{"_id":"5921c9424f1c1b3e6a536018","slug":"no-feciliy-in-dinapatti-village","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुविधाओं से महरूम है दीनापट्टी गांव ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सुविधाओं से महरूम है दीनापट्टी गांव
kushinagar
Updated Sun, 21 May 2017 10:37 PM IST
विज्ञापन
समस्या
- फोटो : amarujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
तुर्कपट्टी।
मुसहर जाति के लोगों को लेकर चिंतित रहने वाले सूबे के मुख्यमंत्री के आगमन की खबर के बाद प्रशासन को मुसहरों की सुध आई है। कल तक मूलभूत आवश्यकताओं से महरूम इस जाति के लोगों के लिए अफसर रात दिन एक कर दिए हैं। घर-घर तथा गांव की गलियों में घूमकर सड़क, नाली, आवास, राशन आदि की समीक्षा की जा रही है, लेकिन इसी क्षेत्र के दीनापट्टी गांव के मुसहरों की दीन-हीन दशा की तरफ अफसरों का ध्यान नहीं है।
25 मई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कार्यक्रम कसया तहसील क्षेत्र के मैनपुर गांव स्थित दीनापट्टी की मुसहर बस्ती में प्रस्तावित है। इस गांव में शनिवार से ही अफसरों की चहल-पहल बढ़ गई है। कल तक यहां निवास कर रहे 112 मुसहर परिवार सरकारी सुविधाओं से महरूम थे।
इस गांव की चिंता, मनोरमा, किशनावती, सुगिया, मीना, जगदीश, हरकेश, प्रमोद आदि के पास एक अदद राशनकार्ड तक नहीं है। इन्हें कोटेदार से राशन नहीं मिलता, जबकि ये सभी भूमिहीन हैं। आमतौर पर अंत्योदय कार्डधारकों को 20 किलोग्राम चावल तथा 15 किलोग्राम गेहूं प्रतिमाह दिया जाना है, लेकिन रामअवध, पानमती, केसरी आदि को दस किलो अनाज भी नहीं मिलता। यहां के 112 परिवारों में से 41 मुसहर जाति के लोगों के पास केवल एक-एक झोपड़ी है। इसमें लालबहादुर, मोती, बनारसी, बिग्गू, जोन्हिया, मालती सहित कुछ ऐसे लोग हैं, जिनका परिवार बड़ा है। इस कारण उन्हें खुले आसमान के नीचे सर्दी, गर्मी और बरसात में रात काटने की विवशता है।
विज्ञापन
केंद्र और राज्य सरकार स्वच्छता को लेकर लाखों रुपये खर्च कर रही है। फिर भी इन मुसहरों के पास एक शौचालय तक नहीं है। लोग खुले में शौच करने को विवश हैं। बरसात के दिनों में इनके घरों में भी पानी घुस जाता है। नाली नहीं बनी है। 100 मीटर इंटरलाकिंग के अलावा मुसहरों के घर तक की सड़क भी कच्ची है। इस गांव के निकट एक नहर भी है, लेकिन न तो उसकी कभी सफाई हुई और न हीं उसमें पानी आता है। केंद्र सरकार की उज्ज्वला योजना का लाभ भी यहां केवल 12 परिवारों को मिला है। शेष लोग नदी के किनारे से लकड़ी और सूखी घास चुनकर भोजन बनाने को विवश हैं। 112 मुसहर परिवारों के सापेक्ष केवल छह इंडिया मार्का हैंडपंप है, शेष साधारण हैंडपंप से पानी पीने को विवश हैं।
शनिवार को कमिश्नर अनिल कुमार, डीएम आंद्रा वामसी, एसपी जमुना प्रसाद, एसडीएम श्रीप्रकाश शुक्ल आदि मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर कई बिंदुओं पर चर्चा करते दिखे। वहीं, गांव के सेक्रेटरी मुसहरों के घर-घर जाकर निर्धारित बिंदुओं पर आंकड़ा इक ट्ठा करने में लगे रहे। उसके पहले शनिवार को हियुवा का एक दल उपाध्यक्ष ओमप्रकाश वर्मा की अगुवाई में अफसरों के कार्यों के विपरीत मुसहरों की वास्तविक तस्वीर मुख्यमंत्री के सामने रखने के लिए आंकड़े इकट्ठा करते दिखे थे। उनका जोर मुसहरों को उनकी मूलभूत आवश्यकताओं पर था, जो शासन से उपलब्ध तो है, लेकिन उन्हें नहीं मिलता।
विज्ञापन
मुसहर जाति के लोगों को लेकर चिंतित रहने वाले सूबे के मुख्यमंत्री के आगमन की खबर के बाद प्रशासन को मुसहरों की सुध आई है। कल तक मूलभूत आवश्यकताओं से महरूम इस जाति के लोगों के लिए अफसर रात दिन एक कर दिए हैं। घर-घर तथा गांव की गलियों में घूमकर सड़क, नाली, आवास, राशन आदि की समीक्षा की जा रही है, लेकिन इसी क्षेत्र के दीनापट्टी गांव के मुसहरों की दीन-हीन दशा की तरफ अफसरों का ध्यान नहीं है।
25 मई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कार्यक्रम कसया तहसील क्षेत्र के मैनपुर गांव स्थित दीनापट्टी की मुसहर बस्ती में प्रस्तावित है। इस गांव में शनिवार से ही अफसरों की चहल-पहल बढ़ गई है। कल तक यहां निवास कर रहे 112 मुसहर परिवार सरकारी सुविधाओं से महरूम थे।
विज्ञापन
इस गांव की चिंता, मनोरमा, किशनावती, सुगिया, मीना, जगदीश, हरकेश, प्रमोद आदि के पास एक अदद राशनकार्ड तक नहीं है। इन्हें कोटेदार से राशन नहीं मिलता, जबकि ये सभी भूमिहीन हैं। आमतौर पर अंत्योदय कार्डधारकों को 20 किलोग्राम चावल तथा 15 किलोग्राम गेहूं प्रतिमाह दिया जाना है, लेकिन रामअवध, पानमती, केसरी आदि को दस किलो अनाज भी नहीं मिलता। यहां के 112 परिवारों में से 41 मुसहर जाति के लोगों के पास केवल एक-एक झोपड़ी है। इसमें लालबहादुर, मोती, बनारसी, बिग्गू, जोन्हिया, मालती सहित कुछ ऐसे लोग हैं, जिनका परिवार बड़ा है। इस कारण उन्हें खुले आसमान के नीचे सर्दी, गर्मी और बरसात में रात काटने की विवशता है।
विज्ञापन
केंद्र और राज्य सरकार स्वच्छता को लेकर लाखों रुपये खर्च कर रही है। फिर भी इन मुसहरों के पास एक शौचालय तक नहीं है। लोग खुले में शौच करने को विवश हैं। बरसात के दिनों में इनके घरों में भी पानी घुस जाता है। नाली नहीं बनी है। 100 मीटर इंटरलाकिंग के अलावा मुसहरों के घर तक की सड़क भी कच्ची है। इस गांव के निकट एक नहर भी है, लेकिन न तो उसकी कभी सफाई हुई और न हीं उसमें पानी आता है। केंद्र सरकार की उज्ज्वला योजना का लाभ भी यहां केवल 12 परिवारों को मिला है। शेष लोग नदी के किनारे से लकड़ी और सूखी घास चुनकर भोजन बनाने को विवश हैं। 112 मुसहर परिवारों के सापेक्ष केवल छह इंडिया मार्का हैंडपंप है, शेष साधारण हैंडपंप से पानी पीने को विवश हैं।
शनिवार को कमिश्नर अनिल कुमार, डीएम आंद्रा वामसी, एसपी जमुना प्रसाद, एसडीएम श्रीप्रकाश शुक्ल आदि मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर कई बिंदुओं पर चर्चा करते दिखे। वहीं, गांव के सेक्रेटरी मुसहरों के घर-घर जाकर निर्धारित बिंदुओं पर आंकड़ा इक ट्ठा करने में लगे रहे। उसके पहले शनिवार को हियुवा का एक दल उपाध्यक्ष ओमप्रकाश वर्मा की अगुवाई में अफसरों के कार्यों के विपरीत मुसहरों की वास्तविक तस्वीर मुख्यमंत्री के सामने रखने के लिए आंकड़े इकट्ठा करते दिखे थे। उनका जोर मुसहरों को उनकी मूलभूत आवश्यकताओं पर था, जो शासन से उपलब्ध तो है, लेकिन उन्हें नहीं मिलता।