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Kushinagar News: बुद्ध की धरती पर भारतीय भाषाओं के अंतर्संबंधों पर होगी चर्चा
Wed, 25 Feb 2026 02:24 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Wed, 25 Feb 2026 02:24 AM IST
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पडरौना। केंद्रीय हिंदी निदेशालय और बुद्ध पीजी कॉलेज कुशीनगर के संयुक्त तत्वावधान में 12 और 13 मार्च 2026 को दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी होगी। संगोष्ठी में भारतीय भाषाओं के अंतर्संबंध के विविध पहलुओं पर चर्चा होगी। इसमें देश के हिंदी व अन्य भाषाओं के आचार्य जुटेंगे।
यह जानकारी संगोष्ठी के संयोजक और हिंदी के आचार्य प्रो. गौरव तिवारी ने दी। प्रो. तिवारी ने बताया कि भारत विविधताओं का देश है। विभिन्न प्रकृति और प्रवृत्ति वाले जीवन के विभिन्न आयामों को साधने वाली हमारी सांस्कृतिक क्षमता इन विविधताओं के बावजूद हमें एकता के सूत्र में बांधे हुए है। भारत की भाषा संबंधी विविधता भी दुनिया में अद्वितीय है। कहावतों में कहा जाता है ..कोस-कोस पर पानी बदले, चार कोस पर बानी...।
उन्होंनें कहा कि संविधान की आठवीं अनुसूची में कश्मीर से कन्या कुमारी तक की हिंदी, बंगाली, तेलुगु, मराठी, तमिल, उर्दू, गुजराती, कन्नड़, मलयालम, ओडिया, पंजाबी, असमिया, कश्मीरी, सिंधी, संस्कृत, कोंकणी, मणिपुरी, नेपाली, मैथिली, संथाली, डोगरी, और बोडो जैसी 22 भाषाओं को आधिकारिक मान्यता है।
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इसके अलावा पालि जैसी लुप्तप्राय भाषाओं ने समय-समय पर हमारी संस्कृति को समृद्ध किया है। भारत सरकार का शिक्षा मंत्रालय केंद्रीय हिंदी निदेशालय के माध्यम से उच्चारण से लेकर लिपि तक इन भाषाओं में ऊपर से दिख रही इतनी विविधता के बावजूद उपलब्ध भाषिक और सांस्कृतिक एकता के सूत्रों को चिह्नित करने और उन्हें तलाशने की भावना से संगोष्ठी का आयोजन कर रहा है।
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यह जानकारी संगोष्ठी के संयोजक और हिंदी के आचार्य प्रो. गौरव तिवारी ने दी। प्रो. तिवारी ने बताया कि भारत विविधताओं का देश है। विभिन्न प्रकृति और प्रवृत्ति वाले जीवन के विभिन्न आयामों को साधने वाली हमारी सांस्कृतिक क्षमता इन विविधताओं के बावजूद हमें एकता के सूत्र में बांधे हुए है। भारत की भाषा संबंधी विविधता भी दुनिया में अद्वितीय है। कहावतों में कहा जाता है ..कोस-कोस पर पानी बदले, चार कोस पर बानी...।
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उन्होंनें कहा कि संविधान की आठवीं अनुसूची में कश्मीर से कन्या कुमारी तक की हिंदी, बंगाली, तेलुगु, मराठी, तमिल, उर्दू, गुजराती, कन्नड़, मलयालम, ओडिया, पंजाबी, असमिया, कश्मीरी, सिंधी, संस्कृत, कोंकणी, मणिपुरी, नेपाली, मैथिली, संथाली, डोगरी, और बोडो जैसी 22 भाषाओं को आधिकारिक मान्यता है।
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इसके अलावा पालि जैसी लुप्तप्राय भाषाओं ने समय-समय पर हमारी संस्कृति को समृद्ध किया है। भारत सरकार का शिक्षा मंत्रालय केंद्रीय हिंदी निदेशालय के माध्यम से उच्चारण से लेकर लिपि तक इन भाषाओं में ऊपर से दिख रही इतनी विविधता के बावजूद उपलब्ध भाषिक और सांस्कृतिक एकता के सूत्रों को चिह्नित करने और उन्हें तलाशने की भावना से संगोष्ठी का आयोजन कर रहा है।