{"_id":"64eb960c6f244579ff0d547b","slug":"nh-727-incomplete-kushinagar-news-c-205-1-sgkp1014-3668-2023-08-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kushinagar News: एनएच-727 छह किलोमीटर तक अधूरा, बरसात में बढ़ीं राहगीरों की दुश्वारियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kushinagar News: एनएच-727 छह किलोमीटर तक अधूरा, बरसात में बढ़ीं राहगीरों की दुश्वारियां
Sun, 27 Aug 2023 11:59 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sun, 27 Aug 2023 11:59 PM IST
विज्ञापन
फोटो है।- कुशीनगर से बिहार और नेपाल को जोड़ता है एनएच-727
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में छह किलोमीटर तक अधूरी छोड़ दी गई है सड़क
संवाद न्यूज एजेंसी
खड्डा। कुशीनगर से बिहार तथा नेपाल को जोड़ने वाले अति महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग-727 के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के अंदर का छह किलोमीटर हिस्सा करीब 20 वर्षों से अधूरा है। इस हिस्से पर एलिवेटेड सड़क बनाने की कवायद भी ठंडे बस्ते में डाल दी गई है। वर्तमान में यह सड़क अनगिनत बड़े गड्ढों में तब्दील है। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कुशीनगर और बिहार को आपस में जोड़ने व नेपाल तक सड़क के रास्ते पहुंच बनाने के लिए गंडक नदी पर पनियहवा के पास सड़क पुल बनाया गया। पुल को 06 जून, 2002 को आवागमन के लिए खोल दिया गया। यह दोनों प्रदेशों के लोगों के लिए नई उपलब्धि थी। पूर्व से वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के जंगल के बीच से निकली इस सड़क से आवागमन शुरू हो गया।
बाद में कसया, पडरौना, पनियहवा पुल से सालिकपुर तक यूपी व आगे बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के जंगल के बीच से होते हुए बगहां, बेतिया सहित अन्य जगहों को जोड़ते हुए छपुआ तक लगभग 169 किलोमीटर लंबी सड़क को राष्ट्रीय राजमार्ग-28 बी घोषित कर दिया गया। उसे अब एनएच-727 कर दिया गया है। इस सड़क का यूपी सीमा से बिहार के मदनपुर मोड़ तक छह किलोमीटर का हिस्सा जंगल के अंदर से गुजरता है।
विज्ञापन
यह हिस्सा राष्ट्रीय राजमार्ग, वन विभाग और राज्य सरकार के बीच उलझ गया है। इस वजह से अब तक इसका निर्माण नहीं हो पाया। इसके पीछे कारण बताया जाता है कि वन विभाग नियम का हवाला देकर अनुमति नहीं दे रहा है। सड़क निर्माण न होने से डेढ़ सौ से ज्यादा गड्ढे बन गए हैं। उसमें बारिश का पानी भरा है। इस सड़क का प्रयोग कर लोग नेपाल तक जाते हैं।
दोनों प्रदेशों के लोग गंडक के दोनों तरफ बसे हैं, इसी सड़क से है आवागमन
बिहार प्रांत के पश्चिमी चंपारण जिले के बगहां अनुमंडल के चार प्रखंड गंडक नदी पार दायीं तरफ कुशीनगर जनपद से सटे हैं। वहां के लोगों को कोर्ट-कचहरी, सरकारी कार्य आदि के लिए बगहां, बेतिया आदि जगह जाने के लिए इसी सड़क का प्रयोग करना पड़ता है। इसी तरह कुशीनगर के खड्डा व महराजगंज के निचलौल तहसील क्षेत्र के दस से ज्यादा गांव नदी पार बायीं तरफ बसे हैं। वहां के लोगों को भी इसी सड़क का इस्तेमाल खड्डा, पडरौना, निचलौल, महराजगंज आदि जगह जाने के लिए करना पड़ता है। इन दिनों यहां के लोगों को भारी कठिनाई उठानी पड़ रही है।
थारू नेता ने भेजा है पत्र
बिहार के थारू कल्याण महासंघ के अध्यक्ष दीपनरायन ने केंद्र व राज्य सरकार को पत्र भेजकर सड़क मरम्मत की मांग की है। उन्होंने बताया है कि केंद्र सरकार ने आदिवासी समुदायों के हित के लिए वनाधिकार अधिनियम बनाया है। इसे बिहार सरकार ने स्वीकार किया है। इस कानून के तहत जनता को आवागमन के लिए रोका नहीं जा सकता है। उनका कहना है कि इसी जंगल के क्षेत्र में कई सड़कें बन रही हैं या पहले से चली आ रही हैं। ऐसे में इस महत्वपूर्ण सड़क का निर्माण रोकना जनता व आदिवासी समुदाय के साथ अन्याय है।
बगहा के सांसद ने सदन में उठाया था मामला
पिछले वर्ष 04 अगस्त 2022 को बगहां के सांसद सुनील कुमार ने लोकसभा सवाल उठाया था। उनके पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्र सरकार का जवाब था कि राज्य वन विभाग इस हिस्से के चौड़ीकरण आदि की अनुमति नहीं दे रहा है। इसी जवाब में कहा गया था कि सालिकपुर से बगहां तक एक वैकल्पिक मार्ग बनाने पर कार्य चल रहा है। हालांकि, वैकल्पिक मार्ग की सुगबुगाहट इस क्षेत्र में नहीं दिखाई दे पाई है।
वन विभाग की तरफ से सड़क पर आवागमन बंद करने की उठी थी अफवाह
पिछले वर्ष यह अफवाह फैल गई थी कि वन विभाग इस सड़क को बंद कर देगा। हालांकि, यह पूरी तरह अफवाह साबित हुआ। उस समय खड्डा विधायक विवेकानंद पांडेय व वाल्मीकि नगर विधायक धीरेंद्र प्रताप सिंह उर्फ रिंकू सिंह ने संयुक्त रूप से दिल्ली में केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी से मुलाकात की थी। उस समय यह सहमति बनी थी जंगल के ऊपर से एलिवेटेड सड़क (उपरगामी सेतु) बनाकर इस समस्या का समाधान करा दिया जाए। इसकी रूपरेखा के लिए अधिकारियों को निर्देशित भी किया गया था।
खड्डा विधायक ने कहा
विधायक विवेकानंद पांडेय का कहना है कि एलिवेटेड सड़क के लिए वाल्मीकि नगर विधायक रिंकू सिंह की ओर से बिहार सरकार से अनुमति प्राप्त करने का प्रयास चल रहा है। इस मामले में पुनः केंद्रीय मंत्री से मुलाकात करूंगा और इसके निर्माण की बात प्रमुखता से उठाई जाएगी। लोगों को हो रही दिक्कत से अवगत कराया जाएगा।
विज्ञापन
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में छह किलोमीटर तक अधूरी छोड़ दी गई है सड़क
संवाद न्यूज एजेंसी
खड्डा। कुशीनगर से बिहार तथा नेपाल को जोड़ने वाले अति महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग-727 के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के अंदर का छह किलोमीटर हिस्सा करीब 20 वर्षों से अधूरा है। इस हिस्से पर एलिवेटेड सड़क बनाने की कवायद भी ठंडे बस्ते में डाल दी गई है। वर्तमान में यह सड़क अनगिनत बड़े गड्ढों में तब्दील है। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कुशीनगर और बिहार को आपस में जोड़ने व नेपाल तक सड़क के रास्ते पहुंच बनाने के लिए गंडक नदी पर पनियहवा के पास सड़क पुल बनाया गया। पुल को 06 जून, 2002 को आवागमन के लिए खोल दिया गया। यह दोनों प्रदेशों के लोगों के लिए नई उपलब्धि थी। पूर्व से वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के जंगल के बीच से निकली इस सड़क से आवागमन शुरू हो गया।
विज्ञापन
बाद में कसया, पडरौना, पनियहवा पुल से सालिकपुर तक यूपी व आगे बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के जंगल के बीच से होते हुए बगहां, बेतिया सहित अन्य जगहों को जोड़ते हुए छपुआ तक लगभग 169 किलोमीटर लंबी सड़क को राष्ट्रीय राजमार्ग-28 बी घोषित कर दिया गया। उसे अब एनएच-727 कर दिया गया है। इस सड़क का यूपी सीमा से बिहार के मदनपुर मोड़ तक छह किलोमीटर का हिस्सा जंगल के अंदर से गुजरता है।
विज्ञापन
यह हिस्सा राष्ट्रीय राजमार्ग, वन विभाग और राज्य सरकार के बीच उलझ गया है। इस वजह से अब तक इसका निर्माण नहीं हो पाया। इसके पीछे कारण बताया जाता है कि वन विभाग नियम का हवाला देकर अनुमति नहीं दे रहा है। सड़क निर्माण न होने से डेढ़ सौ से ज्यादा गड्ढे बन गए हैं। उसमें बारिश का पानी भरा है। इस सड़क का प्रयोग कर लोग नेपाल तक जाते हैं।
दोनों प्रदेशों के लोग गंडक के दोनों तरफ बसे हैं, इसी सड़क से है आवागमन
बिहार प्रांत के पश्चिमी चंपारण जिले के बगहां अनुमंडल के चार प्रखंड गंडक नदी पार दायीं तरफ कुशीनगर जनपद से सटे हैं। वहां के लोगों को कोर्ट-कचहरी, सरकारी कार्य आदि के लिए बगहां, बेतिया आदि जगह जाने के लिए इसी सड़क का प्रयोग करना पड़ता है। इसी तरह कुशीनगर के खड्डा व महराजगंज के निचलौल तहसील क्षेत्र के दस से ज्यादा गांव नदी पार बायीं तरफ बसे हैं। वहां के लोगों को भी इसी सड़क का इस्तेमाल खड्डा, पडरौना, निचलौल, महराजगंज आदि जगह जाने के लिए करना पड़ता है। इन दिनों यहां के लोगों को भारी कठिनाई उठानी पड़ रही है।
थारू नेता ने भेजा है पत्र
बिहार के थारू कल्याण महासंघ के अध्यक्ष दीपनरायन ने केंद्र व राज्य सरकार को पत्र भेजकर सड़क मरम्मत की मांग की है। उन्होंने बताया है कि केंद्र सरकार ने आदिवासी समुदायों के हित के लिए वनाधिकार अधिनियम बनाया है। इसे बिहार सरकार ने स्वीकार किया है। इस कानून के तहत जनता को आवागमन के लिए रोका नहीं जा सकता है। उनका कहना है कि इसी जंगल के क्षेत्र में कई सड़कें बन रही हैं या पहले से चली आ रही हैं। ऐसे में इस महत्वपूर्ण सड़क का निर्माण रोकना जनता व आदिवासी समुदाय के साथ अन्याय है।
बगहा के सांसद ने सदन में उठाया था मामला
पिछले वर्ष 04 अगस्त 2022 को बगहां के सांसद सुनील कुमार ने लोकसभा सवाल उठाया था। उनके पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्र सरकार का जवाब था कि राज्य वन विभाग इस हिस्से के चौड़ीकरण आदि की अनुमति नहीं दे रहा है। इसी जवाब में कहा गया था कि सालिकपुर से बगहां तक एक वैकल्पिक मार्ग बनाने पर कार्य चल रहा है। हालांकि, वैकल्पिक मार्ग की सुगबुगाहट इस क्षेत्र में नहीं दिखाई दे पाई है।
वन विभाग की तरफ से सड़क पर आवागमन बंद करने की उठी थी अफवाह
पिछले वर्ष यह अफवाह फैल गई थी कि वन विभाग इस सड़क को बंद कर देगा। हालांकि, यह पूरी तरह अफवाह साबित हुआ। उस समय खड्डा विधायक विवेकानंद पांडेय व वाल्मीकि नगर विधायक धीरेंद्र प्रताप सिंह उर्फ रिंकू सिंह ने संयुक्त रूप से दिल्ली में केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी से मुलाकात की थी। उस समय यह सहमति बनी थी जंगल के ऊपर से एलिवेटेड सड़क (उपरगामी सेतु) बनाकर इस समस्या का समाधान करा दिया जाए। इसकी रूपरेखा के लिए अधिकारियों को निर्देशित भी किया गया था।
खड्डा विधायक ने कहा
विधायक विवेकानंद पांडेय का कहना है कि एलिवेटेड सड़क के लिए वाल्मीकि नगर विधायक रिंकू सिंह की ओर से बिहार सरकार से अनुमति प्राप्त करने का प्रयास चल रहा है। इस मामले में पुनः केंद्रीय मंत्री से मुलाकात करूंगा और इसके निर्माण की बात प्रमुखता से उठाई जाएगी। लोगों को हो रही दिक्कत से अवगत कराया जाएगा।