी रहित चिकित्सा सुविधा उपयोगी है। लेकिन यह नियमित वेतन और सेवा सुरक्षा का विकल्प नहीं हो सकती। प्रदेश के 331 अनुदानित महाविद्यालयों में करीब 25 वर्ष से स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रम चल रहे हैं। इनमें लगभग तीन हजार विश्वविद्यालय अनुमोदित शिक्षक शिक्षण कार्य कर रहे हैं। उनकी सेवा और वेतन व्यवस्था अब तक स्थायी नहीं हो सकी है। वर्ष 2006 में कुछ बीएड पाठ्यक्रमों को अनुदान पर लिया गया था।
इस दौरान डॉ. विनोद सिंह, डॉ. रितेश सिंह, डॉ. राकेश चतुर्वेदी, डॉ. संदीप पांडेय, डॉ. मिथिलेश पांडेय, डॉ. अजय सिंह, सुरेंद्र गुप्ता, डॉ. विवेकानंद, डॉ. बच्चा प्रसाद, डॉ. शंभू प्रसाद, डॉ. हरिओम मिश्र आदि मौजूद रहे।
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ज्ञापन में स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों को अनुदान पर लेने की मांग की गई। शिक्षकों ने कहा कि नकदी रहित चिकित्सा सुविधा उपयोगी है। लेकिन यह नियमित वेतन और सेवा सुरक्षा का विकल्प नहीं हो सकती। प्रदेश के 331 अनुदानित महाविद्यालयों में करीब 25 वर्ष से स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रम चल रहे हैं। इनमें लगभग तीन हजार विश्वविद्यालय अनुमोदित शिक्षक शिक्षण कार्य कर रहे हैं। उनकी सेवा और वेतन व्यवस्था अब तक स्थायी नहीं हो सकी है। वर्ष 2006 में कुछ बीएड पाठ्यक्रमों को अनुदान पर लिया गया था।
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इस दौरान डॉ. विनोद सिंह, डॉ. रितेश सिंह, डॉ. राकेश चतुर्वेदी, डॉ. संदीप पांडेय, डॉ. मिथिलेश पांडेय, डॉ. अजय सिंह, सुरेंद्र गुप्ता, डॉ. विवेकानंद, डॉ. बच्चा प्रसाद, डॉ. शंभू प्रसाद, डॉ. हरिओम मिश्र आदि मौजूद रहे।
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