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पंचायत भवन व सामुदायिक शौचालय
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सुकरौली ब्लॉक के सखौली गांव में अधूरा पड़ा पंचायत भवन।
- फोटो : KUSHINAGAR
पुराने पंचायत भवन जर्जर, नए सामुदायिक शौचालय अपूर्ण
पडरौना। सरकार का सबसे अधिक जोर पंचायतों के विकास पर है। लॉकडाउन के दौरान रोजगार बढ़ाने के उद्देश्य से हर गांव में सामुदायिक शौचालय और पंचायत भवन के निर्माण की मंजूरी दी गई। नवंबर में ही मुख्यमंत्री ने इनका लोकार्पण भी कर दिया, लेकिन धरातल पर स्थित बदहाल है। पुराने पंचायत भवन जर्जर हालत में हैं और अधिकांश सामुदायिक शौचालय भी अपूर्ण हैं। कहीं अभी नींव खोदकर छोड़ी गई है तो कहीं अन्य कार्य अपूर्ण हैं। शनिवार को अमर उजाला ने इसकी पड़ताल की।
विशुनपुरा ब्लाक के बेतिया गांव में पंचायत भवन जर्जर है। इसकी मरम्मत और सुंदरीकरण का भी कार्य नहीं कराया गया। सुकरौली ब्लाक के सखौली गांव में नएपंचायत भवन का निर्माण कार्य भी चार माह से रुका हुआ है। गांव के लोगों ने अफसरों को कई बार पत्र दिया लेकिन कोई असर नहीं हुआ। ग्राम पंचायत सचिव संजय कुमार सिंह का कहना है कि उच्चाधिकारियों के निर्देश पर निर्माण कार्य रुका हुआ है। निर्देश मिलने पर पुन: निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।
मोतीचक ब्लाक के ग्राम पंचायत भैंसही बाजार का पुराना पंचायत भवन भी जर्जर है। यह पंचायत भवन वर्ष 1995 में बना था। रंगाई पुताई भी नहीं हुई है। दरवाजे और खिड़कियां भी गायब हैं। निवर्तमान ग्राम प्रधान मीना देवी ने बताया कि नए भवन के निर्माण के लिए प्रस्ताव दिया गया था लेकिन स्वीकृति नहीं मिली।
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फाजिलनगर ब्लाक के ग्राम पंचायत कनौरा का पंचायत भवन एक दशक तक गंदे पानी से घिरा रहा। यहां का तालाब भरा गया तो पंचायत भवन में घुसने भर की जगह भी नहीं बची। आधी से अधिक बिल्डिंग ही मिट्टी में दब गई है। इसी ब्लाक के परसौनी का सामुदायिक शौचालय अभी नींव लेवल तक भी पूरा नहीं हो सका है। यहां नींव खोदकर गिट्टी डाला गया है। नींव की गहराई भी मानक के अनुसार नहीं है। निर्माण कार्य कब पूरा होगा इसका कोई ठिकाना नहीं है। निवर्तमान ग्राम प्रधान प्रद्युम्न ने बताया कि कुछ लोगों ने रुकावट पैदा कर दी जिसके कारण बाधित हो गया था। सुकरौली ब्लाक के मुंडेरा बाबू में बन रहे सार्वजनिक शौचालय का निर्माण कार्य भी करीब तीन माह से रुका है। सामुदायिक शौचालय के निर्माण के लिए केवल नींव चलाकर छोड़ दिया गया है। ग्राम पंचायत सचिव मिर्जा राशिद नऱ्े बताया कि जमीनी विवाद के कारण निर्माण कार्य रुका हुआ है।
दुदही ब्लाक के पृथ्वीपुर में पंचायत भवन बदहाल है। परिसर की साफ सफाई नहीं होने से यहां गंदगी फैली रहती है। यहां बैठना भी मुश्किल है।
शासन ने सभी 1003 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय निर्माण का लक्ष्य दिया था जिनमें से 760 ग्राम पंचायतों में निर्माण पूरा हो चुका है, शेष में कार्य इसी महीने पूरा कराने का लक्ष्य है। पंचायत भवन के निर्माण में मनरेगा का बजट नहीं मिल पाने के कारण काम प्रभावित है। बजट मिलते ही उनका भी निर्माण पूरा करा दिया जाएगा। इसके अलावा जिले में जितने भी पुराने पंचायत भवन जर्जर हैं, उन्हें अगले साल बजट मिलने पर बनवाया जाएगा।
राघवेंद्र द्विवेदी-डीपीआरओ, कुशीनगर
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पडरौना। सरकार का सबसे अधिक जोर पंचायतों के विकास पर है। लॉकडाउन के दौरान रोजगार बढ़ाने के उद्देश्य से हर गांव में सामुदायिक शौचालय और पंचायत भवन के निर्माण की मंजूरी दी गई। नवंबर में ही मुख्यमंत्री ने इनका लोकार्पण भी कर दिया, लेकिन धरातल पर स्थित बदहाल है। पुराने पंचायत भवन जर्जर हालत में हैं और अधिकांश सामुदायिक शौचालय भी अपूर्ण हैं। कहीं अभी नींव खोदकर छोड़ी गई है तो कहीं अन्य कार्य अपूर्ण हैं। शनिवार को अमर उजाला ने इसकी पड़ताल की।
विशुनपुरा ब्लाक के बेतिया गांव में पंचायत भवन जर्जर है। इसकी मरम्मत और सुंदरीकरण का भी कार्य नहीं कराया गया। सुकरौली ब्लाक के सखौली गांव में नएपंचायत भवन का निर्माण कार्य भी चार माह से रुका हुआ है। गांव के लोगों ने अफसरों को कई बार पत्र दिया लेकिन कोई असर नहीं हुआ। ग्राम पंचायत सचिव संजय कुमार सिंह का कहना है कि उच्चाधिकारियों के निर्देश पर निर्माण कार्य रुका हुआ है। निर्देश मिलने पर पुन: निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।
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मोतीचक ब्लाक के ग्राम पंचायत भैंसही बाजार का पुराना पंचायत भवन भी जर्जर है। यह पंचायत भवन वर्ष 1995 में बना था। रंगाई पुताई भी नहीं हुई है। दरवाजे और खिड़कियां भी गायब हैं। निवर्तमान ग्राम प्रधान मीना देवी ने बताया कि नए भवन के निर्माण के लिए प्रस्ताव दिया गया था लेकिन स्वीकृति नहीं मिली।
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फाजिलनगर ब्लाक के ग्राम पंचायत कनौरा का पंचायत भवन एक दशक तक गंदे पानी से घिरा रहा। यहां का तालाब भरा गया तो पंचायत भवन में घुसने भर की जगह भी नहीं बची। आधी से अधिक बिल्डिंग ही मिट्टी में दब गई है। इसी ब्लाक के परसौनी का सामुदायिक शौचालय अभी नींव लेवल तक भी पूरा नहीं हो सका है। यहां नींव खोदकर गिट्टी डाला गया है। नींव की गहराई भी मानक के अनुसार नहीं है। निर्माण कार्य कब पूरा होगा इसका कोई ठिकाना नहीं है। निवर्तमान ग्राम प्रधान प्रद्युम्न ने बताया कि कुछ लोगों ने रुकावट पैदा कर दी जिसके कारण बाधित हो गया था। सुकरौली ब्लाक के मुंडेरा बाबू में बन रहे सार्वजनिक शौचालय का निर्माण कार्य भी करीब तीन माह से रुका है। सामुदायिक शौचालय के निर्माण के लिए केवल नींव चलाकर छोड़ दिया गया है। ग्राम पंचायत सचिव मिर्जा राशिद नऱ्े बताया कि जमीनी विवाद के कारण निर्माण कार्य रुका हुआ है।
दुदही ब्लाक के पृथ्वीपुर में पंचायत भवन बदहाल है। परिसर की साफ सफाई नहीं होने से यहां गंदगी फैली रहती है। यहां बैठना भी मुश्किल है।
शासन ने सभी 1003 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय निर्माण का लक्ष्य दिया था जिनमें से 760 ग्राम पंचायतों में निर्माण पूरा हो चुका है, शेष में कार्य इसी महीने पूरा कराने का लक्ष्य है। पंचायत भवन के निर्माण में मनरेगा का बजट नहीं मिल पाने के कारण काम प्रभावित है। बजट मिलते ही उनका भी निर्माण पूरा करा दिया जाएगा। इसके अलावा जिले में जितने भी पुराने पंचायत भवन जर्जर हैं, उन्हें अगले साल बजट मिलने पर बनवाया जाएगा।
राघवेंद्र द्विवेदी-डीपीआरओ, कुशीनगर