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अब आवाज से पता चल जाएगा टीबी है या नहीं
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अब आवाज से पता चल जाएगा टीबी है या नहीं
मोबाइल एप्लिकेशन में रिकॉर्ड की जाएगी आवाज
जनपद के 43 लोगों की आवाज एप में की गई रिकॉर्ड
एप लागू करने से पहले कराया जा रहा ट्रॉयल
कुशीनगर। अब ‘आवाज’ से टीबी रोगियों का पता लगा लिया जाएगा। इसके लिए एक मोबाइल एप्लीकेशन इजाद किया गया है। फील्ड नामक इस एप्लिकेशन के जरिए तीन तरह से आवाज रिकॉर्ड कर टीबी रोग का पता लगाया जाएगा। इस एप को पायलट प्रोजेक्ट के तहत लागू करना है। जनपद में क्षय रोग विभाग ने ट्रायल के लिए 43 संभावित रोगियों की आवाज को रिकार्ड किया है।
केंद्र सरकार ने वर्ष 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने का निर्णय लिया है। इसके लिए फील्ड नाम का मोबाइल एप्लिकेशन लांच किया गया है। इसे लागू करने से पहले हर जनपद में ट्रॉयल कराया जा रहा है। इसमें टीबी के संभावित रोगी की आवाज का सैंपल लिया जाएगा। ये सैंपल तीन प्रकार के लेने हैं। एक सैंपल ऐसे व्यक्तियों का लेना है, जो माइक्रो बॉयोलॉजिकली टीबी कंफर्म हो। दूसरे वह, जो टीबी के मरीज के संपर्क में आए हो और तीसरे वह लोग हैं, जिनकी माइक्रोस्कोपी, सीबीनॉट और एक्सरे से सभी जांच करा ली गई हो, फिर भी रिपोर्ट निगेटिव आई हो।
बताया जा रहा है कि इस एप के माध्यम से टीबी की जांच कराने वाले व्यक्ति से 30 प्रकार के सवाल पूछे जाएंगे। मसलन, उसे बुखार है या नहीं, यदि बुखार है तो कितने दिन से, टीबी की दवा कभी ली है अथवा नहीं। शासन के निर्देश पर जनपद के 43 लोगों की आवाज का सैंपल इस मोबाइल एप में रिकार्ड कर क्षय रोग विभाग ने जांच के लिए भेजा है। अभी इस जांच पद्धति पर परीक्षण चल रहा है। यदि यह कारगर साबित हुआ तो बिना बलगम, एक्सरे या सीबीनॉट मशीन के ही टीबी की जांच की जा सकेगी।
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ऐसे लिया जाएगा नमूना
एप के जरिए टीबी की जांच के लिए आवाज का नमूना लिया जाएगा। पहले तो एक से दस तक गिनती गिनाई जाएगी। फिर अ, आ, इ, ई बुलवाया जाएगा। खांसी की आवाज का भी नमूना लिया जाएगा। बाद में वातावरण का साउंड लिया जाएगा।
कोट
संभावित रोगियों में टीबी का पता लगाने के लिए फील्ड नामक एप पर प्रयोग चल रहा है। शासन से इस जनपद में ट्रायल के लिए नमूने लेने का निर्देश मिला था। 43 लोगों की आवाज का नमूना लेकर जांच के लिए भेज दिया गया है। इसमें ऐसे लोगों का चयन किया गया है, जो टीबी के मरीज हों, माइक्रोस्कोपिक जांच में बीमारी पकड़ में न आई हो और टीबी रोगियों के संपर्क में आए हों।
अनुपम मिश्र, जिला कार्यक्रम समन्वयक, क्षय रोग विभाग
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मोबाइल एप्लिकेशन में रिकॉर्ड की जाएगी आवाज
जनपद के 43 लोगों की आवाज एप में की गई रिकॉर्ड
एप लागू करने से पहले कराया जा रहा ट्रॉयल
कुशीनगर। अब ‘आवाज’ से टीबी रोगियों का पता लगा लिया जाएगा। इसके लिए एक मोबाइल एप्लीकेशन इजाद किया गया है। फील्ड नामक इस एप्लिकेशन के जरिए तीन तरह से आवाज रिकॉर्ड कर टीबी रोग का पता लगाया जाएगा। इस एप को पायलट प्रोजेक्ट के तहत लागू करना है। जनपद में क्षय रोग विभाग ने ट्रायल के लिए 43 संभावित रोगियों की आवाज को रिकार्ड किया है।
केंद्र सरकार ने वर्ष 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने का निर्णय लिया है। इसके लिए फील्ड नाम का मोबाइल एप्लिकेशन लांच किया गया है। इसे लागू करने से पहले हर जनपद में ट्रॉयल कराया जा रहा है। इसमें टीबी के संभावित रोगी की आवाज का सैंपल लिया जाएगा। ये सैंपल तीन प्रकार के लेने हैं। एक सैंपल ऐसे व्यक्तियों का लेना है, जो माइक्रो बॉयोलॉजिकली टीबी कंफर्म हो। दूसरे वह, जो टीबी के मरीज के संपर्क में आए हो और तीसरे वह लोग हैं, जिनकी माइक्रोस्कोपी, सीबीनॉट और एक्सरे से सभी जांच करा ली गई हो, फिर भी रिपोर्ट निगेटिव आई हो।
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बताया जा रहा है कि इस एप के माध्यम से टीबी की जांच कराने वाले व्यक्ति से 30 प्रकार के सवाल पूछे जाएंगे। मसलन, उसे बुखार है या नहीं, यदि बुखार है तो कितने दिन से, टीबी की दवा कभी ली है अथवा नहीं। शासन के निर्देश पर जनपद के 43 लोगों की आवाज का सैंपल इस मोबाइल एप में रिकार्ड कर क्षय रोग विभाग ने जांच के लिए भेजा है। अभी इस जांच पद्धति पर परीक्षण चल रहा है। यदि यह कारगर साबित हुआ तो बिना बलगम, एक्सरे या सीबीनॉट मशीन के ही टीबी की जांच की जा सकेगी।
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ऐसे लिया जाएगा नमूना
एप के जरिए टीबी की जांच के लिए आवाज का नमूना लिया जाएगा। पहले तो एक से दस तक गिनती गिनाई जाएगी। फिर अ, आ, इ, ई बुलवाया जाएगा। खांसी की आवाज का भी नमूना लिया जाएगा। बाद में वातावरण का साउंड लिया जाएगा।
कोट
संभावित रोगियों में टीबी का पता लगाने के लिए फील्ड नामक एप पर प्रयोग चल रहा है। शासन से इस जनपद में ट्रायल के लिए नमूने लेने का निर्देश मिला था। 43 लोगों की आवाज का नमूना लेकर जांच के लिए भेज दिया गया है। इसमें ऐसे लोगों का चयन किया गया है, जो टीबी के मरीज हों, माइक्रोस्कोपिक जांच में बीमारी पकड़ में न आई हो और टीबी रोगियों के संपर्क में आए हों।
अनुपम मिश्र, जिला कार्यक्रम समन्वयक, क्षय रोग विभाग