{"_id":"580ba5ec4f1c1b453d7042e9","slug":"programme-of-increasing-nagrpalika-area-in-pending","type":"story","status":"publish","title_hn":"छह साल से अटकी विस्तारीकरण की फाइल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छह साल से अटकी विस्तारीकरण की फाइल
kushinagar
Updated Sat, 22 Oct 2016 11:16 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पडरौना। जिले की एक मात्र नगर पालिका परिषद पडरौना के सीमा विस्तार का मामला पिछले छह साल से लटका हुआ है। कई बार मामला विधानसभा में भी उठ चुका है। परंतु अफसरों के रुचि न लेने की वजह से मामला लटका हुआ है। नगर पालिका सीमा का विस्तार न होने के कारण अब शहर में आ चुके ग्रामीण क्षेत्रों का भी विकास नहीं हो पा रहा है।
पांच दशक पहले पडरौना को नगर पालिका का दर्जा मिला था। वर्ष 1965 में इसकी सीमा का निर्धारण हुआ था। तब से अब तक जगदीशपुरम कॉलोनी समेत कई नए मुहल्ले बस चुके हैं। सरकारी अभिलेख में अभी भी इस नगर पालिका की जनसंख्या 45 हजार है जबकि आबादी अब 80 हजार के करीब पहुंच चुकी है। वर्ष 2010 में पडरौना नगर पालिका परिषद की बैठक में सीमा विस्तार का प्रस्ताव पारित किया गया। तत्कालीन डीएम एसवीएस रंगाराव ने भी नगर सीमा से सटे 18 राजस्व गांवों जंगल विशुनपुरा, जंगल बकुलहा, भरवलिया, जंगल बेलवा, जंगल अमवा, नोनिया पट्टी, सोहरौना, बंधू छपरा, अहिरौली बुजुर्ग, बेलवा मिश्र, बलुचहां, भिस्वा सरकारी, मोतीछपरा, दमवतिया, मिल्की, सेवक छपरा, परसौनी कला आदि को इसमें सम्मलित करते हुए विस्तार के प्रस्ताव को सहमति दी थी। परंतु कार्रवाई नहीं हुई तो वर्ष 2014 में सात जुलाई को भाजपा के फाजिलनगर विधायक गंगा सिंह कुशवाहा ने विधान सभा में नियम 51 के तहत इस मामले को उठाया। भाजपा के पूर्व सह क्षेत्रीय मीडिया प्रभारी गिरीश चंद्र चतुर्वेदी के अनुसार उनके आग्रह पर इस वर्ष पुन: विधायक गंगा सिंह कुशवाहा ने ही इस मामले में सरकार को पत्र लिखा। इसके बाद शासन के अनु. सचिव राजेंद्र सिंह मौर्य ने डीएम को पत्र भेजकर नगर पालिका का विस्तार का प्रस्ताव शासन को भेजने को कहा। परंतु इस पत्र के बाद भी विस्तारीकरण का मामला लंबित है। विस्तार न होने से जगदीशपुरम समेत अन्य मुहल्ले के लोगों को शहरी क्षेत्र की सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
इस संबंध में नगर पालिका अध्यक्ष शिवकुमारी देवी का कहना है कि नगर के सीमा विस्तार के लिए प्रस्ताव बहुत पहले भेजा गया था। बाद में नए शासनादेश के तहत बोर्ड से प्रस्ताव मांगा गया था। बोर्ड की बैठक में भी इसका प्रस्ताव पारित कराकर डीएम को भेज दिया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
पांच दशक पहले पडरौना को नगर पालिका का दर्जा मिला था। वर्ष 1965 में इसकी सीमा का निर्धारण हुआ था। तब से अब तक जगदीशपुरम कॉलोनी समेत कई नए मुहल्ले बस चुके हैं। सरकारी अभिलेख में अभी भी इस नगर पालिका की जनसंख्या 45 हजार है जबकि आबादी अब 80 हजार के करीब पहुंच चुकी है। वर्ष 2010 में पडरौना नगर पालिका परिषद की बैठक में सीमा विस्तार का प्रस्ताव पारित किया गया। तत्कालीन डीएम एसवीएस रंगाराव ने भी नगर सीमा से सटे 18 राजस्व गांवों जंगल विशुनपुरा, जंगल बकुलहा, भरवलिया, जंगल बेलवा, जंगल अमवा, नोनिया पट्टी, सोहरौना, बंधू छपरा, अहिरौली बुजुर्ग, बेलवा मिश्र, बलुचहां, भिस्वा सरकारी, मोतीछपरा, दमवतिया, मिल्की, सेवक छपरा, परसौनी कला आदि को इसमें सम्मलित करते हुए विस्तार के प्रस्ताव को सहमति दी थी। परंतु कार्रवाई नहीं हुई तो वर्ष 2014 में सात जुलाई को भाजपा के फाजिलनगर विधायक गंगा सिंह कुशवाहा ने विधान सभा में नियम 51 के तहत इस मामले को उठाया। भाजपा के पूर्व सह क्षेत्रीय मीडिया प्रभारी गिरीश चंद्र चतुर्वेदी के अनुसार उनके आग्रह पर इस वर्ष पुन: विधायक गंगा सिंह कुशवाहा ने ही इस मामले में सरकार को पत्र लिखा। इसके बाद शासन के अनु. सचिव राजेंद्र सिंह मौर्य ने डीएम को पत्र भेजकर नगर पालिका का विस्तार का प्रस्ताव शासन को भेजने को कहा। परंतु इस पत्र के बाद भी विस्तारीकरण का मामला लंबित है। विस्तार न होने से जगदीशपुरम समेत अन्य मुहल्ले के लोगों को शहरी क्षेत्र की सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
विज्ञापन
इस संबंध में नगर पालिका अध्यक्ष शिवकुमारी देवी का कहना है कि नगर के सीमा विस्तार के लिए प्रस्ताव बहुत पहले भेजा गया था। बाद में नए शासनादेश के तहत बोर्ड से प्रस्ताव मांगा गया था। बोर्ड की बैठक में भी इसका प्रस्ताव पारित कराकर डीएम को भेज दिया गया है।
विज्ञापन