{"_id":"67aa46bba3e6dc35020d5d6e","slug":"playing-with-health-paneer-is-being-made-by-mixing-arrowroot-in-packet-milk-kushinagar-news-c-205-1-ksh1001-131859-2025-02-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"सेहत से खिलवाड़ : पैकेट के दूध में अरारोट मिलाकर बना रहे पनीर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सेहत से खिलवाड़ : पैकेट के दूध में अरारोट मिलाकर बना रहे पनीर
Tue, 11 Feb 2025 12:04 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Tue, 11 Feb 2025 12:04 AM IST
विज्ञापन
पडरौना। सहालग शुरू होने के बाद बाजार में दूध और पनीर की मांग बढ़ गई है। इसका फायदा उठाने के लिए मिलावट करने वाले धंधेबाज सक्रिय हो गए हैं। पाउडर और पैकेट के दूध में अरारोट मिलाकर बने पनीर सस्ते दर पर धड़ल्ले से बेचे जा रहे हैं। मिलावट के इस खेल में सेहत को सुरक्षित रख पाना मुश्किल हो गया है। लोग रकम खर्च करने के बाद भी दूध और पनीर के अलावा दूध से बने शुद्ध खाद्य पदार्थ नहीं पा रहे हैं। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की ओर से एक साल में लिए गए नमूनों की जांच रिपोर्ट मिलावट की तस्दीक कर रही है।
एक अनुमान के अनुसार शहर में दुकानों से लेकर घरों में करीब तीन लाख लीटर दूध की खपत प्रत्येक दिन होती है। मांग के हिसाब से यह घटती-बढ़ती है। त्योहार व अन्य विशेष अवसरों पर इसकी खपत करीब चार लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुंच जाती है। जबकि, पशुपालक से करीब एक लाख लीटर दूध की ही आपूर्ति कर पाते हैं। वहीं पैकेज्ड दूध का कारोबार करने वाली कंपनियां भी करीब एक लाख लीटर दूध की आपूर्ति कर रही हैं। शेष बचे एक लाख लीटर दूध की आपूर्ति मिलावट से होती है। धंधेबाज गाय-भैंस के 10 लीटर दूध के साथ पाउडर से बना दूध भी उतनी ही मात्रा में मिला देते हैं। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की ओर से एक साल में दूध के 50 से अधिक नमूने लिए थे। इसमें से करीब 30 की रिपोर्ट आई, जिसमें 20 अधोमानक मिले। यानी दूध में मानक के अनुसार तत्व नहीं मिले। इसी तरह बीते तीन माह में जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए पनीर के 15 नमूनों में से 10 अधोमानक मिले हैं। प्रयोगशाला से मिली रिपोर्ट के अनुसार पनीर में फैट 50 प्रतिशत से भी कम मिला है, जो अधोमानक की श्रेणी में आता है।
सहालग के दौरान दूध की मांग बढ़ने पर धंधेबाज अभी तक उसमें पानी तो मिला ही रहे थे, लेकिन अब पाउडर से बना दूध भी बाजार में बेच दिया जा रहा है। जिले में दूध उत्पादन से ज्यादा खपत है। ऐसे में शुद्धता की गारंटी होना संभव नहीं है। यही हाल पनीर और दूध से बने खाद्य पदार्थों का भी है। दूध और पनीर की बढ़ती खपत और घटते उत्पादन से धंधेबाजों को मोटा मुनाफा कमाने का मौका मिल रहा है। मिलावटी दूध पीने से सेहत को तो नुकसान पहुंच ही रहा है। वहीं बढ़ती मिलावट को देखते हुए डॉक्टर भी छह माह से अधिक उम्र के बच्चों को पाउडर वाला दूध पिलाने की सलाह दे रहे हैं। इसका असर है कि बाजार में बच्चों वाले पाउडर दूध का कारोबार हर महीने 30 लाख रुपये से ऊपर पहुंच गया है।
विज्ञापन
250 से 350 तक की पनीर बाजार में
सोमवार को शहर की एक पनीर की दुकान पर दोपहर करीब एक बजे एक ग्राहक पहुंचा। उन्होंने दुकानदार को बताया कि उनके तिलक है। मेहमानों को खिलाने के लिए उन्हें 50 किलो पनीर चाहिए। इस पर दुकानदार ने बताया कि उनके पास 250 रुपये से 350 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से पनीर उपलब्ध है। 300 रुपये प्रति किलोग्राम से कम दर पर पनीर चाहिए, तो उसे बाहर से मंगवानी पड़ेगी, जिसकी शुद्धता की गारंटी नहीं है। बाकी आपकी मर्जी। इस पर ग्राहक ने दुकानदार से मोलभाव कर 320 रुपये प्रति किलोग्राम की दर वाली पनीर का ऑर्डर दिया। यही नहीं एक दुकानदार ने बताया कि कहां से इतना दूध लाया जाएगा। दुकानों पर पाउडर वाले दूध की खपत हो जाती है। दूध बेचने वालों का कहना है कि घरों में गाय का दूध 50 से 55 रुपये और भैंस का 60-70 रुपये प्रति लीटर दिया जाता है। पानी के अलावा कुछ नहीं मिलाया जाता है। रेट भी समय के हिसाब से घटता-बढ़ता रहता है। अब पशु कोई रखना नहीं चाह रहा है तो पर्याप्त दूध कहां से होगा।
000000000
ओपीडी में कुछ ऐसे बच्चे भी इलाज के लिए आते हैं, जिनकाे दूध से समस्या होती है। ऐसे बच्चे डायरिया, एलर्जी आदि से पीड़ित होते हैं। यही कारण है कि अच्छी कंपनी का पाउडर वाला दूध पिलाने की सलाह दी जाती है। छह माह से कम उम्र के बच्चों को केवल मां का ही दूध पिलाने की सलाह दी जाती है। मिलावटी दूध पीने से लीवर और किडनी प्रभावित हो सकती है। ऐसे में दूध का सेवन करते समय सचेत रहने की जरूरत है। जांच परख करके ही दूध खरीदें।
- डॉ. सतीश कुमार, बाल रोग विशेषज्ञ।
000000000
लीवर में पानी भर जाएं तो ऐसे मरीजों को प्रोटीन की जरूरत होती है। इसके लिए मरीजों को पनीर या अंडा का सेवन करने की सलाह दी जाती है। यदि शाकाहारी मरीज है तो उन्हें पनीर खाना मजबूरी है। 100 ग्राम शुद्ध पनीर में 25 ग्राम प्रोटीन और करीब 20 ग्राम फैट होता है। इसके अलावा 4.5 ग्राम काब्रोहाइड्रेड व कैलशियम 4.5 मिलीग्राम होता है। इससे हड्डी का विकास होने के साथ इसे मजबूती मिलती है। यदि पनीर मिलावट है तो लीवर, किडनी और हृदय को नुकसान पहुंचाता है। इसलिए लोगों को मिलावटी पनीर या दूध का सेवन करने से बचना चाहिए।
- डॉ. प्रवीण कुमार राव, गैस्ट्रोलॉजिस्ट।
00000000
ऐसे पहचानें पनीर और दूध में मिलावट
- पनीर का एक छोटा टुकड़ा लें और उसे पांच मिनट तक पानी में उबालें। इसे प्लेट में निकालकर ठंडा होने दें। अब इस पर आयोडीन टिंचर की कुछ बूंदें डालें। यदि पनीर का रंग नीला हो जाता है तो इसका मतलब है कि इसे दूध में सिंथेटिक मिक्सचर मिलाकर बनाया गया है।
- दूध में मिलावट की पहचान करने के लिए, दूध की कुछ बूंदें कांच या प्लास्टिक की पॉलिथिन पर टपकाएं और सतह की तरफ झुकाएं। यदि दूध की बूंदें सफेद लकीर नहीं छोड़तीं तो दूध में मिलावट है।
00000000
जनपद के लोगों के लिए बाजार में शुद्ध खाद्य एवं पेय पदार्थ उपलब्ध हो सके इसके लिए विभाग पूरी तरह गंभीर है। इसके लिए विभाग की तरफ से समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम के अलावा सचल प्रयोगशाला से खाद्य पदार्थों की जांच कर लोग और दुकानदारों को मिलावटी खाद्य पदार्थों के प्रति जागरूक किया जाता है। बीते तीन माह में एकत्र किए गए पनीर के 15 नमूनों में से 10 अधोमानक मिले हैं। अधोमानक पनीर बेचने वाले दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
- प्रदीप कुमार राय, सहायक आयुक्त खाद्य- द्वितीय, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन।
विज्ञापन
एक अनुमान के अनुसार शहर में दुकानों से लेकर घरों में करीब तीन लाख लीटर दूध की खपत प्रत्येक दिन होती है। मांग के हिसाब से यह घटती-बढ़ती है। त्योहार व अन्य विशेष अवसरों पर इसकी खपत करीब चार लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुंच जाती है। जबकि, पशुपालक से करीब एक लाख लीटर दूध की ही आपूर्ति कर पाते हैं। वहीं पैकेज्ड दूध का कारोबार करने वाली कंपनियां भी करीब एक लाख लीटर दूध की आपूर्ति कर रही हैं। शेष बचे एक लाख लीटर दूध की आपूर्ति मिलावट से होती है। धंधेबाज गाय-भैंस के 10 लीटर दूध के साथ पाउडर से बना दूध भी उतनी ही मात्रा में मिला देते हैं। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की ओर से एक साल में दूध के 50 से अधिक नमूने लिए थे। इसमें से करीब 30 की रिपोर्ट आई, जिसमें 20 अधोमानक मिले। यानी दूध में मानक के अनुसार तत्व नहीं मिले। इसी तरह बीते तीन माह में जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए पनीर के 15 नमूनों में से 10 अधोमानक मिले हैं। प्रयोगशाला से मिली रिपोर्ट के अनुसार पनीर में फैट 50 प्रतिशत से भी कम मिला है, जो अधोमानक की श्रेणी में आता है।
विज्ञापन
सहालग के दौरान दूध की मांग बढ़ने पर धंधेबाज अभी तक उसमें पानी तो मिला ही रहे थे, लेकिन अब पाउडर से बना दूध भी बाजार में बेच दिया जा रहा है। जिले में दूध उत्पादन से ज्यादा खपत है। ऐसे में शुद्धता की गारंटी होना संभव नहीं है। यही हाल पनीर और दूध से बने खाद्य पदार्थों का भी है। दूध और पनीर की बढ़ती खपत और घटते उत्पादन से धंधेबाजों को मोटा मुनाफा कमाने का मौका मिल रहा है। मिलावटी दूध पीने से सेहत को तो नुकसान पहुंच ही रहा है। वहीं बढ़ती मिलावट को देखते हुए डॉक्टर भी छह माह से अधिक उम्र के बच्चों को पाउडर वाला दूध पिलाने की सलाह दे रहे हैं। इसका असर है कि बाजार में बच्चों वाले पाउडर दूध का कारोबार हर महीने 30 लाख रुपये से ऊपर पहुंच गया है।
विज्ञापन
250 से 350 तक की पनीर बाजार में
सोमवार को शहर की एक पनीर की दुकान पर दोपहर करीब एक बजे एक ग्राहक पहुंचा। उन्होंने दुकानदार को बताया कि उनके तिलक है। मेहमानों को खिलाने के लिए उन्हें 50 किलो पनीर चाहिए। इस पर दुकानदार ने बताया कि उनके पास 250 रुपये से 350 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से पनीर उपलब्ध है। 300 रुपये प्रति किलोग्राम से कम दर पर पनीर चाहिए, तो उसे बाहर से मंगवानी पड़ेगी, जिसकी शुद्धता की गारंटी नहीं है। बाकी आपकी मर्जी। इस पर ग्राहक ने दुकानदार से मोलभाव कर 320 रुपये प्रति किलोग्राम की दर वाली पनीर का ऑर्डर दिया। यही नहीं एक दुकानदार ने बताया कि कहां से इतना दूध लाया जाएगा। दुकानों पर पाउडर वाले दूध की खपत हो जाती है। दूध बेचने वालों का कहना है कि घरों में गाय का दूध 50 से 55 रुपये और भैंस का 60-70 रुपये प्रति लीटर दिया जाता है। पानी के अलावा कुछ नहीं मिलाया जाता है। रेट भी समय के हिसाब से घटता-बढ़ता रहता है। अब पशु कोई रखना नहीं चाह रहा है तो पर्याप्त दूध कहां से होगा।
000000000
ओपीडी में कुछ ऐसे बच्चे भी इलाज के लिए आते हैं, जिनकाे दूध से समस्या होती है। ऐसे बच्चे डायरिया, एलर्जी आदि से पीड़ित होते हैं। यही कारण है कि अच्छी कंपनी का पाउडर वाला दूध पिलाने की सलाह दी जाती है। छह माह से कम उम्र के बच्चों को केवल मां का ही दूध पिलाने की सलाह दी जाती है। मिलावटी दूध पीने से लीवर और किडनी प्रभावित हो सकती है। ऐसे में दूध का सेवन करते समय सचेत रहने की जरूरत है। जांच परख करके ही दूध खरीदें।
- डॉ. सतीश कुमार, बाल रोग विशेषज्ञ।
000000000
लीवर में पानी भर जाएं तो ऐसे मरीजों को प्रोटीन की जरूरत होती है। इसके लिए मरीजों को पनीर या अंडा का सेवन करने की सलाह दी जाती है। यदि शाकाहारी मरीज है तो उन्हें पनीर खाना मजबूरी है। 100 ग्राम शुद्ध पनीर में 25 ग्राम प्रोटीन और करीब 20 ग्राम फैट होता है। इसके अलावा 4.5 ग्राम काब्रोहाइड्रेड व कैलशियम 4.5 मिलीग्राम होता है। इससे हड्डी का विकास होने के साथ इसे मजबूती मिलती है। यदि पनीर मिलावट है तो लीवर, किडनी और हृदय को नुकसान पहुंचाता है। इसलिए लोगों को मिलावटी पनीर या दूध का सेवन करने से बचना चाहिए।
- डॉ. प्रवीण कुमार राव, गैस्ट्रोलॉजिस्ट।
00000000
ऐसे पहचानें पनीर और दूध में मिलावट
- पनीर का एक छोटा टुकड़ा लें और उसे पांच मिनट तक पानी में उबालें। इसे प्लेट में निकालकर ठंडा होने दें। अब इस पर आयोडीन टिंचर की कुछ बूंदें डालें। यदि पनीर का रंग नीला हो जाता है तो इसका मतलब है कि इसे दूध में सिंथेटिक मिक्सचर मिलाकर बनाया गया है।
- दूध में मिलावट की पहचान करने के लिए, दूध की कुछ बूंदें कांच या प्लास्टिक की पॉलिथिन पर टपकाएं और सतह की तरफ झुकाएं। यदि दूध की बूंदें सफेद लकीर नहीं छोड़तीं तो दूध में मिलावट है।
00000000
जनपद के लोगों के लिए बाजार में शुद्ध खाद्य एवं पेय पदार्थ उपलब्ध हो सके इसके लिए विभाग पूरी तरह गंभीर है। इसके लिए विभाग की तरफ से समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम के अलावा सचल प्रयोगशाला से खाद्य पदार्थों की जांच कर लोग और दुकानदारों को मिलावटी खाद्य पदार्थों के प्रति जागरूक किया जाता है। बीते तीन माह में एकत्र किए गए पनीर के 15 नमूनों में से 10 अधोमानक मिले हैं। अधोमानक पनीर बेचने वाले दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
- प्रदीप कुमार राय, सहायक आयुक्त खाद्य- द्वितीय, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन।