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Kushinagar News: रेन कट व रैट होल से ग्रामीणों की धड़कनें बढ़ीं, 2007 की तबाही भूल गया बाढ़ खंड
Wed, 13 May 2026 02:32 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Wed, 13 May 2026 02:32 AM IST
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झाड़ियों से पटा एपी बांध रैट होल से बांध की सुरक्षा को हो सकता है खतरा।संवाद
तमकुहीरोड (कुशीनगर)। जिले के सेवरही क्षेत्र में बहने वाली बड़ी गंडक नदी (नारायणी) के किनारे रेन कट व रैट होल एक बार फिर तटवर्ती गांवों के लोगों के लिए बरसात का मौसम परेशानी का सबब बन सकता है। नरवाजोत एक्सटेंशन से अहिरौलीदान तक लगभग 17.5 किलोमीटर लंबे एपी तटबंध (अहिरौली-पिपरासी) पर जगह-जगह रेन कट व रैट होल ग्रामीणों की चिंता बढ़ा रहे हैं। अगले महीने मानसून आने वाला है लेकिन अब तक कोई बंदोबस्त नहीं किया गया है। ऐसे में नदी के बंधे के किनारे व प्रभावित होने वाले गांवों को लोगों को 17 साल पुरानी 2007 की बाढ़ की विभीषिका याद आ रही है। जब पूरा क्षेत्र जलमग्न हो गया था और गांव के लोगों का संपर्क कट गया था।
गौरतलब है कि वर्ष 2007 में आए बाढ़ के कहर को घघवा जगदीश गांव के लोगों अब भी भूल नहीं पाए हैं। उस समय वाल्मीकिनगर बैराज से छह लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने के बाद एपी तटबंध पर दबाव बढ़ा और रैट होल के कारण घघवा जगदीश के पास बांध टूट गया। इससे नदी के किनारे के उत्तर प्रदेश और बिहार के सैकड़ों गांव जलमग्न हो गए थे। लोगों का संपर्क पूरी तरह से कट गया था। हालात यह था कि एनएच-28 तक पानी पहुंच गया और महीनों तक लोगों को बाढ़ की विभीषिका लोगों को झेलनी पड़ी थी।
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जर्जर बांध और चूहों का बसेरा
नदी के किनारे व आसपास के गांवों के लोगों का कहना है कि तटबंध का काफी हिस्सा पिछले कई वर्षों के दबाव के कारण कमजोर हो चुका है। वर्तमान में दो तरह की समस्याएं हैं। उनमें बंधे में बने हुए रैट होल व रेन कट शामिल हैं। समय रहते अगर बाढ़ खंड की तरफ से रेन कट व रैट होल को बंद नहीं किया गया तो बारिश के मौसम में पानी का दबाव बढ़ते ही पानी गांवों तक पहुंच जाएगा। लोगों का कहना है कि तटबंध के किनारे खेती होने के कारण फसल कटाई के बाद बड़ी संख्या में चूहे बांध में बिल बना लेते हैं। पानी का स्तर बढ़ने पर यही बिल रिसाव का कारण बनते हैं। बरसात के चलते बांध की ढलानों पर मिट्टी कट कर नालियां बन गई हैं, जिनकी समय रहते मरम्मत नहीं की गई। अगर मरम्मत नहीं हुआ तो बाढ़ की तबाही से गांव व वहां रहने वाले लोगों को बचाना कठिन होगा।
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2024 से नहीं लिया सबक
बता दें कि वर्ष 2024 में भी बाढ़ खंड की लापरवाही तटबंध के किनारे व आसपास के लोगों के लिए भारी पड़ी थी। जवही दयाल गांव के पास तटबंध पर एक साथ 25 से अधिक जगहों पर सिपेज शुरू हो गया था। स्थिति इतनी भयावह हो गई थी कि ग्रामीणों के भारी विरोध के बाद उच्च अधिकारियों को मौके पर कैंप करना पड़ा था और कई दिनों की मशक्कत के बाद किसी तरह खतरा टला था। इसके बावजूद अभी तटबंध में मौजूद रेन कट व रैट होल को ठीक कराने के लिए काम चल रहा है लेकिन उसकी रफ्तार काफी सुस्त ऐसे में पूरा नहीं होन पर लोगों को मुसीबत झेलनी पड़ेगी।
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समय रहते तटबंध की मरम्मत कराना जरूरी
एपी तटबंध व नदी के किनारे रहने वाले प्रभावित गांवों के लोगों का कहना है कि यदि मानसून की सक्रियता और गंडक के डिस्चार्ज बढ़ने से पहले रैट होल व रेन कट की मरम्मत नहीं की गई, तो इस बार भी तबाही से इनकार नहीं किया जा सकता। इस लापरवाही से ग्रामीणों को अपनी जान-माल की बर्बादी से चुकानी पड़ सकती है। लोगों का कहना है कि तटबंध का मरम्मत कार्य अगर समय रहते पूरा हो गया कुछ राहत मिल सकेगी,न तो उन्हें जब बारिश होने के बाद डिस्चार्ज बढ़ते ही बाढ़ की मार झेलनी पड़ेगी।
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बांध बचाव के लिए प्रस्तावित सभी परियोजनाओं पर निर्माण कार्य चल रहा है। रैट होल और रैन कट की मरम्मत का कार्य बहुत शीघ्र शुरू कराया जाएगा। बरसात शुरू होने से पहले बाढ़ बचाव के सभी कार्य पूरे कर लिए जाएंगे। -दीपरतन सिंह, एसडीओ, बाढ़ खंड, सेवरही
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गौरतलब है कि वर्ष 2007 में आए बाढ़ के कहर को घघवा जगदीश गांव के लोगों अब भी भूल नहीं पाए हैं। उस समय वाल्मीकिनगर बैराज से छह लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने के बाद एपी तटबंध पर दबाव बढ़ा और रैट होल के कारण घघवा जगदीश के पास बांध टूट गया। इससे नदी के किनारे के उत्तर प्रदेश और बिहार के सैकड़ों गांव जलमग्न हो गए थे। लोगों का संपर्क पूरी तरह से कट गया था। हालात यह था कि एनएच-28 तक पानी पहुंच गया और महीनों तक लोगों को बाढ़ की विभीषिका लोगों को झेलनी पड़ी थी।
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जर्जर बांध और चूहों का बसेरा
नदी के किनारे व आसपास के गांवों के लोगों का कहना है कि तटबंध का काफी हिस्सा पिछले कई वर्षों के दबाव के कारण कमजोर हो चुका है। वर्तमान में दो तरह की समस्याएं हैं। उनमें बंधे में बने हुए रैट होल व रेन कट शामिल हैं। समय रहते अगर बाढ़ खंड की तरफ से रेन कट व रैट होल को बंद नहीं किया गया तो बारिश के मौसम में पानी का दबाव बढ़ते ही पानी गांवों तक पहुंच जाएगा। लोगों का कहना है कि तटबंध के किनारे खेती होने के कारण फसल कटाई के बाद बड़ी संख्या में चूहे बांध में बिल बना लेते हैं। पानी का स्तर बढ़ने पर यही बिल रिसाव का कारण बनते हैं। बरसात के चलते बांध की ढलानों पर मिट्टी कट कर नालियां बन गई हैं, जिनकी समय रहते मरम्मत नहीं की गई। अगर मरम्मत नहीं हुआ तो बाढ़ की तबाही से गांव व वहां रहने वाले लोगों को बचाना कठिन होगा।
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2024 से नहीं लिया सबक
बता दें कि वर्ष 2024 में भी बाढ़ खंड की लापरवाही तटबंध के किनारे व आसपास के लोगों के लिए भारी पड़ी थी। जवही दयाल गांव के पास तटबंध पर एक साथ 25 से अधिक जगहों पर सिपेज शुरू हो गया था। स्थिति इतनी भयावह हो गई थी कि ग्रामीणों के भारी विरोध के बाद उच्च अधिकारियों को मौके पर कैंप करना पड़ा था और कई दिनों की मशक्कत के बाद किसी तरह खतरा टला था। इसके बावजूद अभी तटबंध में मौजूद रेन कट व रैट होल को ठीक कराने के लिए काम चल रहा है लेकिन उसकी रफ्तार काफी सुस्त ऐसे में पूरा नहीं होन पर लोगों को मुसीबत झेलनी पड़ेगी।
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समय रहते तटबंध की मरम्मत कराना जरूरी
एपी तटबंध व नदी के किनारे रहने वाले प्रभावित गांवों के लोगों का कहना है कि यदि मानसून की सक्रियता और गंडक के डिस्चार्ज बढ़ने से पहले रैट होल व रेन कट की मरम्मत नहीं की गई, तो इस बार भी तबाही से इनकार नहीं किया जा सकता। इस लापरवाही से ग्रामीणों को अपनी जान-माल की बर्बादी से चुकानी पड़ सकती है। लोगों का कहना है कि तटबंध का मरम्मत कार्य अगर समय रहते पूरा हो गया कुछ राहत मिल सकेगी,न तो उन्हें जब बारिश होने के बाद डिस्चार्ज बढ़ते ही बाढ़ की मार झेलनी पड़ेगी।
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बांध बचाव के लिए प्रस्तावित सभी परियोजनाओं पर निर्माण कार्य चल रहा है। रैट होल और रैन कट की मरम्मत का कार्य बहुत शीघ्र शुरू कराया जाएगा। बरसात शुरू होने से पहले बाढ़ बचाव के सभी कार्य पूरे कर लिए जाएंगे। -दीपरतन सिंह, एसडीओ, बाढ़ खंड, सेवरही