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लंबी दूरी की ट्रेनें नहीं, यात्री हो रहे परेशान
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लंबी दूरी की ट्रेनें नहीं, यात्री हो रहे परेशान
कप्तानगंज-थावे रूट पर कोरोना काल से पहले चलती थीं स्पेशल ट्रेनें
तमकुहीरोड(कुशीनगर)। कप्तानगंज-थावे रेलमार्ग का अमान परिवर्तन हुए एक दशक से अधिक समय हो गया, लेकिन लंबी दूरी की ट्रेनों का स्थायी रूप से संचालन नहीं हो पाया। पहले ग्रीष्मकालीन स्पेशल के नाम पर कुछ ट्रेनें चलती थीं, लेकिन उन्हें भी बंद कर दिया गया।
25 अक्तूबर 2010 को पूर्वोत्तर रेलवे की तरफ से थावे से कप्तानगंज तक अमान परिवर्तन के लिए मेगा ब्लॉक लिया गया था तो लोगों को उम्मीद जागी थी कि बड़ी लाइन में परिवर्तन हो जाने के बाद इस रेलमार्ग का कायाकल्प हो जाएगा। लंबी दूरी की ट्रेनों के चलाए जाने से यात्रा के साथ-साफ व्यापार भी फलने-फूलने लगेगा। 16 दिसंबर 2011 को अमान परिवर्तन के बाद इसे ट्रेनों के संचालन के लिए खोल दिया गया, लेकिन अब तक लंबी दूरी की ट्रेन का संचालन नहीं हो सका है। पहले समर स्पेशल, मेला स्पेशल, पूजा स्पेशल के नाम पर गोरखपुर जम्मूतवी एक्सप्रेस, काठगोदाम हावड़ा एक्सप्रेस, छपरा ग्वालियर एक्सप्रेस, आनंद एक्सप्रेस, गोरखपुर कोलकाता एक्सप्रेस जैसी लंबी दूरी की साप्ताहिक ट्रेनें चलती थीं। उस पर भी कोरोना काल के बाद रोक लगा दिया गया।
आठ जून तक गोमतीनगर छपरा कचहरी एक्सप्रेस ट्रेन भी निरस्त कर दी गई है। ऐसे में यात्रियों की मुश्किल बढ़ गई है। सुकदेव रौनियार, छोटेलाल वर्मा, राहुल सोनी आदि कहते हैं कि यातायात की सुविधा से ही व्यापार को बढ़ावा मिलता है, लेकिन इस क्षेत्र में ऐसा नहीं है। लंबी दूरी की ट्रेनों का संचालन न होने के कारण यहां का कारोबार प्रभावित हो रहा है। लंबी दूरी की यात्रा करने वाले लोग परेशान हैं। अशोक वर्मा, जयंत गुप्ता, विजय मोदनवाल, बैजनाथ मद्धेशिया आदि का कहना है कि जब तक इस रूट पर लंबी दूरी की ट्रेनों का संचालन नहीं होगा, तब तक यातायात की समस्या दूर नहीं होगी।
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कप्तानगंज-थावे रूट पर कोरोना काल से पहले चलती थीं स्पेशल ट्रेनें
तमकुहीरोड(कुशीनगर)। कप्तानगंज-थावे रेलमार्ग का अमान परिवर्तन हुए एक दशक से अधिक समय हो गया, लेकिन लंबी दूरी की ट्रेनों का स्थायी रूप से संचालन नहीं हो पाया। पहले ग्रीष्मकालीन स्पेशल के नाम पर कुछ ट्रेनें चलती थीं, लेकिन उन्हें भी बंद कर दिया गया।
25 अक्तूबर 2010 को पूर्वोत्तर रेलवे की तरफ से थावे से कप्तानगंज तक अमान परिवर्तन के लिए मेगा ब्लॉक लिया गया था तो लोगों को उम्मीद जागी थी कि बड़ी लाइन में परिवर्तन हो जाने के बाद इस रेलमार्ग का कायाकल्प हो जाएगा। लंबी दूरी की ट्रेनों के चलाए जाने से यात्रा के साथ-साफ व्यापार भी फलने-फूलने लगेगा। 16 दिसंबर 2011 को अमान परिवर्तन के बाद इसे ट्रेनों के संचालन के लिए खोल दिया गया, लेकिन अब तक लंबी दूरी की ट्रेन का संचालन नहीं हो सका है। पहले समर स्पेशल, मेला स्पेशल, पूजा स्पेशल के नाम पर गोरखपुर जम्मूतवी एक्सप्रेस, काठगोदाम हावड़ा एक्सप्रेस, छपरा ग्वालियर एक्सप्रेस, आनंद एक्सप्रेस, गोरखपुर कोलकाता एक्सप्रेस जैसी लंबी दूरी की साप्ताहिक ट्रेनें चलती थीं। उस पर भी कोरोना काल के बाद रोक लगा दिया गया।
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आठ जून तक गोमतीनगर छपरा कचहरी एक्सप्रेस ट्रेन भी निरस्त कर दी गई है। ऐसे में यात्रियों की मुश्किल बढ़ गई है। सुकदेव रौनियार, छोटेलाल वर्मा, राहुल सोनी आदि कहते हैं कि यातायात की सुविधा से ही व्यापार को बढ़ावा मिलता है, लेकिन इस क्षेत्र में ऐसा नहीं है। लंबी दूरी की ट्रेनों का संचालन न होने के कारण यहां का कारोबार प्रभावित हो रहा है। लंबी दूरी की यात्रा करने वाले लोग परेशान हैं। अशोक वर्मा, जयंत गुप्ता, विजय मोदनवाल, बैजनाथ मद्धेशिया आदि का कहना है कि जब तक इस रूट पर लंबी दूरी की ट्रेनों का संचालन नहीं होगा, तब तक यातायात की समस्या दूर नहीं होगी।
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