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फर्जी वेबसाइट से नौकरी देने वाले गिरोह का पर्दाफाश
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फर्जी वेबसाइट से नौकरी देने वाले गिरोह का पर्दाफाश
- दो लोग गिरफ्तार, नौकरी देने के लिए भरे हुए 249 आवेदन पत्र बरामद
- नियुक्ति पत्र, रजिस्टर, मोबाइल, आधार कार्ड, पैन कार्ड, एटीएम कार्ड, पासबुक समेत अन्य कागजात भी मिले
संवाद न्यूज एजेंसी
कसया (कुशीनगर)। फर्जी वेबसाइट बनाकर बेरोजगारों को झांसे में लेकर नौकरी देने वाले गिरोह का शनिवार को कसया पुलिस और साइबर सेल की टीम ने पर्दाफाश किया। इसमें संलिप्त दो व्यक्ति भी गिरफ्तार किए गए हैं। इनके खिलाफ विधिक कार्रवाई करते हुए पुलिस ने जेल भेज दिया।
कसया थाना परिसर में शनिवार को आरोपियों को पेश करते हुए सीओ पीयूषकांत राय ने बताया कि साइबर अपराधियों के खिलाफ वृहद रूप से अभियान चलाया जा रहा है। उसी क्रम में कसया रोडवेज बस स्टैंड के पास एक युवक व एक युवती को पकड़कर पुलिस थाने ले आई। यहां तलाशी लेने पर उनके पास से नौकरी के लिए भरे हुए 249 आवेदन पत्र, छह नियुक्ति पत्र, दो पंजिका, चार मोबाइल, दो आधार कार्ड, दो पैन कार्ड के अलावा विभिन्न बैंकों के चार एटीएम, चेकबुक, पासबुक, मुहर, आईडी कार्ड, 131 रजिस्ट्री रसीद सहित एक सोने की चेन, स्कूटी, एक बाइक मिली। सीओ ने बताया कि पकड़ा गया आरोपी बबलू चौधरी उर्फ बबलू सिंह उर्फ राजीव सिंह सबया, थाना कोठीभार, जिला महराजगंज का निवासी है। वह दो फर्जी वेबसाइट का एमडी है। दूसरी आरोपी संगीता उर्फ संगीता चंद्रा उर्फ संगीता भारती पुत्री रामरतन प्रेमवलिया थाना कसया जिला कुशीनगर की निवासी है। वह अपने आप को वेबसाइट का प्रिंसिपल सेक्रेटरी है।
सीओ ने बताया कि कसया में कुछ दिनों तक ये अपना कार्यालय खोलकर बेरोजगारों को ठगी का शिकार बनाते थे। योग्यता के आधार पर अलग-अलग पदों के लिए आवेदन शुल्क व डिपॉजिट के रूप में 47,700 रुपये प्रति आवेदन जमा कराते थे। यह दोनों नौकरी देने के लिए दो फर्जी वेबसाइट का संचालन कर रहे थे। इसमें एक रुलर ओमेन विकास मिशन व दूसरा एग्रीकल्चरल एंड फार्मर डेवलपमेंट मिशन था। अलग-अलग पदों के लिए आवेदन पत्र लेकर लोगों से शुल्क व डिपॉजिट के रूप में 10,550 रुपये जमा कराकर नियुक्ति पत्र देते थे।
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सीओ ने बताया कि शुरुआती दौर में कुछ महीने तक वेतन भी दिए थे। जब आवेदक बढ़ जाते थे तो गिरोह अपना ठिकाना बदल लेता था। इनका कुशीनगर सेंट्रल बैंक में खाता भी है। आवेदक से रकम बैंक खाते में ही जमा कराते थे। नियुक्ति पत्र पर बबलू का हस्ताक्षर व मुहर लगता था। गोरखपुर में भी इस गिरोह की एक शाखा के होने की सूचना मिली है।
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- दो लोग गिरफ्तार, नौकरी देने के लिए भरे हुए 249 आवेदन पत्र बरामद
- नियुक्ति पत्र, रजिस्टर, मोबाइल, आधार कार्ड, पैन कार्ड, एटीएम कार्ड, पासबुक समेत अन्य कागजात भी मिले
संवाद न्यूज एजेंसी
कसया (कुशीनगर)। फर्जी वेबसाइट बनाकर बेरोजगारों को झांसे में लेकर नौकरी देने वाले गिरोह का शनिवार को कसया पुलिस और साइबर सेल की टीम ने पर्दाफाश किया। इसमें संलिप्त दो व्यक्ति भी गिरफ्तार किए गए हैं। इनके खिलाफ विधिक कार्रवाई करते हुए पुलिस ने जेल भेज दिया।
कसया थाना परिसर में शनिवार को आरोपियों को पेश करते हुए सीओ पीयूषकांत राय ने बताया कि साइबर अपराधियों के खिलाफ वृहद रूप से अभियान चलाया जा रहा है। उसी क्रम में कसया रोडवेज बस स्टैंड के पास एक युवक व एक युवती को पकड़कर पुलिस थाने ले आई। यहां तलाशी लेने पर उनके पास से नौकरी के लिए भरे हुए 249 आवेदन पत्र, छह नियुक्ति पत्र, दो पंजिका, चार मोबाइल, दो आधार कार्ड, दो पैन कार्ड के अलावा विभिन्न बैंकों के चार एटीएम, चेकबुक, पासबुक, मुहर, आईडी कार्ड, 131 रजिस्ट्री रसीद सहित एक सोने की चेन, स्कूटी, एक बाइक मिली। सीओ ने बताया कि पकड़ा गया आरोपी बबलू चौधरी उर्फ बबलू सिंह उर्फ राजीव सिंह सबया, थाना कोठीभार, जिला महराजगंज का निवासी है। वह दो फर्जी वेबसाइट का एमडी है। दूसरी आरोपी संगीता उर्फ संगीता चंद्रा उर्फ संगीता भारती पुत्री रामरतन प्रेमवलिया थाना कसया जिला कुशीनगर की निवासी है। वह अपने आप को वेबसाइट का प्रिंसिपल सेक्रेटरी है।
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सीओ ने बताया कि कसया में कुछ दिनों तक ये अपना कार्यालय खोलकर बेरोजगारों को ठगी का शिकार बनाते थे। योग्यता के आधार पर अलग-अलग पदों के लिए आवेदन शुल्क व डिपॉजिट के रूप में 47,700 रुपये प्रति आवेदन जमा कराते थे। यह दोनों नौकरी देने के लिए दो फर्जी वेबसाइट का संचालन कर रहे थे। इसमें एक रुलर ओमेन विकास मिशन व दूसरा एग्रीकल्चरल एंड फार्मर डेवलपमेंट मिशन था। अलग-अलग पदों के लिए आवेदन पत्र लेकर लोगों से शुल्क व डिपॉजिट के रूप में 10,550 रुपये जमा कराकर नियुक्ति पत्र देते थे।
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सीओ ने बताया कि शुरुआती दौर में कुछ महीने तक वेतन भी दिए थे। जब आवेदक बढ़ जाते थे तो गिरोह अपना ठिकाना बदल लेता था। इनका कुशीनगर सेंट्रल बैंक में खाता भी है। आवेदक से रकम बैंक खाते में ही जमा कराते थे। नियुक्ति पत्र पर बबलू का हस्ताक्षर व मुहर लगता था। गोरखपुर में भी इस गिरोह की एक शाखा के होने की सूचना मिली है।