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लोगों को दुर्गम रास्तों से जाना पड़ता है गांव
ब्यूरो/अमर उजाला कुश्ाीनगर
Updated Fri, 09 Mar 2018 11:01 PM IST
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सड़क के अभाव में जंगल के रास्ते से आने-जाने को विवश हैं लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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खड्डा। गंडक नदी के उत्तर तरफ बसे गांवों को लोगों को अब भी अपने घर से खड्डा आने - जाने के लिए जंगल वाले दुर्गम रास्ते का उपयोग करना पड़ता है। बरसात के दिन में तो यहां के लोगों को बिहार प्रांत होते हुए 46 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
हरिहरपुर, नरायनपुर, बकुलादह, शिवपुर, बसंतपुर, मरचहवा, बाल गोविंद छपरा, शाहपुर, विंध्याचलपुर आदि गांव गंडक नदी के उत्तर तरफ बसे हैं। इनके अलावा गैनही जंगल, भेड़ीहारी, मदनपुर, भैसहां, हनुमानगंज, पड़रहवा, पकड़ी बृजलाल, लक्ष्मीपुर, माघी, भगवानपुर, नौतार जंगल आदि गांव नदी के दक्षिण तरफ हैं। दक्षिण तरफ बसे कई गांवों के लोगों की खेती उत्तर तरफ बसे गांवों में भी है। इन गांवों के लोगों को आने - जाने के लिए कोई सीधा रास्ता नहीं है। लोगों को उत्तर तरफ बसे हरिहरपुर, नरायनपुर, मरचहवा आदि गांवों तक जाने के लिए पनियहवा पुल पार करके बिहार के वाल्मीकिनगर जंगल के रास्ते आना-जाना पड़ता है। बरसात में नदी उस पार बसी करीब 15 हजार की आबादी तीन महीने तक जिले के अन्य भाग से कट जाती है।
बरसात बाद लोग भैसहां घाट से नाव के जरिए मरचहवा आते-जाते हैं। बीते बरसात में आई बाढ़ से घिरी नदी उस पार की 15 हजार की आबादी तक पहुंचने के लिए प्रशासन को सेना के हेलीकाप्टर की मदद लेनी पड़ी थी। नदी उस पार के गांवों में रहने वाले जवाहिर, हुसैन, बदरी, पारस, नरेश, ध्रुव, पानमती, सुरसती आदि का कहना है कि जन प्रतिनिधियों की उदासीनता के चलते उन्हें आज भी तकलीफ झेलनी पड़ती है।
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हरिहरपुर, नरायनपुर, बकुलादह, शिवपुर, बसंतपुर, मरचहवा, बाल गोविंद छपरा, शाहपुर, विंध्याचलपुर आदि गांव गंडक नदी के उत्तर तरफ बसे हैं। इनके अलावा गैनही जंगल, भेड़ीहारी, मदनपुर, भैसहां, हनुमानगंज, पड़रहवा, पकड़ी बृजलाल, लक्ष्मीपुर, माघी, भगवानपुर, नौतार जंगल आदि गांव नदी के दक्षिण तरफ हैं। दक्षिण तरफ बसे कई गांवों के लोगों की खेती उत्तर तरफ बसे गांवों में भी है। इन गांवों के लोगों को आने - जाने के लिए कोई सीधा रास्ता नहीं है। लोगों को उत्तर तरफ बसे हरिहरपुर, नरायनपुर, मरचहवा आदि गांवों तक जाने के लिए पनियहवा पुल पार करके बिहार के वाल्मीकिनगर जंगल के रास्ते आना-जाना पड़ता है। बरसात में नदी उस पार बसी करीब 15 हजार की आबादी तीन महीने तक जिले के अन्य भाग से कट जाती है।
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बरसात बाद लोग भैसहां घाट से नाव के जरिए मरचहवा आते-जाते हैं। बीते बरसात में आई बाढ़ से घिरी नदी उस पार की 15 हजार की आबादी तक पहुंचने के लिए प्रशासन को सेना के हेलीकाप्टर की मदद लेनी पड़ी थी। नदी उस पार के गांवों में रहने वाले जवाहिर, हुसैन, बदरी, पारस, नरेश, ध्रुव, पानमती, सुरसती आदि का कहना है कि जन प्रतिनिधियों की उदासीनता के चलते उन्हें आज भी तकलीफ झेलनी पड़ती है।
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