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18 ग्राम पंचायतों में एसटी का प्रमाण पत्र किसी के पास नहीं

Sat, 20 Feb 2021 11:45 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 20 Feb 2021 11:45 PM IST
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No certificate of ST in 18 gram panchayats
18 ग्राम पंचायतों में एसटी का प्रमाण पत्र किसी के पास नहीं
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- इस बार 39 ग्राम पंचायतों में प्रधान का पद अनुसूचित जनजाति के लिए होगा आरक्षित
- पिछले चुनाव में भी 40 ग्राम पंचायतें इस श्रेणी में थीं आरक्षित
- जाति प्रमाण पत्र नहीं होने के चलते चुनाव लड़ने के लिए नहीं मिलेंगे उम्मीदवार
अमर उजाला ब्यूरो
पडरौना। अनुसूचित जनजाति के लिए 39 ग्राम पंचायतों में प्रधान का पद आरक्षित करने का प्रस्ताव है। लेकिन प्रस्तावित 39 में से 18 ग्राम पंचायतों में किसी व्यक्ति के पास अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र ही नहीं है। पिछली बार भी 12 ग्राम पंचायतों में एसटी श्रेणी का उम्मीदवार नहीं होने के चलते ग्राम प्रधान का पद रिक्त रह गया था। प्रशासन ने इसकी रिपोर्ट भेजकर शासन से दिशा निर्देश मांगा है।
जिले में इस बार 1003 ग्राम पंचायतें हैं। जनगणना 2011 की जिस रिपोर्ट के आधार पर पंचायत चुनाव हो रहा है, उसने आरक्षण को लेकर एक बड़ी समस्या खड़ी कर दी है। जनगणना के आंकड़ों के आधार पर इस बार भी 39 ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधान का पद अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हो रहा है। आरक्षण से पहले प्रस्तावित गांवों में अनुसूचित जनजाति के प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराया गया। इनमें से दल बहादुर छपरा, जंगल चौरिया, परगना छपरा, बिहार खुर्द, परसौन व रामपुर पट्टी समेत 18 ऐसी ग्राम पंचायतें चिन्हित की गईं जहां अभी तक अनुसूचित जनजाति का एक भी प्रमाण पत्र किसी को जारी ही नहीं हुआ है। इन गांवों में रहने वाले किसी व्यक्ति ने इस श्रेणी के जाति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन भी नहीं किया है। ऐसी दशा में अगर इन गांवों में प्रधान या किसी अन्य पद पर अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण तय होता है तो वहां उम्मीदवार ही नहीं मिलेंगे। डीपीआरओ राघवेंद्र द्विवेदी का कहना है कि पंचायतीराज विभाग ने इसकी रिपोर्ट भी शासन को भेजी है। वहां से अगर कोई दिशा निर्देश जारी होता है तो इस मामले पर विचार किया जाएगा।
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पिछली बार भी रिक्त रह गई थीं 12 सीटें
जनगणना रिपोर्ट के आधार पर हुए आरक्षण के चलते वर्ष 2015 के पंचायत चुनाव में भी 40 सीटें अनुसूचित जनजाति श्रेणी के लिए आरक्षित थीं, लेकिन कई गांवों में उम्मीदवार ही नहीं मिले। दो बार उप चुनाव होने पर कुछ ग्राम पंचायतों में महिलाओं ने देवरिया से अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र निर्गत कराकर चुनाव लड़ा। इसके बाद भी 12 ग्राम पंचायतों में प्रधान पद का चुनाव नहीं हो पाया और वहां बाद में एडीओ पंचायत को प्रशासक नामित करना पड़ा था।
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संख्या है लेकिन लोगों का पता नहीं
जनगणना रिपोर्ट के आधार पर जिन ग्राम पंचायतों में अनुसूचित जनजाति की संख्या दर्शायी गई है, वहां इस श्रेणी का किसी के पास जाति प्रमाण पत्र ही नहीं है। उदाहरण के तौर पर सेवरही ब्लाक के परसौन गांव में एसटी श्रेणी की संख्या 257, तमकुहीराज ब्लाक के बिहार खुर्द में 454, विशुनपुरा ब्लाक के परगनछपरा में 169 दर्शायी गई है, लेकिन इस गांव में किसी के पास अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र नहीं पाया गया है। पिछले पंचायत चुनाव में पडरौना ब्लाक के चौपरिया गांव को अनुसूचित जनजाति श्रेणी के लिए आरक्षित किया गया था, परंतु तीन बार हुए उप चुनाव में भी उम्मीदवार नहीं मिलने के चलते ग्राम प्रधान का पद रिक्त रह गया और पांच साल तक एडीओ पंचायत ही प्रशासक बने रहे। इस बार भी लोग आरक्षण की आशंका से सहमे हुए हैं।
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