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Kushinagar News: सेठी ढाबा संचालक समेत तीन को पुलिस ने भिजवाया जेल, जांच में सामने आ सकते हैं कई और नाम

Sun, 09 Nov 2025 01:16 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Sun, 09 Nov 2025 01:16 AM IST
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Police sent three people, including the Sethi Dhaba operator, to jail; many more names may emerge during the investigation.
कुशीनगर। हाटा कोतवाली क्षेत्र के मुजहना हेतिमपुर टोल प्लाजा के पास संचालित सेठी ढाबा के संचालक सुनील समेत तीन को पुलिस ने शनिवार को कोर्ट में पेश किया, जहां से जेल भेज दिया गया। सुनील अपने सहयोगियों की मदद से हाईवे पर अवैध परिवहन करने वालों को अधिकारियों और सचल दल की लोकेशन लीक कर वसूली करता था। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज किया था। पुलिस इसमें संलिप्त अज्ञात लोगों का नाम विवेचना में शामिल कर सकती है।
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मेरठ जिले के सरधना थाना क्षेत्र के मुडेडा निवासी सुनील कुमार ने एनएच-28 पर सेठी ढाबा करीब तीन माह पूर्व खोला। ढाबा पर इसी के गांव के सुरेश कुमार और पीलीभीत के सोनगढ़ी थाना क्षेत्र के वार्ड नंबर 25 गोपाल सिंह निवासी अंशु कुमार भी रहता था। हाईवे से अवैध परिवहन करने वाली लंबी दूरी की लग्जरी बसें या ओवरलोड वाहनों को एंट्री कराने और जिले से पास कराने का जिम्मा लेते थे। हाईवे पर सक्रिय अधिकारियों और जीएसटी के सचल दल की लोकेशन देकर चालान का भय दिखाकर अवैध वसूली करते थे।
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हाटा कोतवाली पुलिस ने सहायक आयुक्त (प्रभारी) सचल दल राज्यकर कुशीनगर की तहरीर पर सेठी ढाबा के संचालक सुनील कुमार समेत अज्ञात पर केस दर्ज किया। पुलिस की विवेचना में इसके दोनों सहयोगियों का नाम सामने आया। पुलिस के अनुसार हाईवे से निकलने वाले ट्रकों व लग्जरी बसों के चालकों को अधिकारियों व प्रवर्तन वाहन की सूचना व लोकेशन देकर वाहनों को पास कराने और अवैध वसूली का कार्य करते थे। यह आपराधिक षड़यंत्र कर धोखाधड़ी करके संगठित गिरोह बनाकर ट्रकों व लग्जरी बसों आदि वाहनों से चालान होने का भय दिखाकर अवैध वसूली करते थे। पुलिस की जांच में इसमें कई और लोगों का नाम भी सामने आ सकता है।
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सेठी ढाबा से मिलता था टोकन...धड़ल्ले से बिहार में एंट्री करते थे ओवरलोड वाहन
हाटा। कोतवाली क्षेत्र के चर्चित सेठी ढाबा पर तीन महीनों में ही सुनील ने ऐसा जाल बिछाया गया कि वाहन चालक इसके इशारे पर चलने लगे। ट्रकों और लग्जरी बसों के ऑपरेटरों के बीच सेठी ढाबा टोकन की धाक इतनी बढ़ गई कि जांच चौकियों से लेकर सचल दल तक कोई भी वाहन रोकने की हिम्मत नहीं करता था। अब इस पूरे खेल का पर्दाफाश राज्य कर विभाग के सचल दल ने किया है। जेल भेजे गए आरोपियों ने पुलिस की पूछताछ में कई लोगों के नाम बताए हैं। गोपनीय तरीके से पुलिस इनकी भूमिका की जांच शुरू कर दी है।
मेरठ का रहने वाला सेठी ढाबा संचालक सुनील कुमार ने बीते कुछ महीनों में ट्रक व बस चालकों से अवैध वसूली का जाल हाईवे पर बिछाया था। वाहन चालक इसके ढाबे से टोकन लेते थे। इसके बाद उन्हें किसी भी जांच चौकी या परिवहन विभाग की चेकिंग टीम की ओर से नहीं रोका जाता था। यह टोकन एक तरह से फ्री पास बन गया था। इसके बूते पर ओवरलोड वाहन या बिना परमिट के चलने वाले वाहन भी बिना किसी रोक के गुजरते थे।
कुशीनगर से गोरखपुर और बिहार सीमा तक जाने वाले ट्रक चालकों के बीच सेठी टोकन की चर्चा आम थी। बताया जा रहा है कि ढाबा संचालक ने विभागीय कर्मियों और कुछ प्रभावशाली लोगों से मिलीभगत कर यह पूरा नेटवर्क खड़ा किया था। हाईवे पर गुजरने वाले दर्जनों वाहन रोजाना इस टोकन के नाम पर धनराशि चुकाते थे। बदले में उन्हें न तो ओवरलोडिंग का डर रहता था, न ही दस्तावेजों की जांच की चिंता। जिला प्रशासन के अधिकारियों को जब इस खेल की जानकारी मिली तो टीम ने गोपनीय रूप से जांच शुरू की।
कई वाहनों से मिले टोकन की जांच में पाया गया कि यह सब सेठी ढाबा के जरिए जारी किया जा रहा है। विभाग ने जब प्रमाण जुटाए तो असिस्टेंट कमिश्नर ने खुद हाटा कोतवाली में पहुंचकर केस दर्ज कराया। सेठी ढाबा पर इलाके में ट्रक चालकों और ढाबा संचालकों में इस कार्रवाई के बाद हड़कंप मच गया है। कई लोगों का कहना है कि बीते कुछ महीनों से हाईवे पर इस ढाबे का दबदबा बढ़ता जा रहा था। रात के समय यहां ट्रकों की लंबी कतार लगती थी और चालक खुलेआम टोकन लेते देखे जाते थे।

इस कार्रवाई के बाद प्रशासन ने अन्य ढाबों और परिवहन नेटवर्क पर भी निगरानी बढ़ा दी है। सूत्र बताते हैं कि कई और स्थानों पर भी इस तरह के टोकन सिस्टम चलने की शिकायतें सामने आई हैं। राज्य कर विभाग ने ऐसे सभी मामलों की छानबीन शुरू कर दी है। ढाबा संचालक ने न केवल परिवहन नेटवर्क में अपनी पकड़ बना ली थी, बल्कि राज्य कर और परिवहन विभाग की नजरों से बचते हुए वसूली का खेल कर रहा था। अब मामला खुलने के बाद अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल थे और बैकअप कौन देता था।
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