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Kushinagar News: खेतों में लहलहाने लगी सरसों, बदलते मौसम में माहू कीट का बढ़ा खतरा
Fri, 17 Jan 2025 12:04 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Fri, 17 Jan 2025 12:04 AM IST
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तमकुहीरोड। सेवरही क्षेत्र में इस समय खेतों में सरसों की फसल लहलहा रही है। बदलते मौसम में सरसों की फसल पर माहू कीटों का खतरा बढ़ गया है। माहू कीट सरसों की कोमल पत्तियों व फूलों का रस चूस लेते हैं। इससे सरसों की कम पैदावार होती है।
देश में तेल की कीमतों में हो रही वृद्धि से अब सेवरही क्षेत्र में भी सरसों की खेती को बढ़ावा मिलने लगा है। इस समय सेवरही क्षेत्र के सुमही संतपट्टी, राजपुर खाश, बैजू पट्टी, दोमाठ, मिश्रौली, जगदीशपुर, तिवारी पट्टी, जोगनी, ब्रह्मपुर, गौरी नगर, पिरोजहा, जंगली पट्टी सहित अन्य गांवों में किसानों के खेतों में सरसों की फसल लहलहा रही है।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. केके साहू ने बताया कि जब सरसों में फूल आ जाते हैं तो फसल पर माहू कीट का खतरा बढ़ जाता है। एक से डेढ़ मिमी के आकार का माहू कीट सरसों के तनों पर आ जाते हैं और सरसों की कोमल पत्तियों व फूलों का रस चूस कर उन्हें कमजोर बना देते हैं। इससे उनका विकास रुक जाता है और सरसों की फलियां न बनने से पैदावार कम हो जाती है।
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करें जैव कीटनाशक का प्रयोग : डॉ. विनय कुमार
पादप वैज्ञानिक डॉ. विनय कुमार मिश्र का कहना है कि सामान्य तौर पर किसान माहू के प्रकोप से सरसों की फसल को बचाने के लिए कीटनाशकों का इस्तेमाल करते हैं, जो उचित नहीं है। इससे सरसों की फसल पर परागण के लिए आने वाली मधुमक्खियों व मित्र कीटों की सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है। माहू कीट से सरसों की फसल को बचाने के लिए किसानों को जैव कीटनाशक नीम के तेल का स्प्रे करना चाहिए। ऐसा करके माहू कीट के बचाव के साथ मधुमक्खियों व मित्र कीटों को सुरक्षित रखा जा सकता है।
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देश में तेल की कीमतों में हो रही वृद्धि से अब सेवरही क्षेत्र में भी सरसों की खेती को बढ़ावा मिलने लगा है। इस समय सेवरही क्षेत्र के सुमही संतपट्टी, राजपुर खाश, बैजू पट्टी, दोमाठ, मिश्रौली, जगदीशपुर, तिवारी पट्टी, जोगनी, ब्रह्मपुर, गौरी नगर, पिरोजहा, जंगली पट्टी सहित अन्य गांवों में किसानों के खेतों में सरसों की फसल लहलहा रही है।
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कृषि वैज्ञानिक डॉ. केके साहू ने बताया कि जब सरसों में फूल आ जाते हैं तो फसल पर माहू कीट का खतरा बढ़ जाता है। एक से डेढ़ मिमी के आकार का माहू कीट सरसों के तनों पर आ जाते हैं और सरसों की कोमल पत्तियों व फूलों का रस चूस कर उन्हें कमजोर बना देते हैं। इससे उनका विकास रुक जाता है और सरसों की फलियां न बनने से पैदावार कम हो जाती है।
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करें जैव कीटनाशक का प्रयोग : डॉ. विनय कुमार
पादप वैज्ञानिक डॉ. विनय कुमार मिश्र का कहना है कि सामान्य तौर पर किसान माहू के प्रकोप से सरसों की फसल को बचाने के लिए कीटनाशकों का इस्तेमाल करते हैं, जो उचित नहीं है। इससे सरसों की फसल पर परागण के लिए आने वाली मधुमक्खियों व मित्र कीटों की सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है। माहू कीट से सरसों की फसल को बचाने के लिए किसानों को जैव कीटनाशक नीम के तेल का स्प्रे करना चाहिए। ऐसा करके माहू कीट के बचाव के साथ मधुमक्खियों व मित्र कीटों को सुरक्षित रखा जा सकता है।