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Kushinagar News: इधर गांव डूबने का डर, उधर बांध टूटने की आशंका
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बांध पर प्लास्टिक तान कर शरण लिए लोग।संवाद
कुशीनगर। एपी बांध पर इन दिनों सिर्फ पानी का दबाव नहीं, दोनों प्रांतों के ग्रामीणों की अलग-अलग चिंताएं भी टकरा रही हैं। कुशीनगर के अहिरौलीदान के लोगों के लिए सबसे बड़ी चिंता गांवों में भरे बाढ़ के पानी से निजात पाना है तो बिहार के गोपालगंज जिले के ग्रामीणों को बांध टूटने पर अपने गांवों में तबाही का डर सता रहा है। एक तरफ पानी निकालने की मांग है, दूसरी तरफ बांध को तत्काल मजबूत करने की जरूरत। इसी खींचतान में 24 घंटे में दो बार दानचक के पास दोनों पक्षों में पुलिस के सामने टकराव होते-होते बचा।
अहिरौलीदान, मठिया श्रीराम के ग्रामीणों का तर्क है कि उनके गांवों में बाढ़ का पानी भरा है। अहिरौलीदान चौराहे के पास फाटक खुलने के बाद पानी नदी की ओर निकल रहा है। ऐसे में उनकी प्राथमिकता गांवों से पानी की निकासी है। इसी चिंता के बीच जब बिहार की ओर से बांध पर मिट्टी डालने की कोशिश हुई तो ग्रामीणों ने विरोध कर दिया। उनका कहना है कि बांध कुशीनगर जिले की सीमा में है, इसलिए उनके गांवों की स्थिति और पानी की निकासी को ध्यान में रखकर ही काम होना चाहिए। मौके पर मौजूद बाढ़ खंड के जेई अमर श्रीवास्तव बेबस नजर आए। शाम तक बोल्डर तो जहां बंधे से रिसाव हो रहा था वहां पर मिट्टी की बोरियां तक नहीं पहुंची।
दूसरी ओर बंधे पर जमे बिहार प्रांत के गोपालगंज जिले के सलेहपुर, मटिहिनिया, रमजीता समेत दस से अधिक गांव के लोगों के चेहरे पर बाढ़ की चिंता साफ दिख रही है। एपी बांध का हिस्सा धंसने और रिसाव शुरू होने के बाद उन्हें आशंका है कि पानी का दबाव बढ़ा तो बांध टूट सकता है। ऐसा हुआ तो गोपालगंज जिले के 20 से अधिक गांव प्रभावित हो सकते हैं। इसी खतरे को देखते हुए बिहार प्रशासन कमजोर हिस्से पर मिट्टी डालकर उसे मजबूत करना चाहता है। बिहार के लोगों के लिए अभी बांध को बचाना सबसे बड़ी जरूरत है।
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संकट बांध का, चिंता दोनों तरफ
-एपी बांध पर एक ओर गांवों से पानी निकलने की उम्मीद लगाए लोग हैं, तो दूसरी ओर बांध टूटने की आशंका से ग्रामीण सहमे हैं। दोनों पक्ष अपने-अपने क्षेत्र को बचाने की कोशिश में हैं लेकिन बांध पर बढ़ते दबाव और रिसाव के बीच आपसी टकराव से समस्या बढ़ने का खतरा है। फिलहाल दोनों तरफ के लोगों की निगाहें बांध की स्थिति और पानी के बहाव पर टिकी हैं।
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यूपी के अहिरौली दान के टोला दानचक के समीप बने बांध को वर्ष 2007 में जानबूझ कर तोड़ दिया गया था। इससे बिहार के लोगों को दुश्वारियों का सामना करना पड़ा था। इसी स्थिति से बचने के लिए बांध की निगरानी की जा रही है। -संतोष सिंह, सलेहपुर गोपालगंज बिहार
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बांध को जबरन तोड़ने की कोशिश यूपी से जुड़े गांवों के लोग कर रहे हैं। बांध के टूटने के कारण 20 से अधिक गांवों में पानी भर जाएगा और जनजीवन ठहर जाएगा। -नीतीश कुमार, सलेहपुर गोपालगंज बिहार
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बिहार के कुछ लोग जानबूझ कर सामाजिक समरसता खराब करने की फिराक में हैं। माहौल को पड़ोसी मुल्क जैसा बनाने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा हैं। बांध को तोड़ने के प्रयास का आरोप निराधार हैं। -जितेंद्र तिवारी, मठिया श्रीराम कुशीनगर
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-यूपी की भूमि पर बिहार के लोग अतिक्रमण का प्रयास किया जा रहा हैं। बांध के आसपास बिहार की भूमि नहीं हैं। बिहार के लोगों के आरोप निराधार हैं। -प्रभु प्रसाद, फागू छापर, कुशीनगर
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अहिरौलीदान, मठिया श्रीराम के ग्रामीणों का तर्क है कि उनके गांवों में बाढ़ का पानी भरा है। अहिरौलीदान चौराहे के पास फाटक खुलने के बाद पानी नदी की ओर निकल रहा है। ऐसे में उनकी प्राथमिकता गांवों से पानी की निकासी है। इसी चिंता के बीच जब बिहार की ओर से बांध पर मिट्टी डालने की कोशिश हुई तो ग्रामीणों ने विरोध कर दिया। उनका कहना है कि बांध कुशीनगर जिले की सीमा में है, इसलिए उनके गांवों की स्थिति और पानी की निकासी को ध्यान में रखकर ही काम होना चाहिए। मौके पर मौजूद बाढ़ खंड के जेई अमर श्रीवास्तव बेबस नजर आए। शाम तक बोल्डर तो जहां बंधे से रिसाव हो रहा था वहां पर मिट्टी की बोरियां तक नहीं पहुंची।
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दूसरी ओर बंधे पर जमे बिहार प्रांत के गोपालगंज जिले के सलेहपुर, मटिहिनिया, रमजीता समेत दस से अधिक गांव के लोगों के चेहरे पर बाढ़ की चिंता साफ दिख रही है। एपी बांध का हिस्सा धंसने और रिसाव शुरू होने के बाद उन्हें आशंका है कि पानी का दबाव बढ़ा तो बांध टूट सकता है। ऐसा हुआ तो गोपालगंज जिले के 20 से अधिक गांव प्रभावित हो सकते हैं। इसी खतरे को देखते हुए बिहार प्रशासन कमजोर हिस्से पर मिट्टी डालकर उसे मजबूत करना चाहता है। बिहार के लोगों के लिए अभी बांध को बचाना सबसे बड़ी जरूरत है।
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संकट बांध का, चिंता दोनों तरफ
-एपी बांध पर एक ओर गांवों से पानी निकलने की उम्मीद लगाए लोग हैं, तो दूसरी ओर बांध टूटने की आशंका से ग्रामीण सहमे हैं। दोनों पक्ष अपने-अपने क्षेत्र को बचाने की कोशिश में हैं लेकिन बांध पर बढ़ते दबाव और रिसाव के बीच आपसी टकराव से समस्या बढ़ने का खतरा है। फिलहाल दोनों तरफ के लोगों की निगाहें बांध की स्थिति और पानी के बहाव पर टिकी हैं।
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यूपी के अहिरौली दान के टोला दानचक के समीप बने बांध को वर्ष 2007 में जानबूझ कर तोड़ दिया गया था। इससे बिहार के लोगों को दुश्वारियों का सामना करना पड़ा था। इसी स्थिति से बचने के लिए बांध की निगरानी की जा रही है। -संतोष सिंह, सलेहपुर गोपालगंज बिहार
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बांध को जबरन तोड़ने की कोशिश यूपी से जुड़े गांवों के लोग कर रहे हैं। बांध के टूटने के कारण 20 से अधिक गांवों में पानी भर जाएगा और जनजीवन ठहर जाएगा। -नीतीश कुमार, सलेहपुर गोपालगंज बिहार
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बिहार के कुछ लोग जानबूझ कर सामाजिक समरसता खराब करने की फिराक में हैं। माहौल को पड़ोसी मुल्क जैसा बनाने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा हैं। बांध को तोड़ने के प्रयास का आरोप निराधार हैं। -जितेंद्र तिवारी, मठिया श्रीराम कुशीनगर
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-यूपी की भूमि पर बिहार के लोग अतिक्रमण का प्रयास किया जा रहा हैं। बांध के आसपास बिहार की भूमि नहीं हैं। बिहार के लोगों के आरोप निराधार हैं। -प्रभु प्रसाद, फागू छापर, कुशीनगर

बांध पर प्लास्टिक तान कर शरण लिए लोग।संवाद