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Kushinagar News: मां और पापा सॉरी...आप लोगों को जितना दुख देना था, दिया

Wed, 22 Apr 2026 01:09 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Wed, 22 Apr 2026 01:09 AM IST
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Mom and Dad, I'm sorry I have caused you all the pain I possibly could.
मृतक विवेक ने लिखा सुसाइट नोट।स्रोत-सोशल मीडिया
पडरौना। सेवरही थाना क्षेत्र के विवेक श्रीवास्तव की खुदकुशी मामले में मौके से मिले सुसाइड नोट में उसने ई-कॉमर्स बिजनेस के नाम पर ठगी और साजिश का खुलासा करते हुए अपने ही परिचितों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। नोट में लिखीं बातें पुलिस के लिए भी चौंकाने वाली हैं। सुसाइड नोट में विवेक ने अपने माता-पता से माफी मांगी है। लिखा है... मां और पापा सॉरी! आप लोगों को जितना दुख देना था, दिया। मंगलवार को दरवाजे पर जुटे लोगों के साथ बैठे गमजदा पिता इसी बात का जिक्र कर फकक पड़े। विवेक बी फार्मा की पढ़ाई करता था।
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सुसाइड नोट में उसने लिखा है कि उसे ऑनलाइन बिजनेस (फ्लिपकार्ट, मीशो आदि) शुरू कराने का झांसा देकर गोरखपुर बुलाया गया। वहां कुछ युवकों ने उसे अपने साथ रखा और भरोसे में लेकर बिजनेस शुरू कराने की बात की। इसके बाद उसके नाम पर एचडीएफसी, एक्सिस और सेंट्रल बैंक में खाते खुलवाए गए। सुसाइड नोट के मुताबिक, आरोपियों ने युवक को समझाया कि खाते में पैसा आएगा और दिल्ली से माल मंगाकर व्यापार किया जाएगा। इसी बहाने उसके खातों में पैसा मंगवाया गया और बाद में रकम निकाल ली गई।
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युवक ने आरोप लगाया कि साजिश के तहत उसे सिर्फ मोहरा बनाकर इस्तेमाल किया गया। युवक ने नोट में यह भी लिखा है कि जब उसे ठगी का अहसास हुआ तो उसने पुलिस और साइबर क्राइम में शिकायत करने की कोशिश की, लेकिन कहीं से राहत नहीं मिली। लगातार दबाव और मानसिक तनाव के चलते वह टूटता चला गया। सुसाइड नोट में युवक ने कुछ नामों का जिक्र करते हुए उन्हें इस पूरे मामले का जिम्मेदार ठहराया है।
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उसने साफ लिखा है कि इन लोगों की वजह से उसकी आर्थिक स्थिति बिगड़ी और परिवार की इज्जत भी दांव पर लग गई। आखिर में युवक ने अपने माता-पिता से माफी मांगते हुए लिखा कि वह अब इस मानसिक पीड़ा को सहन नहीं कर पा रहा है और उसके इस कदम के लिए दोषी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। पुलिस एक आरोपी से पूृछताछ के साथ ही बैंक खातों और लेन-देन की जांच भी शुरू कर दी गई है।
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आधुनिक दौर का एक असर..डिजिटल सपनों का अंधेरा सच



-आज के आधुनिक और डिजिटल युग में एक तरफ ऑनलाइन बैंकिंग, मोबाइल ट्रांजेक्शन और तेजी से बढ़ती कनेक्टिविटी ने युवाओं के लिए अवसरों के नए रास्ते खोले हैं, वहीं दूसरी ओर यही तकनीक अपराधियों के लिए भी नया हथियार बन गई है। छोटे कस्बों और गांवों के युवा, डिजिटल दुनिया से जुड़ तो रहे हैं, लेकिन उसकी बारीकियों से पूरी तरह वाकिफ नहीं हैं, जिससे वे सबसे आसान निशाना बन रहे हैं।

घर बैठे कमाई, खाता देकर कमिशन या छोटा काम, बड़ा फायदा जैसे लालच भरे ऑफर अब सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि व्हाट्सऐप कॉल, टेलीग्राम ग्रुप और लोकल संपर्कों के जरिए गांव-गांव तक पहुंच चुके हैं।ऐसे में बैंक खाता और पहचान पत्र अब सिर्फ व्यक्तिगत जरूरत नहीं, बल्कि अपराध की कड़ी बनते जा रहे हैं। कई मामलों में युवा अनजाने में ही साइबर फ्रॉड, फर्जी ट्रांजेक्शन और मनी लॉन्ड्रिंग जैसी गतिविधियों का हिस्सा बना दिए जाते हैं, और जब तक उन्हें इसकी गंभीरता समझ आती है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि डिजिटल साक्षरता की कमी और तेजी से बदलते तकनीकी माहौल के बीच जागरूकता की कमी ही इस तरह के अपराधों को बढ़ावा दे रही है। यही वजह है कि विवेक जैसे मामलों को केवल एक घटना मानकर नजरअंदाज करना खतरनाक होगा यह उस बदलते दौर का संकेत है, जहां सपनों की रफ्तार जितनी तेज हुई है, ठगी के तरीके उससे कहीं ज्यादा चालाक हो चुके हैं।

मृतक विवेक ने लिखा सुसाइट नोट।स्रोत-सोशल मीडिया

मृतक विवेक ने लिखा सुसाइट नोट।स्रोत-सोशल मीडिया

मृतक विवेक ने लिखा सुसाइट नोट।स्रोत-सोशल मीडिया

मृतक विवेक ने लिखा सुसाइट नोट।स्रोत-सोशल मीडिया

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