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Kushinagar News: फर्जीवाड़ा कर मालिकान रजिस्टर में दर्ज किए गए नाम हुए खारिज
Fri, 14 Feb 2025 12:03 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Fri, 14 Feb 2025 12:03 AM IST
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खड्डा। फर्जी आदेश तैयार कर एआरओ कार्यालय गोरखपुर से परवाना जारी कर खड्डा तहसील के मालिकान रजिस्टर में मुर्दों का नाम दर्ज करने के बाद खतौनी में भी नाम दर्ज करने के लिए चला गया। रजिस्ट्रार-कानूनगो ने जांच की तो मामला फर्जी निकला।
रिपोर्ट के बाद तहसीलदार ने मालिकान रजिस्टर में फर्जी परवाना के आधार पर दर्ज नामों को खारिज करने का आदेश जारी कर दिया है। निष्पक्ष तरीके से इस मामले की जांच हो तो तहसील के कई जिम्मेदारों की गर्दन फंस सकती है। शिकायत मिलने के बाद शुरू हुई जांच में तहसील प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़ा होने लगा है।
एआरओ कोर्ट गोरखपुर के नाम से फर्जी आदेश व परवाना भेजने की आड़ में खड्डा तहसील के राजस्व अभिलेख में तहसील कर्मचारियों की मिलीभगत से कश्तकारों का नाम काटकर भू-माफियाओं का नाम दर्ज किया जा रहा है।
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गोरखपुर एआरओ कार्यालय से लेकर खड्डा तहसील तक इस फर्जीवाड़े का जाल फैला हुआ है। मामला उजागर होने के बाद तहसील के जिम्मेदारों में खलबली मच गई है। खुद का बचाव करने के लिए तहसील के जिम्मेदार इसमें शामिल कर्मचारियों को बचाने में जुट गए हैं।
अब जिम्मेदार अब तर्क दे रहे हैं कि ऑनलाइन पोर्टल पर मुकदमा नंबर की जांच की गई तो आदेश फर्जी मिला। ऐसे में सवाल उठता है कि मालिकान रजिस्टर में नाम दर्ज करने से पहले ऑनलाइन पोर्टल पर मुकदमा नंबर की जांच क्यों नहीं हुई। खड्डा तहसील के रजिस्ट्रार कानूनगो ने तहसीलदार को एक पत्र प्रेषित कर बताया है कि परवाना अमलदरामद के लिए सहायक अभिलेख अधिकारी गोरखपुर से आए पत्रांक संख्या 123/9 वर्ष (2023) 11 दिसंबर 2023, पत्रांक संख्या 121/9 (2023) 11 दिसंबर 2023 और पत्रांक संख्या 123/9 (2023) 12 दिसंबर वर्ष 2023 को उक्त तीनों का वाद संख्या आरसीसीएमएस पोर्टल पर सत्यापन किया गया तो ऐसा कोई मुकदमा दर्ज नहीं मिला। इससे यह साबित हुआ कि आदेश फर्जी है। यह आदेश मालिकान रजिस्टर पर दर्ज है। तहसीलदार ने दर्ज इंद्राज को निरस्त करने का आदेश दे दिया है। इस पत्रांक संख्या पर एक ही नंबर के परवाना जारी कर दिया गया है।
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रिपोर्ट के बाद तहसीलदार ने मालिकान रजिस्टर में फर्जी परवाना के आधार पर दर्ज नामों को खारिज करने का आदेश जारी कर दिया है। निष्पक्ष तरीके से इस मामले की जांच हो तो तहसील के कई जिम्मेदारों की गर्दन फंस सकती है। शिकायत मिलने के बाद शुरू हुई जांच में तहसील प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़ा होने लगा है।
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एआरओ कोर्ट गोरखपुर के नाम से फर्जी आदेश व परवाना भेजने की आड़ में खड्डा तहसील के राजस्व अभिलेख में तहसील कर्मचारियों की मिलीभगत से कश्तकारों का नाम काटकर भू-माफियाओं का नाम दर्ज किया जा रहा है।
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गोरखपुर एआरओ कार्यालय से लेकर खड्डा तहसील तक इस फर्जीवाड़े का जाल फैला हुआ है। मामला उजागर होने के बाद तहसील के जिम्मेदारों में खलबली मच गई है। खुद का बचाव करने के लिए तहसील के जिम्मेदार इसमें शामिल कर्मचारियों को बचाने में जुट गए हैं।
अब जिम्मेदार अब तर्क दे रहे हैं कि ऑनलाइन पोर्टल पर मुकदमा नंबर की जांच की गई तो आदेश फर्जी मिला। ऐसे में सवाल उठता है कि मालिकान रजिस्टर में नाम दर्ज करने से पहले ऑनलाइन पोर्टल पर मुकदमा नंबर की जांच क्यों नहीं हुई। खड्डा तहसील के रजिस्ट्रार कानूनगो ने तहसीलदार को एक पत्र प्रेषित कर बताया है कि परवाना अमलदरामद के लिए सहायक अभिलेख अधिकारी गोरखपुर से आए पत्रांक संख्या 123/9 वर्ष (2023) 11 दिसंबर 2023, पत्रांक संख्या 121/9 (2023) 11 दिसंबर 2023 और पत्रांक संख्या 123/9 (2023) 12 दिसंबर वर्ष 2023 को उक्त तीनों का वाद संख्या आरसीसीएमएस पोर्टल पर सत्यापन किया गया तो ऐसा कोई मुकदमा दर्ज नहीं मिला। इससे यह साबित हुआ कि आदेश फर्जी है। यह आदेश मालिकान रजिस्टर पर दर्ज है। तहसीलदार ने दर्ज इंद्राज को निरस्त करने का आदेश दे दिया है। इस पत्रांक संख्या पर एक ही नंबर के परवाना जारी कर दिया गया है।