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ओपीडी में डॉक्टर नहीं, मरीज परेशान
अमर उजाला ब्यूरो/कुशीनगर
Updated Sat, 12 Dec 2015 11:58 PM IST
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महंगे इलाज से बचने के लिए मरीज जिला अस्पताल पहुंचते हैं, ताकि कम खर्च में उनकी बीमारी ठीक हो जाए। जांच में भी रुपये खर्च न हाें। लेकिन जिला अस्पताल पहुंचने पर ज्यादातर मरीजों और तीमारदारों की उम्मीद टूट जाती है। अक्सर ही ओपीडी दिन के दस बजे से शुरू होती है। जब तक डॉक्टर पहुंचते हैं, उनके कक्ष के बाहर मरीजों की भीड़ लग जाती है। कई डॉक्टर ऐसे हैं, जो जल्दी-जल्दी दवाइयां लिखकर मरीजों को चलता कर देते हैं। डॉक्टरों के देर से पहुंचने पर मरीजों का नंबर देरी से आता है। नतीजा यह होता है कि पैथोलॉजी और एक्सरे में भी समय लग जाता है। इस वजह से कभी-कभी सभी मरीजों को उस दिन रिपोर्ट नहीं मिल पाती और उन्हें दूसरे दिन भी आना पड़ता है। ऐसा कोई दिन नहीं होता, जब ओपीडी में प्रात: आठ बजे से अपराह्न दो बजे तक डॉक्टर उपलब्ध रहें। शनिवार को एक तो मध्याह्न तक ही ओपीडी खुलनी थी, दूसरे पौने ग्यारह बजे तक ओपीडी में कोई डॉक्टर नहीं था। स्ट्रेचर पर लिटाए गए मरीज दर्द से कराहते रहे। इसी तरह बगल की ओपीडी में भी कई स्टॉफ नहीं थे।
डॉक्टरों के आने का सुबह से करते रहे इंतजार
फोटो है।
परिवार के एक सदस्य को सुबह कुत्ते ने काट लिया। डॉक्टर को दिखाकर दवा लिखवाने के लिए आए थे। लेकिन प्रात: नौ बजे से ही डॉक्टर का इंतजार कर रहे हैं। पौने ग्यारह बजे तक कोई डॉक्टर नहीं आया।
हरिहर, सोहनरिया।
बाबूजी के पैर में घाव हो गया है। वह चल-फिर नहीं पा रहे हैं, इसलिए स्ट्रेचर पर लेकर आया हूं। दर्द की वजह से वह काफी कराह रहे हैं। सुबह साढ़े आठ बजे से ही डॉक्टर के कक्ष के बाहर स्ट्रेचर पर लिटाया गया है, लेकिन डॉक्टर नहीं आए।
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सोनेलाल गोंड, बेतिया।
गले के डॉक्टर को दिखाना है। गले में काफी तकलीफ है। सुबह आठ बजे से डॉक्टर के इंतजार में बैठा हूं। लेकिन डॉक्टर नहीं आए हैं। डॉक्टर को दिखाने के लिए घर से सुबह बिना खाए निकले हुए थे।
अशोक, मुड़िला हरपुर।
आंख में तकलीफ है। डॉक्टर से मिलना था, लेकिन उनका कमरा खाली है। यदि आज नहीं मिलते हैं तो फिर सोमवार को आना पड़ेगा।
मोहम्मद इरफान, रामकोला।
जिला अस्पताल की ओपीडी में डॉक्टरों और अन्य स्टॉफ के बैठने का समय प्रात: आठ बजे से दोपहर दो बजे तक है। कुछ डॉक्टर छुट्टी लेकर शनिवार को चले गए थे। स्वास्थ्य ठीक न होने के कारण मैं अवकाश पर था। सोमवार को आने पर संबंधित स्टॉफ से पूछा जाएगा।
डॉ. एसके उपाध्याय, सीएमएस
संयुक्त जिला चिकित्सालय।
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डॉक्टरों के आने का सुबह से करते रहे इंतजार
फोटो है।
परिवार के एक सदस्य को सुबह कुत्ते ने काट लिया। डॉक्टर को दिखाकर दवा लिखवाने के लिए आए थे। लेकिन प्रात: नौ बजे से ही डॉक्टर का इंतजार कर रहे हैं। पौने ग्यारह बजे तक कोई डॉक्टर नहीं आया।
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हरिहर, सोहनरिया।
बाबूजी के पैर में घाव हो गया है। वह चल-फिर नहीं पा रहे हैं, इसलिए स्ट्रेचर पर लेकर आया हूं। दर्द की वजह से वह काफी कराह रहे हैं। सुबह साढ़े आठ बजे से ही डॉक्टर के कक्ष के बाहर स्ट्रेचर पर लिटाया गया है, लेकिन डॉक्टर नहीं आए।
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सोनेलाल गोंड, बेतिया।
गले के डॉक्टर को दिखाना है। गले में काफी तकलीफ है। सुबह आठ बजे से डॉक्टर के इंतजार में बैठा हूं। लेकिन डॉक्टर नहीं आए हैं। डॉक्टर को दिखाने के लिए घर से सुबह बिना खाए निकले हुए थे।
अशोक, मुड़िला हरपुर।
आंख में तकलीफ है। डॉक्टर से मिलना था, लेकिन उनका कमरा खाली है। यदि आज नहीं मिलते हैं तो फिर सोमवार को आना पड़ेगा।
मोहम्मद इरफान, रामकोला।
जिला अस्पताल की ओपीडी में डॉक्टरों और अन्य स्टॉफ के बैठने का समय प्रात: आठ बजे से दोपहर दो बजे तक है। कुछ डॉक्टर छुट्टी लेकर शनिवार को चले गए थे। स्वास्थ्य ठीक न होने के कारण मैं अवकाश पर था। सोमवार को आने पर संबंधित स्टॉफ से पूछा जाएगा।
डॉ. एसके उपाध्याय, सीएमएस
संयुक्त जिला चिकित्सालय।