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पुलिस ने फटकारी लाठियां
कुश्ाीनगर (ब्यूरो)
Updated Tue, 10 Apr 2018 12:14 AM IST
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पहुंचे अधिकारी
- फोटो : कुश्ाीनगर ब्यूरो
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तमकुहीरोड। विरवट कोन्हवलिया में बालू खनन का पट्टा निरस्त करने की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन शांत नहीं हो रहा है। आंदोलन के 66 वें दिन सोमवार को सुबह धरना पर बैठे ग्रामीणों ने पुलिस पर बलप्रयोग का आरोप लगाया। कई महिलाओं ने पुलिस के लाठीचार्ज से घायल होने की बात कही। पुलिसकर्मी जिन लोगों को धरना स्थल से पकड़कर ले गए थे बाद में भीड़ के दबाव में उन्हें भी छोड़ना पड़ा। दोपहर बाद कमिश्नर, आईजी, डीएम व एसपी मौके पर पहुंचे थे।
विरवट कोन्हवलिया में हुए बालू खनन पट्टा के विरोध में बीते तीन फरवरी से एपी तटबंध के किनारे लगातार धरना चल रहा है। पिछले शुक्रवार को धरना की अगुवाई कर रहे तमकुहीराज के विधायक अजय कुमार लल्लू व 19 समर्थकों को प्रशासन ने गिरफ्तार कर लिया। उम्मीद थी कि विधायक के हटने के साथ ही आंदोलन खत्म हो जाएगा। परंतु रविवार से फिर यहां आसपास के लोग धरना पर बैठ गए। इस बार के धरना में महिलाओं और बच्चों की संख्या अधिक है। इसकी वजह से प्रशासन को भी सख्त कार्रवाई से पीछे हटना पड़ रहा है। आंदोलन की इस बदली रणनीति से प्रशासना खास मुश्किल में पड़ गया है। सोमवार की सुबह धरना दे रहे लोगों को वहां से हटाने के लिए तरयासुजान पुलिस मौके पर पहुंची थी। आंदोलन स्थल पर मौजूद लोगों का आरोप था कि पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए वहां से कई लोगों को पकड़कर तरयासुजान थाने भेज दिया। पुलिस की इस कार्रवाई से चार महिलाओं इसरावती, रीना, बगड़ी व इंद्रावती के चोटिल होने की बात कही जा रही है। इन महिलाओं का कहना था कि वे बकरी चराने जा रही थीं लेकिन पुलिसकर्मियों ने उन्हें आंदोलनकारी मारकर पीट दिया।
इसकी जानकारी होने पर गांव के अन्य लोग उग्र होकर आंदोलन स्थल पर पहुंच गए। लोगों ने एपी तटबंध पर जगह-जगह लकड़ी व पत्थर रखकर रास्ता जाम कर दिया। पुलिस व प्रशासनिक अफसरों की गाड़ियां आगे नहीं बढ़ पा रही थीं। गतिरोध बढ़ता देख पुलिस कर्मियों ने दुबारा मोर्चा संभाल लिया। स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो चली थी। परंतु अफसरों ने इसके बाद धैर्य का परिचय देते हुए तरयासुजान थाने भेजे गए सभी आंदोलनकारियों को छोड़ दिया। पुलिस के सामने खड़े ग्रामीणों को समझा बुझाकर शांत कराया गया। दोपहर बाद कमिश्नर अनिल कुमार, आईजी निलाब्जा चौधरी, डीएम आंद्रा वामसी व एसपी अशोक कुमार पांडेय, एडीएम कृष्णलाल तिवारी, एएसपी हरिगोविंद आदि मौके पर पहुंचे। अफसरों ने बालू खनन के स्थान तक जाकर निरीक्षण किया। वापसी में अफसरों ने आंदोलनकारियों को वार्ता के लिए भी बुलाया लेकिन धरना दे रहे लोग अफसरों को धरना स्थल पर आकर बात सुनने को कह रहे थे। इसके बाद सभी अफसर वापस लौट गए।
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एसडीएम गुलाबचंद्र का कहना है कि पुलिस ने बल प्रयोग नहीं किया। आंदोलन स्थल पर बैठे लोग प्रशासन पर गलत आरोप लगा रहे हैं। प्रशासन शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन को खत्म करने का प्रयास कर रहा है।
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विरवट कोन्हवलिया में हुए बालू खनन पट्टा के विरोध में बीते तीन फरवरी से एपी तटबंध के किनारे लगातार धरना चल रहा है। पिछले शुक्रवार को धरना की अगुवाई कर रहे तमकुहीराज के विधायक अजय कुमार लल्लू व 19 समर्थकों को प्रशासन ने गिरफ्तार कर लिया। उम्मीद थी कि विधायक के हटने के साथ ही आंदोलन खत्म हो जाएगा। परंतु रविवार से फिर यहां आसपास के लोग धरना पर बैठ गए। इस बार के धरना में महिलाओं और बच्चों की संख्या अधिक है। इसकी वजह से प्रशासन को भी सख्त कार्रवाई से पीछे हटना पड़ रहा है। आंदोलन की इस बदली रणनीति से प्रशासना खास मुश्किल में पड़ गया है। सोमवार की सुबह धरना दे रहे लोगों को वहां से हटाने के लिए तरयासुजान पुलिस मौके पर पहुंची थी। आंदोलन स्थल पर मौजूद लोगों का आरोप था कि पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए वहां से कई लोगों को पकड़कर तरयासुजान थाने भेज दिया। पुलिस की इस कार्रवाई से चार महिलाओं इसरावती, रीना, बगड़ी व इंद्रावती के चोटिल होने की बात कही जा रही है। इन महिलाओं का कहना था कि वे बकरी चराने जा रही थीं लेकिन पुलिसकर्मियों ने उन्हें आंदोलनकारी मारकर पीट दिया।
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इसकी जानकारी होने पर गांव के अन्य लोग उग्र होकर आंदोलन स्थल पर पहुंच गए। लोगों ने एपी तटबंध पर जगह-जगह लकड़ी व पत्थर रखकर रास्ता जाम कर दिया। पुलिस व प्रशासनिक अफसरों की गाड़ियां आगे नहीं बढ़ पा रही थीं। गतिरोध बढ़ता देख पुलिस कर्मियों ने दुबारा मोर्चा संभाल लिया। स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो चली थी। परंतु अफसरों ने इसके बाद धैर्य का परिचय देते हुए तरयासुजान थाने भेजे गए सभी आंदोलनकारियों को छोड़ दिया। पुलिस के सामने खड़े ग्रामीणों को समझा बुझाकर शांत कराया गया। दोपहर बाद कमिश्नर अनिल कुमार, आईजी निलाब्जा चौधरी, डीएम आंद्रा वामसी व एसपी अशोक कुमार पांडेय, एडीएम कृष्णलाल तिवारी, एएसपी हरिगोविंद आदि मौके पर पहुंचे। अफसरों ने बालू खनन के स्थान तक जाकर निरीक्षण किया। वापसी में अफसरों ने आंदोलनकारियों को वार्ता के लिए भी बुलाया लेकिन धरना दे रहे लोग अफसरों को धरना स्थल पर आकर बात सुनने को कह रहे थे। इसके बाद सभी अफसर वापस लौट गए।
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एसडीएम गुलाबचंद्र का कहना है कि पुलिस ने बल प्रयोग नहीं किया। आंदोलन स्थल पर बैठे लोग प्रशासन पर गलत आरोप लगा रहे हैं। प्रशासन शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन को खत्म करने का प्रयास कर रहा है।