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Kushinagar News: बसहिया ही नहीं... तुर्कपट्टी का छहू और खरदरपुल भी तस्करी के लिए कुख्यात

Wed, 05 Feb 2025 12:17 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Wed, 05 Feb 2025 12:17 AM IST
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Not only Basahiya... Chhahu and Khardarpul of Turkpatti are also notorious for smuggling.
पडरौना। बसहिया ही नहीं, तुर्कपट्टी का छहू और खरदरपुल भी तस्करी के लिए कुख्यात है। छहू गांव में कई परिवार ऐसे हैं जो दो पीढि़यों से पशु तस्करी के धंधे में लिप्त बताए जाते हैं।
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बरवा पट्टी पुलिस ने जिस गैंगस्टर गुड्डू यादव को जेल भेजा है, उसके पिता चंद्रभान यादव पर विभिन्न थानों में दस से अधिक पशु तस्करी के केस दर्ज हैं। चिह्नित पशु तस्करोंं पर पुलिस पूर्व में ही गैंगस्टर, गुंडा एक्ट की कार्रवाई कर चुकी है।
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पडरौना कोतवाली क्षेत्र के बसहिया ऐसा गांव हैं, जहां 50 से अधिक पशु तस्कर पुलिस रिकाॅर्ड में हैं और आठ से अधिक हिस्ट्रीशीटर भी। गांव में दबिश देने गई पुलिस पर पूर्व में कई बार हमले भी हो चुके हैं। रियाज उर्फ ननकी आज भी पुलिस के लिए सिरदर्द बना है। इस गांव के पशु तस्करों का पूरब से पश्चिम तक नेटवर्क सक्रिय है।
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कुछ दिन पूर्व गांव में पहुंचे एसपी संतोष कुमार मिश्र ने एक-एक तस्कर के घर पहुंचकर उनके गतिविधियों से जुड़ी जानकारी ली थी। तस्करों का सत्यापन भी कराया था। इनमें कई पशु तस्कर ऐसे मिले, जिनके बारे में घर वाले बताए, वो उस काम और स्थान से अलग मिलने के साथ पशु तस्करी के धंधे मेंं लिप्त मिले।
तुर्कपट्टी क्षेत्र के अमवा, दुधवलिया, बसडिला पांडेय, कसया क्षेत्र का सपहा गांव के नौका टोला पशु तस्करों का गढ़ है। छहू का रहने वाला जिला पंचायत सदस्य अमरेश यादव पर एक दर्जन से अधिक पशु तस्करी का केस दर्ज है।

इसका भाई गुड्डू यादव पर भी गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई करने के साथ पुलिस पशु तस्करी से अर्जित संपत्ति बताते हुए जब्त भी कर चुकी है। इसके घर के गांव प्रधान भी हैं। इसके पिता चंद्रभान यादव को कुछ दिन पूर्व पुलिस ने जेल भेजा था। जमानत पर हाल ही में वह जेल से रिहा हो गया। पुलिस की सख्ती बढ़नेे के बाद भी पुराने तस्कर नए चेहरों को धंधे में शामिल कर पशुओं को धड़ल्ले से बिहार भेज रहे हैं। तुर्कपट्टी क्षेत्र के घाघी नदी के दो पाट में बसा खरदरपुल गांव का आधा हिस्सा कसया क्षेत्र में पड़ता है। दिन में पशुओं को चराने के बहाने खरदरपुल के पास छोड़ दिया जाता है और शाम को कसया क्षेत्र में बांध दिया जाता है। रात से भोर तक मौका देखकर पशुओं को पशु तस्कर गांवों की पकडंडियों से बिहार की सीमा में पहुंचा देते हैं।
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