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Kushinagar News: एपी बांध की मरम्मतत के लिए डंपर व ट्रालियों का आवागमन बढ़ा, टूट रही सड़क
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बोल्डर, मिट्टी और बोरियां पहुंचा रहे डंपर और ट्रैक्टर ट्रॉली, नौ साल में नहीं हुआ मरम्मत
जवही दयाल से अहिरौलीदान तक छह किमी एपी बांध पर बढ़ा वाहनों का आवागमन
पडरौना। एपी तटबंध टूटने के बाद उसे बचाने और दोबारा मजबूत करने की कवायद चल रही है। टूटे हिस्से तक बोल्डर, मिट्टी और बोरियों की खेप पहुंचाने के लिए जवही दयाल से अहिरौलीदान तक करीब छह किलोमीटर लंबे एपी बांध के रास्ते पर डंपर और ट्रालियों का आवागमन बढ़ गया है। इससे पहले से जर्जर मुख्य बांध की सड़क अब जगह-जगह टूटने और धंसने लगी है।
एपी बांध की सड़क पर कई स्थानों पर गहरे गड्ढे हो गए हैं। सड़क की ऊपरी परत उखड़ गई है तो कहीं किनारे की मिट्टी दबकर नीचे बैठ गई है। भारी वाहनों के पहियों के निशान भी सड़क पर साफ दिखाई दे रहे हैं। इसी रास्ते से बोल्डर और मिट्टी लेकर वाहन एपी तटबंध के मरम्मत स्थल के रास्ते अहिरौलीदान के नवीन कटान स्थल तक पहुंच रहे हैं। क्षेत्र के लोगों का आरोप है कि पिछले नौ सालों में बंधे पर बनी सड़कों की मरम्मत नहीं हो सकी है, इसके लिए चलते आवागमन में लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
पहले सेवरही, पिपराघाट होते हुए इस बंधे पर लोग अहिरौलीदान होते हुए गोपालगंज जिले में अपने रिश्तेदारों के घर या निजी काम से आते-जाते थे। बाढ़ आने के बाद इस बांध पर डंपरों के द्वारा कटान स्थल पर मिट्टी, बोल्डर लेकर पहुंचाया जा रहा है। इससे बांध सड़क क्षतिग्रस्त हो रही है।
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मरम्मत सामग्री पहुंचाना यही मुख्य रास्ता
एपी तटबंध के टूटे हिस्से की मरम्मत के लिए बड़ी मात्रा में बोल्डर और मिट्टी पहुंचाने का यही मुख्य रास्ता है। इसी वजह से बांध की सड़क पर डंपरों की आवाजाही बढ़ी है। इसके अलावा अब नई जिम्मेदारी अहिरौली दान में भी जरूरी मैटेरियल पहुंचाना है। जवही दयाल से आगे बढ़ने पर बाघ भवानी, बाघाचौर और अहिरौलीदान की ओर सड़क कई जगह खराब मिलती है। बारिश और पहले से जर्जर स्थिति के बीच लगातार भारी वाहनों की आवाजाही से रास्ते पर आवागमन और मुश्किल हो गया है।
बांध की मरम्मत के साथ रास्ते को बचाने की चुनौती
फिलहाल विभाग की प्राथमिकता टूटे एपी तटबंध को सुरक्षित करना है। इसके लिए दिन-रात काम चल रहा है। लेकिन मरम्मत स्थल तक पहुंचने के लिए जिस मुख्य बांध की सड़क का इस्तेमाल हो रहा है, उसकी खराब होती स्थिति भी चिंता बढ़ा रही है। एक तरफ टूटे तटबंध को बचाने के लिए भारी मात्रा में सामग्री पहुंचानी है, दूसरी तरफ इसी काम के लिए इस्तेमाल हो रही सड़क लगातार दबाव झेल रही है। ऐसे में अब बांध की मरम्मत के साथ इस रास्ते की स्थिति संभालना भी चुनौती बन गया है। टूटे एपी तटबंध के आसपास मिट्टी भराई का काम शुरू कर दिया गया है। रिंग बांध के तैयार होने के बाद मरम्मत स्थल तक वाहनों की पहुंच पहले की तुलना में आसान हुई है।
वर्जन
फिलहाल एपी तटबंध को सामान्य विधि से तैयार किया जा रहा है। इसमें कोई नई तकनीक इस्तेमाल नहीं की जा रही है। नदी के व्यवहार और कटान की स्थिति का अध्ययन करने के बाद भविष्य में स्थायी प्रोजेक्ट तैयार किया जाएगा। फिलहाल आवागमन सामान्य है और अब गड्ढे को पाटने के लिए कम हो रहा है। मैं खुद लगातार मॉनिटरिंग कर रहा हूं।
-विकास कुमार सिंह, चीफ इंजीनियर, बाढ़ खंड गोरखपुर
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जवही दयाल से अहिरौलीदान तक छह किमी एपी बांध पर बढ़ा वाहनों का आवागमन
पडरौना। एपी तटबंध टूटने के बाद उसे बचाने और दोबारा मजबूत करने की कवायद चल रही है। टूटे हिस्से तक बोल्डर, मिट्टी और बोरियों की खेप पहुंचाने के लिए जवही दयाल से अहिरौलीदान तक करीब छह किलोमीटर लंबे एपी बांध के रास्ते पर डंपर और ट्रालियों का आवागमन बढ़ गया है। इससे पहले से जर्जर मुख्य बांध की सड़क अब जगह-जगह टूटने और धंसने लगी है।
एपी बांध की सड़क पर कई स्थानों पर गहरे गड्ढे हो गए हैं। सड़क की ऊपरी परत उखड़ गई है तो कहीं किनारे की मिट्टी दबकर नीचे बैठ गई है। भारी वाहनों के पहियों के निशान भी सड़क पर साफ दिखाई दे रहे हैं। इसी रास्ते से बोल्डर और मिट्टी लेकर वाहन एपी तटबंध के मरम्मत स्थल के रास्ते अहिरौलीदान के नवीन कटान स्थल तक पहुंच रहे हैं। क्षेत्र के लोगों का आरोप है कि पिछले नौ सालों में बंधे पर बनी सड़कों की मरम्मत नहीं हो सकी है, इसके लिए चलते आवागमन में लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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पहले सेवरही, पिपराघाट होते हुए इस बंधे पर लोग अहिरौलीदान होते हुए गोपालगंज जिले में अपने रिश्तेदारों के घर या निजी काम से आते-जाते थे। बाढ़ आने के बाद इस बांध पर डंपरों के द्वारा कटान स्थल पर मिट्टी, बोल्डर लेकर पहुंचाया जा रहा है। इससे बांध सड़क क्षतिग्रस्त हो रही है।
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मरम्मत सामग्री पहुंचाना यही मुख्य रास्ता
एपी तटबंध के टूटे हिस्से की मरम्मत के लिए बड़ी मात्रा में बोल्डर और मिट्टी पहुंचाने का यही मुख्य रास्ता है। इसी वजह से बांध की सड़क पर डंपरों की आवाजाही बढ़ी है। इसके अलावा अब नई जिम्मेदारी अहिरौली दान में भी जरूरी मैटेरियल पहुंचाना है। जवही दयाल से आगे बढ़ने पर बाघ भवानी, बाघाचौर और अहिरौलीदान की ओर सड़क कई जगह खराब मिलती है। बारिश और पहले से जर्जर स्थिति के बीच लगातार भारी वाहनों की आवाजाही से रास्ते पर आवागमन और मुश्किल हो गया है।
बांध की मरम्मत के साथ रास्ते को बचाने की चुनौती
फिलहाल विभाग की प्राथमिकता टूटे एपी तटबंध को सुरक्षित करना है। इसके लिए दिन-रात काम चल रहा है। लेकिन मरम्मत स्थल तक पहुंचने के लिए जिस मुख्य बांध की सड़क का इस्तेमाल हो रहा है, उसकी खराब होती स्थिति भी चिंता बढ़ा रही है। एक तरफ टूटे तटबंध को बचाने के लिए भारी मात्रा में सामग्री पहुंचानी है, दूसरी तरफ इसी काम के लिए इस्तेमाल हो रही सड़क लगातार दबाव झेल रही है। ऐसे में अब बांध की मरम्मत के साथ इस रास्ते की स्थिति संभालना भी चुनौती बन गया है। टूटे एपी तटबंध के आसपास मिट्टी भराई का काम शुरू कर दिया गया है। रिंग बांध के तैयार होने के बाद मरम्मत स्थल तक वाहनों की पहुंच पहले की तुलना में आसान हुई है।
वर्जन
फिलहाल एपी तटबंध को सामान्य विधि से तैयार किया जा रहा है। इसमें कोई नई तकनीक इस्तेमाल नहीं की जा रही है। नदी के व्यवहार और कटान की स्थिति का अध्ययन करने के बाद भविष्य में स्थायी प्रोजेक्ट तैयार किया जाएगा। फिलहाल आवागमन सामान्य है और अब गड्ढे को पाटने के लिए कम हो रहा है। मैं खुद लगातार मॉनिटरिंग कर रहा हूं।
-विकास कुमार सिंह, चीफ इंजीनियर, बाढ़ खंड गोरखपुर