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Kushinagar News: साहब! मेरी जमीन विवादित है, उसे बिकने से बचाएं...

Wed, 10 May 2023 01:16 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Wed, 10 May 2023 01:16 AM IST
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objections in nibandhak office
जमीन बैनामा के लिए उप निबंधक कार्यालय पहुंचे लोग। संवाद
जमीन-जायदाद बचाने के लिए बैनामे से पहले डाली हैं आपत्तियां
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फोटो है।
कोई बेटे से परेशान है तो कोई पिता से, ससुर उनके हिस्से की जमीन न बेच दें, इसलिए बहुओं ने भी रजिस्ट्री रोकने की लगाई है गुहार
बिचौलिए लोगों को झांसे में लेकर रजिस्ट्री और खारिज दाखिल करा देते हैं जमीन की
सदर उप निबंधक कार्यालय में जनवरी से अब तक आ चुकी हैं 80 आपत्तियां
जमीन बिक जाने पर तहसील से लेकर उप निबंधक कार्यालय तक दौड़ते हैं ऐसे लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
कुशीनगर। मकान हो या जमीन, खरीदते समय सतर्क रहें। सौदा जांच-परख कर ही करें। क्योंकि अगर चूक हुई तो रकम पानी में डूबने के साथ ही समस्याओं का चट्टान खड़ा हो जाएगा। यकीन न हो तो अपने निकट के उप निबंधक कार्यालय से पता करें। वहां ऐसे बहुत से लोगों की लंबी फेहरिश्त है, जिन्होंने आपत्ति दाखिल की है कि उनकी जमीन विवादित है। कोई बेटे से परेशान है तो कोई पिता से। बहुएं ससुर से तो ससुर बहुओं से। सदर उप निबंधक कार्यालय में जनवरी से अब तक 80 लोगों ने आपत्तियां दाखिल की हैं।
दरअसल, ये आपत्तियां लोगों के भीतर जालसाजों और ठगों के खौफ को बयां करती हैं। लोग डरे-सहमे रहते हैं कि जिस जमीन को लेने या मकान बनवाने में जीवन भर की गाढ़ी कमाई लगा दी है, कहीं उनके परिवारवाले जालसाजों के चक्कर में आकर किसी और के हाथों ने बेच दें। ऐसे बिचौलिए और आपत्तियां दाखिल करने के मामले सदर तहसील क्षेत्र समेत सभी तहसीलों में आ रहे हैं।
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केस-एक
बेटे ने दाखिल की आपत्ति
सदर तहसील क्षेत्र के अरुण कुमार ने उप निबंधक कार्यालय में बैनामा की आपत्ति दाखिल की है। उन्होंने आपत्ति में बताया है कि पिता दारू पीते हैं। वह जमीन किसी और के हाथ बेचने की धमकी देते रहते हैं। कुछ दलाल किस्म के लोग सक्रिय हैं। उन्होंने आशंका जताई है कि कहीं उनके पिता बिचौलियों के चक्कर में फंसकर चुपके से जमीन-जायदाद न बेच दें। इसलिए वह जब भी आएं तो एक बार उन्हें सूचना दे दी जाए।
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केस-दो
खेत में हिस्सा न देने की शिकायत
मुश्ताक अंसारी ने बताया कि वे चार भाई हैं। पिता ने उन्हें खेत से बेदखल कर दिया है। वह जमीन-जायदाद बाकी तीनों भाइयों के नाम करने की धमकी देते रहते हैं। मुश्ताक ने बताया कि यदि वह ऐसा कर दिए तो उनका परिवार भुखमरी के कगार पर आ जाएगा। अन्य कई परेशानियां खड़ी हो जाएंगी। उन्होंने अपना मोबाइल नंबर और पता दर्ज कराते हुए बैनामा रोके जाने की गुहार लगाई है।

केस-तीन
एक ही बहू को दे रहे जमीन, दो को बेदखल
हुस्नआरा खातून ने अपने ससुर पर आरोप लगाया है कि वह जमीन जायदाद बेचकर दारू पी जाते हैं। इसलिए बिचौलिए हमेशा उन्हें बरगलाते रहते हैं। अक्सर वह तहसील पर जाते रहते हैं। वे तीन बहुएं हैं, लेकिन केवल एक ही बहू को जमीन-जायदाद देने की बात कहते हैं। इस वजह से हुस्नआरा और दूसरी बहू चिंतित रहती हैं। फिर से जमीन की रजिस्ट्री न करें, इसलिए आपत्ति दाखिल की है।

केस-चार
भाई बेच रहे जमीन, आएं तो हमें भी बताएं
नगीना यादव ने भी बैनामे से पूर्व आपत्ति दाखिल की है। उन्होंने बताया कि उनके दो भाई जमीन बेच रहे हैं। ऐसा कुछ बिचौलियों और ग्रामीणों के बहकावे में आकर कर रहे हैं। समझाने पर नहीं मानते। इसलिए यदि वे दोनों भाई जमीन बैनामा करने आते हैं तो उन्हें भी बुला लिया जाए। ताकि यह देख लें कि कहीं उनके हिस्से की जमीन बैनामा तो नहीं हो रही या कुछ तिकड़म तो नहीं कर रहे हैं।

बैनामा के समय जांच न होने पर बढ़ जाती है परेशानी
बैनामे के वक्त जांच नहीं होने से जालसाज इसका फायदा उठाते हैं। रजिस्ट्री दफ्तर में ऐसी कोई जांच नहीं की जाती है, जिससे पता चल सके कि जिस जमीन का बैनामा करवा रहे हैं, वह साफ-सुथरी है या नहीं। जालसाज चौहद्दी गलत दिखाकर आसानी से दूसरे की जमीन को बेच देते हैं। मामला खारिज-दाखिल या बैनामे के बाद कब्जा लेने के समय पकड़ में आता है। तब तक बहुत देर हो चुकी होती है और लोग ठगे जा चुके होते हैं।

साहूकार से लिया कर्ज तो लिखवा ली पूरी संपत्ति
सदर तहसील क्षेत्र के सुखपुरा गांव का एक मामला तहसील में कुछ माह पहले चर्चा में था। सदर उप निबंधक अजय सिंह ने बताया कि एक गरीब किसान की दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी की शादी के लिए पडरौना के एक साहूकार से उसने दो कट्ठा जमीन बेचने का भरोसा दिलाकर कुछ रुपये लिए। किसान निरक्षर है। बेटी की शादी के बाद वह साहूकार के नाम जमीन की रजिस्ट्री करने पहुंचा, लेकिन साहूकार ने चालाकी दिखाई। उसने ऊपर कागजात दो कट्ठा जमीन के बनवाए, लेकिन स्टांप और अन्य सभी दस्तावेज खेत सहित उसके घर तक का बनवा लिया। दो कट्ठा खेत खरीदने की बात कहकर उसकी पूरी जमीन-जायदाद लिखवा ली। रजिस्ट्री भी उसी कर्ज की रकम में करा लिया। संयोग यह था कि सदर उप निबंधक की नजर उस फाइल पर पड़ गई। वह मौके पर जाकर किसान से पूछे तो उसने बताया कि दो कट्ठा जमीन बेची है, लेकिन उप निबंधक ने जब बताया कि उसके अंगूठे पर उसकी पूरी जमीन जायदाद ही लिखवा ली गई है तो पूरा परिवार इस धोखे के बारे में जानकर रोने-बिलखने लगा। सच्चाई सामने आने पर उप निबंधक ने रजिस्ट्री निरस्त कराई।

जमीन खरीदते समय ध्यान देने वाली बातें
जमीन बेचने वाले के बारे में जान लें। जमीन खरीदने के दौरान सभी जरूरी बिंदुओं पर जांच करनी चाहिए। यह पता कर लें कि जो शख्स जमीन बेच रहा है, वही प्रॉपर्टी का असली मालिक है और उसके पास सारे अधिकार हैं। जमीन के दस्तावेज काफी जटिल होते हैं। बेहतर है कि इन दस्तावेजों की जांच आप किसी अधिवक्ता से करवाएं। कम से कम पिछले 30 वर्षों के लिए टाइटल का पता जरूर लगाएं।

सब-रजिस्ट्रार के दफ्तर में खोज
अधिग्रहण किए जाने वाली भूमि के संबंध में लेनदेन (कर्मों के माध्यम से स्वामित्व में परिवर्तन) और एन्कंब्रन्स (कानूनी बकाया) की खोज आपको सब रजिस्ट्रार के दफ्तर में करनी होगी।

जमीन खरीद के लिए पब्लिक नोटिस
प्रॉपर्टी खरीदने से पहले खरीदी जाने वाली भूमि पर किसी भी दावे को आमंत्रित करने के लिए स्थानीय अखबारों में पब्लिक नोटिस देना चाहिए। इससे यह पता लग जाता है कि जमीन पर किसी थर्ड पार्टी के अधिकार तो नहीं हैं।

प्रॉपर्टी टैक्स
यह जरूर जांच करें कि जिस जमीन को आप खरीद रहे हैं, उसके प्रॉपर्टी टैक्स का भुगतान ट्रांसफर की तारीख तक की जा चुकी है और वेरिफिकेशन के लिए इस भुगतान की मूल रसीदें तैयार हैं। यह भी पता लगाएं कि वेंडर के नाम पर खाता (मालिक के नाम को दर्शाती रेवेन्यू रिकॉर्डिंग) उपलब्ध है कि नहीं।

जमीन की असल स्थिति के बारे में जानें
इस बात की भी जांच करनी चाहिए कि जमीन गिरवी रखी गई है या नहीं। जमीन खरीदने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि विक्रेता ने भूमि पर बकाया सभी राशियों का भुगतान किया है।

अच्छी तरह से जांच कराएं जमीन की
जमीन मालिक की ओर से पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए भी जमीन बेची जाती है। पावर ऑफ अटॉर्नी की अच्छी तरह से जांच करनी चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वही प्रॉपर्टी बेची जा रही है, जिसे आपको खरीदना है। ऐसा भी होता है। जब कुछ समय के भीतर कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करना जरूरी होता है। इसमें देरी नहीं होनी चाहिए, इससे लागत बढ़ती है। ऐसी स्थितियों से बचने के लिए आप किसी और को अपनी ओर से हस्ताक्षर करने के लिए अधिकृत कर सकते हैं।

सदर उप निबंधक कार्यालय में बना है रजिस्टर
सदर उप निबंधक कार्यालय में एक रजिस्टर बनाया गया है। इसमें बैनामे की आपत्तियां दर्ज की जाती हैं। आपत्ति करने वाले का नाम, वल्दियत, पता और मोबाइल नंबर अंकित किया जाता है। इस साल जनवरी से अब तक 80 लोग आपत्तियां दाखिल कर चुके हैं।

बैनामा हो जाने पर इन न्यायालयों में दाखिल करें वाद
यदि इन सबके बावजूद किसी ने बैनामा करा लिया है और जानकारी देर से हुई है तो जिला एवं सत्र न्यायालय (दीवानी) में वाद दाखिल किया जाता है। सब रजिस्ट्रार के मुताबिक वाजिब प्रमाण मिलने पर बैनामे खारिज भी होते हैं। इसी तरह यदि बैनामे के बाद खारिज दाखिल भी हो गया है तो उसका मुकदमा तहसीलदार या एसडीएम न्यायालय में दाखिल होता है।


वर्जन-
रजिस्ट्री दफ्तर में ऐसी किसी जांच की सुविधा नहीं है, जिससे पता चल सके कि जिस जमीन का बैनामा करवा रहे हैं, वह साफ-सुथरी है या नहीं। जमीन के बैनामे से पहले लोगों की आपत्तियां ली जा रही हैं। उसके बाद जैसे ही कोई व्यक्ति उस नाम-पते का आता है तो जमीन के बारे में पता लगाया जाता है। जिन जमीनों के मामले में परिवारवालों की तरफ से आपत्ति डाली जाती है, उन्हें एक-दो घंटे का समय दिया जाता है कि आपस में बैठकर निर्णय ले लें। रजिस्ट्री के दौरान पूरी सतर्कता बरती जाती है।
-अजय सिंह, उप निबंधक, पडरौना
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