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टपकती छत के नीचे रखी हैं दवाइयां

Tue, 10 Aug 2021 10:48 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 10 Aug 2021 10:48 PM IST
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Medicines are kept under a leaking roof
टपकती छत के नीचे रखी हैं दवाइयां
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जर्जर भवन के कारण कमरे में घुसने से कतराते है कर्मचारी
डॉक्टर तो हैं, लेकिन अस्पताल के भवनों की दशा खराब
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। स्वास्थ्य के लिहाज से शहरवासियों का हर्ट माने जाने वाले पुरुष एवं नेत्र चिकित्सालय के स्वास्थ्यकर्मी डर के साए में रहने को विवश हैं। क्योंकि इस अस्पताल का दवा भंडार जर्जर कक्ष में स्थित है, जिसकी छत टूटकर गिर रही है। बारिश के दौरान छत भी टपकती है। फार्मासिस्ट केवल उतनी ही देर के लिए इस कक्ष में जाते हैं, जितनी देर दवा निकालने में लगती है। मरीजों का वार्ड भी जर्जर हाल में है। यही दशा अस्पताल के डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के आवास की है। जर्जर भवनों में रह रहे स्वास्थ्यकर्मी हमेशा अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं।
शहर की लगभग 70 हजार की आबादी के लिए संचालित पडरौना के पुरुष एवं नेत्र चिकित्सालय का पुराना भवन जर्जर हो गया है। इसी भवन में अस्पताल दवा भंडार है। छत का प्लास्टर टूटकर गिर गया है और उसमें दरारें पड़ गई हैं। बारिश होने पर उससे पानी टपकता है। इसी कक्ष में दवाइयां रखी जाती हैं, जिनके सीलन की वजह से खराब होने का अंदेशा रहता है। इसके फार्मासिस्ट छत गिरने के भय से हमेशा सशंकित रहते हैं।
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वर्ष 2007 से पहले तक जिला अस्पताल की भूमिका निभाने वाले इस अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग में ही इमरजेंसी कक्ष, दवा भंडार कक्ष, इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर, एक्सरे कक्ष, पैथालॉजी और पर्ची काउंटर भी संचालित होता है। मरीजों को भर्ती करने के लिए 30 बेड का वार्ड भी है। इसी दीवारें और छतों में भी कहीं दरारें तो कहीं प्लास्टर टूटकर गिर रहा है। इस वजह से यहां आने वाले मरीजों के साथ-साथ अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मियों को भी खतरे का अंदेशा बना रहता है। इसके अलावा डॉक्टरों के आवास भी अस्पताल परिसर और इसके इर्द-गिर्द हैं। यह भवन भी जर्जर हालत में हैं। कहीं प्लास्टर टूटकर गिर रहा है तो कहीं दीवारों में दरारें पड़ गई हैं। इस बाबत प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. अनूप कुमार ने बताया कि भवन वर्ष 1957 के बने हैं और जर्जर हालत में हैं। भवन के जीर्णोद्घार के लिए उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। कई मर्तबा अपने कार्यकाल में भी इस निमित्त पत्राचार कर चुके हैं। अभी तक इन भवनों के निर्माण के संबंध में शासन की तरफ से कोई पहल नहीं हो पाई है।
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अलग संचालित होती है ओपीडी
वर्ष 2007 के बाद अगर कोई नया भवन बना है तो वह पुरुष एवं नेत्र चिकित्सालय की ओपीडी और आंखों के ऑपरेशन के लिए ओटी है। ओटी को कोविड टीकाकरण बनाया गया है, जबकि ओपीडी में प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. अनूूप कुमार, हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव सुमन, बालरोग विशेषज्ञ डॉ. एसपी चौहान का कक्ष है। इसके अलावा कुष्ठरोग एवं होम्योपैथी विभाग का एक-एक कक्ष, ऑप्टोमेट्रिक कक्ष और दवा काउंटर संचालित किया जाता है।
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