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सोमालिया में बंधक बने मजदूर नीरज कुमार मुक्त होकर घर पहुंचे
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सोमालिया में बंधक बने मजदूर नीरज कुमार मुक्त होकर घर पहुंचे
अहिरौली बाजार (कुशीनगर)। विगत फरवरी से ही सोमालिया में एक कंपनी में बंधक बने अहिरौली बाजार थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत सिहुलिया निवासी नीरज कुमार विश्वकर्मा (24) शुक्रवार की देर शाम अपने घर पहुंच गए। भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के प्रयास से वापस अपने घर पहुंचे नीरज ने वहां के दुखद अनुभव साझा किया तो परिजनों की आंखें नम हो गईं।
रोजी-रोटी की तलाश में नीरज नौ मार्च- 2019 को सोमालिया गए थे। वहां स्थित सोम स्टील कंपनी में काम करने लगे। लगभग 11 माह तक काम ठीक चला लेकिन गत फरवरी में अचानक ही कंपनी ने वेतन देना बंद कर दिया। कंपनी के ही दो कर्मचारियों इब्राहिम और अब्दुल्ला ने बंधक बना लिया। बंधक बने नीरज कुमार सहित 11 लोगों को केवल एक वक्त का भोजन मिल पा रहा था। किसी तरह से इन लोगों ने भारतीय दूतावास से संपर्क किया तो अफसरों ने सभी को सुरक्षित अपने देश पहुंचाने का आश्वासन दिया। भारतीय दूतावास से लगातार संपर्क करने के बाद दूतावास के अफसरों ने सोमालिया सरकार से संपर्क किया। इसके बाद वहां के एक अफसर ने वेतन समेत वापसी का आश्वासन दिया। भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के प्रयास से 15 दिसंबर को सोमालिया से विमान से भारत भेजा गया।
17 दिसंबर को वे दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरे। वहां से बस द्वारा गोरखपुर होते हुए शुक्रवार की देर शाम घर पहुंच गए। नीरज कुमार ने बताया कि जब उन्हें सोमालिया ले जाया गया तो उनके पास वीजा नहीं था। उन्हें बताया गया था कि वहां कोई वीजा नहीं लगता है परंतु वहां पहुंचे लोगों को बाद में वीजा नहीं होने के आरोप में बंधक बनाकर काम कराया जाता है। नीरज की सुरक्षित घर वापसी पर मां सुमित्रा देवी, पिता सूर्य प्रकाश, छोटे भाई धीरज बेहद प्रफुल्लित नजर आए। इन लोगों ने भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के प्रति आभार जताया।
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अहिरौली बाजार (कुशीनगर)। विगत फरवरी से ही सोमालिया में एक कंपनी में बंधक बने अहिरौली बाजार थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत सिहुलिया निवासी नीरज कुमार विश्वकर्मा (24) शुक्रवार की देर शाम अपने घर पहुंच गए। भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के प्रयास से वापस अपने घर पहुंचे नीरज ने वहां के दुखद अनुभव साझा किया तो परिजनों की आंखें नम हो गईं।
रोजी-रोटी की तलाश में नीरज नौ मार्च- 2019 को सोमालिया गए थे। वहां स्थित सोम स्टील कंपनी में काम करने लगे। लगभग 11 माह तक काम ठीक चला लेकिन गत फरवरी में अचानक ही कंपनी ने वेतन देना बंद कर दिया। कंपनी के ही दो कर्मचारियों इब्राहिम और अब्दुल्ला ने बंधक बना लिया। बंधक बने नीरज कुमार सहित 11 लोगों को केवल एक वक्त का भोजन मिल पा रहा था। किसी तरह से इन लोगों ने भारतीय दूतावास से संपर्क किया तो अफसरों ने सभी को सुरक्षित अपने देश पहुंचाने का आश्वासन दिया। भारतीय दूतावास से लगातार संपर्क करने के बाद दूतावास के अफसरों ने सोमालिया सरकार से संपर्क किया। इसके बाद वहां के एक अफसर ने वेतन समेत वापसी का आश्वासन दिया। भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के प्रयास से 15 दिसंबर को सोमालिया से विमान से भारत भेजा गया।
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17 दिसंबर को वे दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरे। वहां से बस द्वारा गोरखपुर होते हुए शुक्रवार की देर शाम घर पहुंच गए। नीरज कुमार ने बताया कि जब उन्हें सोमालिया ले जाया गया तो उनके पास वीजा नहीं था। उन्हें बताया गया था कि वहां कोई वीजा नहीं लगता है परंतु वहां पहुंचे लोगों को बाद में वीजा नहीं होने के आरोप में बंधक बनाकर काम कराया जाता है। नीरज की सुरक्षित घर वापसी पर मां सुमित्रा देवी, पिता सूर्य प्रकाश, छोटे भाई धीरज बेहद प्रफुल्लित नजर आए। इन लोगों ने भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के प्रति आभार जताया।
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