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Kushinagar News: आफत जैसी आई सूचना ने बढ़ाई बेचैनी...टाॅर्च की रोशनी में नदी को देखते रहे लोग

Fri, 28 Aug 2026 02:10 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 28 Aug 2026 02:10 AM IST
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News that struck like a calamity heightened the anxiety... people kept gazing at the river by torchlight.
एपी बांध पर बुधवार को रात निगरानी में जुटा प्रशासन।संवाद
कुशीनगर। नेपाल में भूस्खलन के बाद बाढ़ की आशंका को लेकर जारी अलर्ट की सूचना खड्डा और तमकुहीराज तहसील क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों के लिए किसी आफत जैसी रही। शिवपुर, मरचहवा, नारायनपुर, सालिकपुर, महादेवा आदि गांवों में पूरी रात दहशत का माहौल रहा। ग्रामीण टॉर्च के सहारे नदी के जलस्तर पर नजर रखे रहे। मोबाइल और फोन के जरिए भी लोग लगातार जानकारी लेते रहे। सुबह जलस्तर कम होने की सूचना से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली, लेकिन बृहस्पतिवार को बाढ़ की तबाही की आशंका को लेकर उनके चेहरे पर चिंता साफ दिख रही थी।
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सालिकपुर के जितेंद्र चौहान सोनू निषाद मुकेश साहनी ने बताया कि रात भर नदी के जलस्तर पर नजर बनाए रखी। मोबाइल से पानी की स्थिति की जानकारी लेते रहे। पानी बढ़ने की आशंका से रातभर नींद नहीं आई। सुबह पानी घटने की सूचना मिलने पर पर जान में जान आई। नथुनी ने बताया कि टॉर्च के सहारे नदी का जलस्तर देखते रहे। पानी घटने की खबर से राहत मिली है। लेकिन, नेपाल की स्थिति और गंडक नदी के जलस्तर को लेकर अब भी सतर्कता बनी हुई है।
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प्रशासन की ओर से ग्रामीणों से नदी और निचले इलाकों में अनावश्यक रूप से नहीं जाने की अपील की गई है। गांव के लोगों ने बताया कि हर साल बाढ़ के चलते हर साल घर गृहस्थी बर्बाद होती है, लेकिन स्थायी निजात के लिए प्रशासन की ओर से कोई पहल नहीं की जाती है। बुधवार को अलर्ट जारी होने के बाद खुद की जिंदगी के अलावा दरवाजे पर बंधे मवेशियों की चिंता सताने लगी। नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव हो रहा है, लेकिन अभी बाढ़ का खतरा नहीं टला है। इसके लिए नदी के किनारे महादेवा गांव में बांस की मदद से नदी का जलस्तर देखा जा रहा है।
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नदी में बह कर आ रही लकड़ियां, जान जोखिम में डालकर निकाल रहे लोग
-शीशम, सागौन, साखू और खैरा की लकड़ियों बटोरने की महदेवा-सालिकपुर में मची होड़, हर दरवाजे पर लगे ढेर
छितौनी। नेपाल में आई आफत के बाद गंडक नदी में बड़ी मात्रा में लकड़ियां बहकर आ रही हैं। नदी की धारा के साथ शीशम, सागौन, साखू और खैरा समेत कई कीमती लकड़ियां बहकर खड्डा तहसील क्षेत्र के महदेवा और सालिकपुर गांवों आ रही हैं। लकड़ियों को इकट्ठा करने के लिए ग्रामीण जान जोखिम में डालकर नदी में छलांग लगा रहे हैं।

महदेवा गांव में पुरुषों के साथ महिलाएं भी नदी तट पर जमी हुई हैं। नदी में जैसे ही कोई लकड़ी दिखाई देती है, उसे पकड़ने के लिए ग्रामीणों में होड़ मच जाती है। कई लोग नदी की तेज धारा के बीच जाकर लकड़ियों को खींचकर किनारे ला रहे हैं। इससे हादसे की आशंका भी बनी हुई है। महदेवा और सालिकपुर गांव में शायद ही कोई दरवाजा हो, जहां नदी से निकाली गई लकड़ियों का ढेर न लगा हो। इसमें सामान्य लकड़ियों के साथ शीशम, सागौन, साखू और खैरा जैसी बेशकीमती लकड़ियां भी शामिल हैं।
ग्रामीणों के लिए यह स्थिति एक तरह से आपदा में अवसर जैसी नजर आ रही है। हालांकि, यह जोखिम भरा है। नदी का बहाव तेज होने से जरा सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। प्रशासन की ओर से ग्रामीणों को नदी में न जाने देने और सुरक्षा को प्राथमिकता देने की जरूरत है।
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जलस्तर घटा...गंडक की तेज धार से बाढ़ का खौफ बरकरार
छितौनी। वाल्मीकिनगर बैराज से जलस्तर में कमी आने के बावजूद शिवपुर, मरीचहवा, नारायनपुर, सालिकपुर, महदेवा समेत बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों में बाढ़ का खौफ बरकरार है। नदी में पानी कम जरूर हुआ है लेकिन वेग अधिक है। जलस्तर में उतार-चढ़ाव से ग्रामीणों को दोबारा पानी बढ़ने की चिंता सता रही है।

शिवपुर के राकेश गुप्ता, कोमल यादव, अंबिका, राजेंद्र और मुमताज अंसारी ने बताया कि जलस्तर में कमी से राहत जरूर मिली है लेकिन नदी की तेज धार और उतार-चढ़ाव के कारण बाढ़ का डर खत्म नहीं हुआ है। ग्रामीण रात-दिन नदी की स्थिति पर नजर रख रहे हैं और किसी भी तरह की सूचना मिलने पर एक-दूसरे से संपर्क कर रहे हैं। अलर्ट के बीच बाढ़ प्रभावित सालिकपुर और महदेवा गांवों में प्रशासन की निगरानी व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है।
ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारियों की टीम रातभर सालिकपुर चौकी पर ही जमी रही और मोबाइल फोन से नदी के जलस्तर की जानकारी लेती रही। गांवों में जाने की जरूरत नहीं समझी। बाढ़ की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम के अलावा कसया एसडीएम विवेक मिश्रा और तमकुहीराज तहसीलदार महेश कुमार के नेतृत्व में पुलिस व राजस्व की टीमें तैनात की गई थीं। टीम रातभर सालिकपुर चौकी पर मौजूद रहकर जलस्तर और हालात की जानकारी लेती रही।
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अलर्ट जारी होने के बाद अधिकारी गांव में पहुंचकर ग्रामीणों की स्थिति जानने के बजाय चौकी से ही जलस्तर की जानकारी लेते रहे। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ का खतरा होने पर अधिकारियों को गांव में मौजूद रहकर लोगों का हाल जानना चाहिए। -रवि किशन, महदेवा

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गंडक नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के बीच गांवों में जाकर वास्तविक स्थिति का जायजा लेना जरूरी है। रात के समय नदी के तेज बहाव और संभावित खतरे को देखते हुए ग्रामीण प्रशासन से मौके पर मौजूद रहने की उम्मीद कर रहे थे। -जवाहिर भारती, महादेवा

एपी बांध पर बुधवार को रात निगरानी में जुटा प्रशासन।संवाद

एपी बांध पर बुधवार को रात निगरानी में जुटा प्रशासन।संवाद

एपी बांध पर बुधवार को रात निगरानी में जुटा प्रशासन।संवाद

एपी बांध पर बुधवार को रात निगरानी में जुटा प्रशासन।संवाद

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