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Kushinagar News: जांच का इंतजाम न निगरानी का...करोड़ाें का धंधा ‘शुद्ध’ पानी का

Thu, 28 Nov 2024 11:53 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Thu, 28 Nov 2024 11:53 PM IST
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No arrangement for investigation, no monitoring... business worth crores of 'pure' water
पडरौना। पनीर और मिठाई में मिलावट कर मोटा मुनाफा कमाने का खेल तो आम बात है, मगर पानी के जरिए मोटा मुनाफा कमाने का खेल भी चल रहा है। मांगलिक कार्यक्रम में भी इनकी जबरदस्त मांग है। ऐसे में बिना गुणवत्ता का ध्यान रखे ही पीने जार में भरकर सप्लाई किया जा रहा है। पानी की गुणवत्ता की न तो जांच हो रही है और न ही किसी का ध्यान ही इस पर जा रहा है।
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सूत्रों की मानें तो मानक के अनुसार पानी नहीं दिया जा रहा है। इसका असर लोगों के सेहत पर पड़ रहा है। शहर में 50 से अधिक आरओ प्लांट संचालित हो रहे हैं। अभी 14 दिसंबर तक शहर और आसपास के क्षेत्रों में दो हजार से अधिक वैवाहिक कार्यक्रम कार्यक्रम होने हैं। ऐसे में केवल सहालग के दौरान आरओ प्लांट से शुद्ध पानी का कारोबार करीब तीन करोड़ का होने का अनुमान है। लेकिन, लोगों को मिला पानी कितना शुद्ध है, इसकी गारंटी नहीं है। आश्चर्य की बात तो यह है कि इसका सुधि लेने वाला भी कोई नहीं है।
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लोगों के घरों में दूषित पानी आने से सामान्य दिनों के अलावा सहालग में साफ जार का पानी पीने का चलन पहले से काफी बढ़ गया है। आरओ पानी के नाम पर चल रहे करोड़ों रुपये का यह कारोबार सहालग के दिनों में काफी बढ़ जाता है। एक अनुमान के अनुसार एक वैवाहिक कार्यक्रम में करीब तीन हजार रुपये पानी वाले लेते हैं।
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अभी 14 दिसंबर तक सहालग है। इस दौरान शहर में करीब दो हजार शादियां होंगी। इस तरह करीब तीन करोड़ रुपये से अधिक स्वच्छ पानी के नाम पर खर्च हो जाएंगे। आरओ प्लांट की तरफ से आयोजकों को उपलब्ध कराए गए पानी का जार आयोजन समाप्त होने के बाद जार को मैरिज हाल में ही बेतरतीब रख दिया जाता है।

उसमें स्वच्छता का ख्याल आदि नहीं रखा जाता है। नियम कानून के पेंच में आरओ प्लांट की जांच भी नहीं हो पाती है। इसके चलते आरओ प्लांट संचालक अपने धंधे को बड़े ही आसानी से संचालित करते हैं। सूत्रों के अनुसार, शहर में संचालित आरओ प्लांट का कोई लाइसेंस नहीं है।
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