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दिखावे के आगे लोग भूले पुरानी परंपरा
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दिखावे के आगे लोग भूले पुरानी परंपरा
बुजुर्ग बोले- डांस के आगे लोग भूल जाते हैं जमीन व आसमान के बीच का फर्क
गुरवलिया बाजार(कुशीनगर)। भागमभाग भरी जिंदगी में वैवाहिक कार्यक्रमों का स्वरूप बदल गया है। नेबुआ नौरंगिया थानाक्षेत्र के नौरंगिया गांव के स्कूल टोला में बुधवार देर रात हल्दी के मटकोड़वा में हुए हादसा लोगों के सामने उदाहरण बना है। लोग डीजे की तेज आवाज और भांगड़ा आदि पर नृत्य के दौरान जमीन और आसमान के बीच का फर्क भूल जाते है। कुछ ऐसा ही स्कूल टोला में भी हुआ।
बताया जा रहा है कि जिस वक्त हादसा हुआ, उस दौरान भांगडे़ पर डांस चल रहा था। इसे देखने के लिए भीड़ जुटी थी। हादसे के बाद बुजुर्गों ने अपने जमाने में सादगी होने वाले वैैवाहिक कार्यक्रम का अनुभाव साझा किया। उनका कहना है कि उनके जमाने में होने वाले वैवाहिक कार्यक्रम में न विवाद होता था न ही हादसा। अब शादी में डीजे बचने की वजह से अक्सर विवाद हो जाता है। कभी-कभार हादसे भी होते हैं। अब वर और वधू पक्ष को माटी से जोड़ने वाली अधिकांश परंपराएं समाप्त हो चुकी हैं। पुराने जमाने में शहनाई विवाह कार्यक्रमों की शान हुआ करती थीं। श्
रामअवध ओझा का कहना है कि अब वैवाहिक कार्यक्रमों का स्वरूप बदलता जा रहा है। अब पंडालों और बरात घरों में द्वारचार से शुरू होने वाला वैवाहिक कार्यक्रम सिमटने लगता है। दो दशक पहले तक वैवाहिक कार्यक्रम कई दिनों के हुआ करते थे। इनमें बाकायदा दोनों पक्ष के लोग बैठकर एक-दूसरे का परिचय प्राप्त करते थे।
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देवेंद्र पांडेय ने कहा कि समय ने जीने का तरीका बदल दिया है। अब हल्दी में डीजे की धुन पर लोग नृत्य करते हैं। आधुनिकता के कारण वैवाहिक कार्यक्रम दिखावा बनकर रह गए हैं। पलकधारी यादव का कहना है कि डीजे की धुन से घबराहट होती है। आधुनिक युग के लोग पुरानी परंपरा भूलते जा रहे हैं। ऐसी घटनाओं से सबक लेने की जरूरत है। बिगन गुप्ता का कहना है कि शादी अब सादगी के जगह दिखावे की बात हो गई है। हल्दी की रस्म में डीजे के तेज आवाज, भांगड़े पर लोग नृत्य करते दिखाई देते हैं।
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बुजुर्ग बोले- डांस के आगे लोग भूल जाते हैं जमीन व आसमान के बीच का फर्क
गुरवलिया बाजार(कुशीनगर)। भागमभाग भरी जिंदगी में वैवाहिक कार्यक्रमों का स्वरूप बदल गया है। नेबुआ नौरंगिया थानाक्षेत्र के नौरंगिया गांव के स्कूल टोला में बुधवार देर रात हल्दी के मटकोड़वा में हुए हादसा लोगों के सामने उदाहरण बना है। लोग डीजे की तेज आवाज और भांगड़ा आदि पर नृत्य के दौरान जमीन और आसमान के बीच का फर्क भूल जाते है। कुछ ऐसा ही स्कूल टोला में भी हुआ।
बताया जा रहा है कि जिस वक्त हादसा हुआ, उस दौरान भांगडे़ पर डांस चल रहा था। इसे देखने के लिए भीड़ जुटी थी। हादसे के बाद बुजुर्गों ने अपने जमाने में सादगी होने वाले वैैवाहिक कार्यक्रम का अनुभाव साझा किया। उनका कहना है कि उनके जमाने में होने वाले वैवाहिक कार्यक्रम में न विवाद होता था न ही हादसा। अब शादी में डीजे बचने की वजह से अक्सर विवाद हो जाता है। कभी-कभार हादसे भी होते हैं। अब वर और वधू पक्ष को माटी से जोड़ने वाली अधिकांश परंपराएं समाप्त हो चुकी हैं। पुराने जमाने में शहनाई विवाह कार्यक्रमों की शान हुआ करती थीं। श्
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रामअवध ओझा का कहना है कि अब वैवाहिक कार्यक्रमों का स्वरूप बदलता जा रहा है। अब पंडालों और बरात घरों में द्वारचार से शुरू होने वाला वैवाहिक कार्यक्रम सिमटने लगता है। दो दशक पहले तक वैवाहिक कार्यक्रम कई दिनों के हुआ करते थे। इनमें बाकायदा दोनों पक्ष के लोग बैठकर एक-दूसरे का परिचय प्राप्त करते थे।
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देवेंद्र पांडेय ने कहा कि समय ने जीने का तरीका बदल दिया है। अब हल्दी में डीजे की धुन पर लोग नृत्य करते हैं। आधुनिकता के कारण वैवाहिक कार्यक्रम दिखावा बनकर रह गए हैं। पलकधारी यादव का कहना है कि डीजे की धुन से घबराहट होती है। आधुनिक युग के लोग पुरानी परंपरा भूलते जा रहे हैं। ऐसी घटनाओं से सबक लेने की जरूरत है। बिगन गुप्ता का कहना है कि शादी अब सादगी के जगह दिखावे की बात हो गई है। हल्दी की रस्म में डीजे के तेज आवाज, भांगड़े पर लोग नृत्य करते दिखाई देते हैं।