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बाढ़ से तबाह हुए लोग टूटी झोपड़ी और घरों को बनाने में जुटे
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बाढ़ से तबाह हुए लोग टूटी झोपड़ी और घरों को बनाने में जुटे
बाढ़ ने छोड़ा रास्ता अब गृहस्थी के सामान जुटाने की चुनौती
खड्डा क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित 2950 परिवारों में बांटी जाएगी केरोसीन
बाढ़ के पानी में खराब हो गईं पुरानी किताबें, नई अभी तक पहुंची नहीं
एक सप्ताह बाद गंडक के डिस्चार्ज में आई दो लाख क्यूसेक की कमी
संवाद न्यूज एजेंसी
कुशीनगर। जिले के खड्डा और तमकुहीराज तहसील क्षेत्र के लोगों के लिए एक सप्ताह तक मुसीबत खड़ी करने वाला बाढ़ का पानी अब वापस लौट रहा है। लेकिन उसके साथ आई परेशानियां बाढ़ पीड़ितों के लिए अभी भी चुनौती बनी है। लोगों के टाट-फूस और कच्चे घर काफी हद तक क्षतिग्रस्त हो गए हैं। बाढ़ की वजह से तार-पोल क्षतिग्रस्त हो जाने से लोगों को बिजली के संकट भी जूझना पड़ रहा है। अंधेरा दूर करने के लिए बाढ़ पीड़ितों ने नोडल अधिकारी और डीएम से केरोसीन दिलाने की मांग की थी, जो अब उपलब्ध हो गया है। बहुत से विद्यार्थियों की पुस्तकें बाढ़ के पानी में खराब हो गईं, जिन्हें सोमवार को धूप में सुखाते दिखे। हालांकि नई किताबें अभी तक वितरित नहीं हुई हैं। विद्यालयों से बाढ़ का पानी निकलने के बाद शिक्षक तो पहुंच रहे हैं, लेकिन बच्चों की संख्या अभी कम है। इधर, एक सप्ताह में गंडक नदी के डिस्चार्ज में भी काफी कमी आई है। अब तक दो लाख क्यूसेक की कमी दर्ज की गई है। सोमवार को नदी में पानी का डिस्चार्ज सिर्फ डेढ़ लाख क्यूसेक था।
बाढ़ पीड़ितों में बंटेगा 12 हजार लीटर केरोसीन
लोगों ने नोडल अधिकारी और डीएम से सुनाई थी पीड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी
कुशीनगर। गंडक नदी की बाढ़ से सर्वाधिक नुकसान खड्डा क्षेत्र के बाढ़पीड़ितों को उठाना पड़ा है। घर और खेत तो कटे ही, जो बच गए, उन्हें भी काफी क्षति हुई। इस बाढ़ में अनेक तार-पोल भी नदी की धारा में समा गए, जिससे बिजली आपूर्ति बाधित है। दो दिन पहले बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने पहुंचे नोडल अधिकारी पी. गुरु प्रसाद और डीएम एस. राजलिंगम से ग्रामीणों ने समस्याएं बताई थीं कि अंधेरे में सांप-बिच्छू का डर बना रहता है। इन लोगों ने केरोसीन उपलब्ध कराने की मांग की थी। अफसरों ने शीघ्र उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था। इसके लिए 12 हजार लीटर केरोसीन उपलब्ध हो गया है। डीएम एस. राजलिंगम ने बताया कि खड्डा तहसील क्षेत्र के सात गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। उस क्षेत्र में 2950 बाढ़ पीड़ित परिवार चिह्नित किए गए हैं। उनके लिए केरोसीन की मांग की गई थी। 12 हजार लीटर केरोसीन उपलब्ध हो गया है, जिसे उन बाढ़ पीड़ितों में शीघ्र वितरित करा दिया जाएगा।
बच्चों की भीग गईं किताबें
महदेवा गांव में धूप में पुस्तकें सुखाते दिखे बच्चे
संवाद न्यूज एजेंसी
छितौनी। बाढ़ प्रभावितों गांव महदेवा में आई बाढ़ ने सब कुछ बदलकर रख दिया है। बाढ़ के एक सप्ताह बीतने के बाद भी लोगों का जीवन सामान्य नहीं हो सका है। लोगों के घरों में खाने के लिए अनाज नहीं है तो बच्चों के सामने कॉपी-किताबों की किल्लत भी है। बच्चों के बैग में जो बीते सत्र की किताबें थीं, वह बाढ़ में या तो बह गईं या भीग गई हैं। जो कुछ बचा है, वह काम लायक नहीं बचा है। वहीं अभी तक प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय महदेवा में इस सत्र के किताबों का बच्चों में वितरण भी नहीं किया गया है।
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महदेवा के प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालय को मिलाकर 380 छात्र-छात्राओं का नामांकन है, लेकिन पहले तो बाढ़ और अब किताबों के अभाव में स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। सोमवार को विद्यालय में अधिकतम 10 बच्चे ही उपस्थित थे, जबकि विद्यालय के प्रधानाध्यापक का कहना है कि विद्यालय में 50 प्रतिशत से अधिक छात्र-छात्राओं की उपस्थिति है। विद्यालय के अभिभावक कलामू, सुभाष, भुआली कुशवाहा, ध्रुव गोंड़, नंदलाल कुशवाहा आदि का कहना है कि बाढ़ के बाद विद्यालय तो खुला है, लेकिन अभी तक नए सत्र की किताबें नहीं मिल सकी हैं। वही बच्चों के पास पुराने सत्र की जो किताबें थीं, वह भी बाढ़ में बह गईं। विद्यालय में कभी कभार अध्यापक आते हैं। बच्चों की सुधि लेने वाला कोई नहीं है, जिससे उनके भविष्य की चिंता है। प्रधानाध्यापक ज्ञयाबोध सैनी का कहना है कि बीआरसी से अभी किताबें ही नहीं मिली हैं। खड्डा के बीईओ हिमांशु सिंह ने बताया कि नए सत्र की पुस्तकों का वितरण करने के साथ शिक्षण कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
पूर्ति निरीक्षक को जांच का निर्देश
छितौनी। सोशल मीडिया पर कोटेदार की तरफ से राशन नहीं देने का वायरल वीडियो वायरल होने पर एसडीएम खड्डा ने संज्ञान में लिया है। उन्होंने पूर्ति निरीक्षक खड्डा को जांच करने का निर्देश दिया है। सोमवार को पूर्ति निरीक्षक बीएन मिश्रा ने महदेवा गांव पहुंचकर आरोपों की जांच की और रिपोर्ट एसडीएम को भेजा। सोमवार की दोपहर में खड्डा क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांव महदेवा में पूर्ति निरीक्षक पहुंचे। उन्होंने कोटे के दुकान की जांच की। इसके बाद लगभग छह लोगों का बयान दर्ज किया। पूर्ति निरीक्षक ने बताया कि महदेवा गांव के कोटेदार पर राशन नहीं देने का आरोप लगाते हुए गांव की सहोदरा देवी और चिरैया देवी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा था। इसे संज्ञान में लेकर एसडीएम खड्डा ने जांच सौंपी थी। मौके पर जांच करने पहुंचे तो आरोप लगाने वाली महिला बयान से मुकर गई। अग्रिम कार्रवाई के लिए रिपोर्ट एसडीएम को भेजी जाएगी। उन्होंने लोगों से अपील किया कि फर्जी शिकायत न करें। अन्यथा उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
तेजू टोले के सामने गंडक का तांडव जारी
नरवाजोत के ठोकर का बचाव कार्य धंसा
संवाद न्यूज एजेंसी
तमकुहीरोड। नरवाजोत बांध के तेजू टोले के सामने गंडक नदी का तांडव सोमवार को भी जारी रहा। यहां पुराने ठोकर पर कटान तेज होने से उस पर कराया गया बचाव कार्य नदी में समा गया। ठोकर के अस्तित्व पर भी खतरा बना हुआ है। वहीं किलोमीटर 1.700 पर बने ठोकर पर भी कटान जारी है। बाढ़ खंड के अभियंता बचाव कार्य में जुटे हैं। शाम को पूर्व विधायक डॉ. पीके राय ने पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। गंडक नदी का डिस्चार्ज काफी कम हो जाने के बाद भी नरवाजोत बांध पर पिपराघाट के तेजू टोले के सामने बने ठोकरों पर पिछले चार दिन से कटान हो रही है। रविवार को कटान रोकने के लिए बाढ़ खंड की ओर से जो बचाव कार्य कराया गया था, वह भी सोमवार को नदी की धारा में समा गया। इससे लोगों में बेचैनी बढ़ गई है। दशकों से बंधे पर आशियाना बना कर रह रहे प्रताप सिंह, बेचू, शिवरतन, सत्येंद्र, हीरालाल, जीतन, राजकुमार, जयकिशुन, दिलीप, वीरेश, अनिरुद्ध, रामरतन, उपेंद्र और छोटेलाल आदि पहले ही अपने सामानों के साथ ठोकर को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जा चुके हैं। वहीं इसी ठोकर के बगल में किलोमीटर 1.700 पर बने ठोकर पर भी कटान जारी है और उसे रोकने के लिए बाढ़ खंड के अभियंता राकेश कुमार, राजेश सिंह, रमेशधर दूबे, संजय मौर्य आदि जुटे हैं। उस पर निरंतर बचाव कार्य जारी है। ग्राम प्रधान रामाजी निषाद, अजय चौबे, कृष्णा जायसवाल, पन्नालाल यादव, कैलाश सिंह का कहना है कि कटान के लिहाज से यह ठोकर बहुत पहले से संवेदनशील रहा है। यदि समय रहते यहां सुरक्षा का बंदोबस्त कर दिया गया होता तो शायद यह नौबत नहीं आती है। बाढ़ खंड के एसडीओ एसके प्रियदर्शी का कहना है कि कटान रोकने को लेकर बचाव कार्य जारी है और इस कार्य में अभियंता निरंतर लगे हुए हैं।
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बाढ़ ने छोड़ा रास्ता अब गृहस्थी के सामान जुटाने की चुनौती
खड्डा क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित 2950 परिवारों में बांटी जाएगी केरोसीन
बाढ़ के पानी में खराब हो गईं पुरानी किताबें, नई अभी तक पहुंची नहीं
एक सप्ताह बाद गंडक के डिस्चार्ज में आई दो लाख क्यूसेक की कमी
संवाद न्यूज एजेंसी
कुशीनगर। जिले के खड्डा और तमकुहीराज तहसील क्षेत्र के लोगों के लिए एक सप्ताह तक मुसीबत खड़ी करने वाला बाढ़ का पानी अब वापस लौट रहा है। लेकिन उसके साथ आई परेशानियां बाढ़ पीड़ितों के लिए अभी भी चुनौती बनी है। लोगों के टाट-फूस और कच्चे घर काफी हद तक क्षतिग्रस्त हो गए हैं। बाढ़ की वजह से तार-पोल क्षतिग्रस्त हो जाने से लोगों को बिजली के संकट भी जूझना पड़ रहा है। अंधेरा दूर करने के लिए बाढ़ पीड़ितों ने नोडल अधिकारी और डीएम से केरोसीन दिलाने की मांग की थी, जो अब उपलब्ध हो गया है। बहुत से विद्यार्थियों की पुस्तकें बाढ़ के पानी में खराब हो गईं, जिन्हें सोमवार को धूप में सुखाते दिखे। हालांकि नई किताबें अभी तक वितरित नहीं हुई हैं। विद्यालयों से बाढ़ का पानी निकलने के बाद शिक्षक तो पहुंच रहे हैं, लेकिन बच्चों की संख्या अभी कम है। इधर, एक सप्ताह में गंडक नदी के डिस्चार्ज में भी काफी कमी आई है। अब तक दो लाख क्यूसेक की कमी दर्ज की गई है। सोमवार को नदी में पानी का डिस्चार्ज सिर्फ डेढ़ लाख क्यूसेक था।
बाढ़ पीड़ितों में बंटेगा 12 हजार लीटर केरोसीन
लोगों ने नोडल अधिकारी और डीएम से सुनाई थी पीड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी
कुशीनगर। गंडक नदी की बाढ़ से सर्वाधिक नुकसान खड्डा क्षेत्र के बाढ़पीड़ितों को उठाना पड़ा है। घर और खेत तो कटे ही, जो बच गए, उन्हें भी काफी क्षति हुई। इस बाढ़ में अनेक तार-पोल भी नदी की धारा में समा गए, जिससे बिजली आपूर्ति बाधित है। दो दिन पहले बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने पहुंचे नोडल अधिकारी पी. गुरु प्रसाद और डीएम एस. राजलिंगम से ग्रामीणों ने समस्याएं बताई थीं कि अंधेरे में सांप-बिच्छू का डर बना रहता है। इन लोगों ने केरोसीन उपलब्ध कराने की मांग की थी। अफसरों ने शीघ्र उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था। इसके लिए 12 हजार लीटर केरोसीन उपलब्ध हो गया है। डीएम एस. राजलिंगम ने बताया कि खड्डा तहसील क्षेत्र के सात गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। उस क्षेत्र में 2950 बाढ़ पीड़ित परिवार चिह्नित किए गए हैं। उनके लिए केरोसीन की मांग की गई थी। 12 हजार लीटर केरोसीन उपलब्ध हो गया है, जिसे उन बाढ़ पीड़ितों में शीघ्र वितरित करा दिया जाएगा।
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महदेवा गांव में धूप में पुस्तकें सुखाते दिखे बच्चे
संवाद न्यूज एजेंसी
छितौनी। बाढ़ प्रभावितों गांव महदेवा में आई बाढ़ ने सब कुछ बदलकर रख दिया है। बाढ़ के एक सप्ताह बीतने के बाद भी लोगों का जीवन सामान्य नहीं हो सका है। लोगों के घरों में खाने के लिए अनाज नहीं है तो बच्चों के सामने कॉपी-किताबों की किल्लत भी है। बच्चों के बैग में जो बीते सत्र की किताबें थीं, वह बाढ़ में या तो बह गईं या भीग गई हैं। जो कुछ बचा है, वह काम लायक नहीं बचा है। वहीं अभी तक प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय महदेवा में इस सत्र के किताबों का बच्चों में वितरण भी नहीं किया गया है।
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महदेवा के प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालय को मिलाकर 380 छात्र-छात्राओं का नामांकन है, लेकिन पहले तो बाढ़ और अब किताबों के अभाव में स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। सोमवार को विद्यालय में अधिकतम 10 बच्चे ही उपस्थित थे, जबकि विद्यालय के प्रधानाध्यापक का कहना है कि विद्यालय में 50 प्रतिशत से अधिक छात्र-छात्राओं की उपस्थिति है। विद्यालय के अभिभावक कलामू, सुभाष, भुआली कुशवाहा, ध्रुव गोंड़, नंदलाल कुशवाहा आदि का कहना है कि बाढ़ के बाद विद्यालय तो खुला है, लेकिन अभी तक नए सत्र की किताबें नहीं मिल सकी हैं। वही बच्चों के पास पुराने सत्र की जो किताबें थीं, वह भी बाढ़ में बह गईं। विद्यालय में कभी कभार अध्यापक आते हैं। बच्चों की सुधि लेने वाला कोई नहीं है, जिससे उनके भविष्य की चिंता है। प्रधानाध्यापक ज्ञयाबोध सैनी का कहना है कि बीआरसी से अभी किताबें ही नहीं मिली हैं। खड्डा के बीईओ हिमांशु सिंह ने बताया कि नए सत्र की पुस्तकों का वितरण करने के साथ शिक्षण कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
पूर्ति निरीक्षक को जांच का निर्देश
छितौनी। सोशल मीडिया पर कोटेदार की तरफ से राशन नहीं देने का वायरल वीडियो वायरल होने पर एसडीएम खड्डा ने संज्ञान में लिया है। उन्होंने पूर्ति निरीक्षक खड्डा को जांच करने का निर्देश दिया है। सोमवार को पूर्ति निरीक्षक बीएन मिश्रा ने महदेवा गांव पहुंचकर आरोपों की जांच की और रिपोर्ट एसडीएम को भेजा। सोमवार की दोपहर में खड्डा क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांव महदेवा में पूर्ति निरीक्षक पहुंचे। उन्होंने कोटे के दुकान की जांच की। इसके बाद लगभग छह लोगों का बयान दर्ज किया। पूर्ति निरीक्षक ने बताया कि महदेवा गांव के कोटेदार पर राशन नहीं देने का आरोप लगाते हुए गांव की सहोदरा देवी और चिरैया देवी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा था। इसे संज्ञान में लेकर एसडीएम खड्डा ने जांच सौंपी थी। मौके पर जांच करने पहुंचे तो आरोप लगाने वाली महिला बयान से मुकर गई। अग्रिम कार्रवाई के लिए रिपोर्ट एसडीएम को भेजी जाएगी। उन्होंने लोगों से अपील किया कि फर्जी शिकायत न करें। अन्यथा उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
तेजू टोले के सामने गंडक का तांडव जारी
नरवाजोत के ठोकर का बचाव कार्य धंसा
संवाद न्यूज एजेंसी
तमकुहीरोड। नरवाजोत बांध के तेजू टोले के सामने गंडक नदी का तांडव सोमवार को भी जारी रहा। यहां पुराने ठोकर पर कटान तेज होने से उस पर कराया गया बचाव कार्य नदी में समा गया। ठोकर के अस्तित्व पर भी खतरा बना हुआ है। वहीं किलोमीटर 1.700 पर बने ठोकर पर भी कटान जारी है। बाढ़ खंड के अभियंता बचाव कार्य में जुटे हैं। शाम को पूर्व विधायक डॉ. पीके राय ने पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। गंडक नदी का डिस्चार्ज काफी कम हो जाने के बाद भी नरवाजोत बांध पर पिपराघाट के तेजू टोले के सामने बने ठोकरों पर पिछले चार दिन से कटान हो रही है। रविवार को कटान रोकने के लिए बाढ़ खंड की ओर से जो बचाव कार्य कराया गया था, वह भी सोमवार को नदी की धारा में समा गया। इससे लोगों में बेचैनी बढ़ गई है। दशकों से बंधे पर आशियाना बना कर रह रहे प्रताप सिंह, बेचू, शिवरतन, सत्येंद्र, हीरालाल, जीतन, राजकुमार, जयकिशुन, दिलीप, वीरेश, अनिरुद्ध, रामरतन, उपेंद्र और छोटेलाल आदि पहले ही अपने सामानों के साथ ठोकर को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जा चुके हैं। वहीं इसी ठोकर के बगल में किलोमीटर 1.700 पर बने ठोकर पर भी कटान जारी है और उसे रोकने के लिए बाढ़ खंड के अभियंता राकेश कुमार, राजेश सिंह, रमेशधर दूबे, संजय मौर्य आदि जुटे हैं। उस पर निरंतर बचाव कार्य जारी है। ग्राम प्रधान रामाजी निषाद, अजय चौबे, कृष्णा जायसवाल, पन्नालाल यादव, कैलाश सिंह का कहना है कि कटान के लिहाज से यह ठोकर बहुत पहले से संवेदनशील रहा है। यदि समय रहते यहां सुरक्षा का बंदोबस्त कर दिया गया होता तो शायद यह नौबत नहीं आती है। बाढ़ खंड के एसडीओ एसके प्रियदर्शी का कहना है कि कटान रोकने को लेकर बचाव कार्य जारी है और इस कार्य में अभियंता निरंतर लगे हुए हैं।