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रिवर फ्रंट के विकास के लिए एनओसी की दरकार
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रिवरफ्रंट विकसित करने को स्थलीय निरीक्षण करते पर्यटन सूचना अधिकारी राजेश कुमार भारती।
- फोटो : KUSHINAGAR
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रिवर फ्रंट के विकास के लिए एनओसी की दरकार
एनएचएआई के उप परियोजना प्रबंधक व वास्तुविद सलाहकार भी कर चुके हैं दौरा
आज गोरखपुर में एनएचएआई अधिकारियों के साथ होगी बैठक
कसया(कुशीनगर)। विश्व बैंक सहायतित उत्तर प्रदेश प्रो-पुअर पर्यटन विकास परियोजना के तहत राजमार्ग-28 स्थित मधुरिया के पास बौद्ध कालीन ककुत्था पर रिवर फ्रंट विकास के लिए वन विभाग और एनएचएआई के एनओसी (अनात्ति प्रमाणपत्र) की आवश्यकता है। इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसे लेकर सोमवार को गोरखपुर में एनएचएआई के अधिकारियों की बैठक होनी है। इसमें पर्यटन, एनएचएआई और विश्व बैंक के सामाजिक विशेषज्ञ शामिल होंगे।
बौद्ध कालीन ककुत्था नदी पर रिवर फ्रंट के विकास का कार्य प्रस्तावित है। यह कार्य आरंभ कराने से पहले उत्तर प्रदेश प्रो-पुअर पर्यटन विकास के परियोजना निदेशक दिनेश कुमार ने क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी गोरखपुर को पत्र भेजकर संबंधित विभागों से अनापत्ति प्रमाणपत्र की जरूरत बताई है। यह एनओसी रिवर फ्रंट के विकास में पड़ने वाली वन विभाग व एनएचएआई की भूमि के संबंध में ली जानी है। परियोजना निदेशक ने बताया है कि अनापत्ति के लिए भारत सरकार के ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन किया जाना है। इसके लिए डीएफओ की प्रमाणित, प्रस्तावित स्थल की संयुक्त निरीक्षण आख्या व वन विभाग की अधिसूचना की कॉपी की जरूरत है।
एनएचएआई से भी अनापत्ति प्रमाणपत्र की दरकार है। दोनों विभागों की तरफ से मधुरिया स्थित ककुत्था नदी के रिवर फ्रंट विकास में होने वाले कार्य व भूमि का स्थलीय निरीक्षण कर संयुक्त निरीक्षण आख्या तैयार कर प्रो पुअर पर्यटन विकास के परियोजना निदेशक को भेजने की प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है। वन विभाग से एनओसी प्राप्त करने के लिए कार्रवाई अंतिम दौर में होने की बात बताई जा रही है।
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पर्यटन सूचना अधिकारी राजेश कुमार भारती की अगुवाई में शुक्रवार को विश्व बैंक के सामाजिक विशेषज्ञ नवल किशोर शर्मा, एनएचएआई के डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर अर्पित श्रीवास्तव, एनएचएआई के वास्तुविद् सलाहकार उपेंद्र कुमार सिंह की मौजूदगी में ककुत्था नदी के रिवर फ्रंट विकास कार्य के लिए स्थलीय निरीक्षण हो चुका है। पर्यटन सूचना अधिकारी राजेश कुमार भारती ने रविवार को बताया कि एनएचएआई से एनओसी के लिए गोरखपुर में सोमवार को पर्यटन, एनएचएआई और वर्ल्ड बैंक के सामाजिक विशेषज्ञ सहित अन्य उच्चाधिकारियों के साथ बैठक होगी। इसमें एनओसी प्राप्त करने का रास्ता साफ हो जाएगा।
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एनएचएआई के उप परियोजना प्रबंधक व वास्तुविद सलाहकार भी कर चुके हैं दौरा
आज गोरखपुर में एनएचएआई अधिकारियों के साथ होगी बैठक
कसया(कुशीनगर)। विश्व बैंक सहायतित उत्तर प्रदेश प्रो-पुअर पर्यटन विकास परियोजना के तहत राजमार्ग-28 स्थित मधुरिया के पास बौद्ध कालीन ककुत्था पर रिवर फ्रंट विकास के लिए वन विभाग और एनएचएआई के एनओसी (अनात्ति प्रमाणपत्र) की आवश्यकता है। इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसे लेकर सोमवार को गोरखपुर में एनएचएआई के अधिकारियों की बैठक होनी है। इसमें पर्यटन, एनएचएआई और विश्व बैंक के सामाजिक विशेषज्ञ शामिल होंगे।
बौद्ध कालीन ककुत्था नदी पर रिवर फ्रंट के विकास का कार्य प्रस्तावित है। यह कार्य आरंभ कराने से पहले उत्तर प्रदेश प्रो-पुअर पर्यटन विकास के परियोजना निदेशक दिनेश कुमार ने क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी गोरखपुर को पत्र भेजकर संबंधित विभागों से अनापत्ति प्रमाणपत्र की जरूरत बताई है। यह एनओसी रिवर फ्रंट के विकास में पड़ने वाली वन विभाग व एनएचएआई की भूमि के संबंध में ली जानी है। परियोजना निदेशक ने बताया है कि अनापत्ति के लिए भारत सरकार के ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन किया जाना है। इसके लिए डीएफओ की प्रमाणित, प्रस्तावित स्थल की संयुक्त निरीक्षण आख्या व वन विभाग की अधिसूचना की कॉपी की जरूरत है।
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एनएचएआई से भी अनापत्ति प्रमाणपत्र की दरकार है। दोनों विभागों की तरफ से मधुरिया स्थित ककुत्था नदी के रिवर फ्रंट विकास में होने वाले कार्य व भूमि का स्थलीय निरीक्षण कर संयुक्त निरीक्षण आख्या तैयार कर प्रो पुअर पर्यटन विकास के परियोजना निदेशक को भेजने की प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है। वन विभाग से एनओसी प्राप्त करने के लिए कार्रवाई अंतिम दौर में होने की बात बताई जा रही है।
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पर्यटन सूचना अधिकारी राजेश कुमार भारती की अगुवाई में शुक्रवार को विश्व बैंक के सामाजिक विशेषज्ञ नवल किशोर शर्मा, एनएचएआई के डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर अर्पित श्रीवास्तव, एनएचएआई के वास्तुविद् सलाहकार उपेंद्र कुमार सिंह की मौजूदगी में ककुत्था नदी के रिवर फ्रंट विकास कार्य के लिए स्थलीय निरीक्षण हो चुका है। पर्यटन सूचना अधिकारी राजेश कुमार भारती ने रविवार को बताया कि एनएचएआई से एनओसी के लिए गोरखपुर में सोमवार को पर्यटन, एनएचएआई और वर्ल्ड बैंक के सामाजिक विशेषज्ञ सहित अन्य उच्चाधिकारियों के साथ बैठक होगी। इसमें एनओसी प्राप्त करने का रास्ता साफ हो जाएगा।