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Kushinagar News: बालू सिंडिकेट से रहा माफिया विनोद का नाता, ग्रामीणों के विरोध पर हथियार छोड़कर भागे थे गुर्गे
Fri, 12 Jan 2024 12:54 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Fri, 12 Jan 2024 12:54 AM IST
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कप्तानगंज (कुशीनगर)। गोरखपुर के माफिया विनोद उपाध्याय के अवैध धंधे कुशीनगर जनपद में भी फैले थे। वर्ष 2008 में बसपा सरकार में बड़े नेताओं की शह पर बालू खनन में सिंडिकेट के जरिए मोटी कमाई करता था। उसके गुर्गे खनन अधिकारी बनकर बालू घाट पर मारपीट कर पैसा वसूली करने के मामले में जेल भी गए थे। वहां से हथियार भी बरामद हुए थे। उसके गुर्गे कप्तानगंज क्षेत्र से होकर गुजरने वाली छोटी गंडक नदी के हसनगंज, भिऊरा, साहबगंज, मिश्रौली, मलुकही, सेमरा, रगड़गंज, सोहसा मठिया सहित अन्य बालू घाटों पर इसके गुर्गे वसूली करते थे।
जनपद से होकर गुजरने वाली बड़ी गंडक और छोटी गंडक नदी में अवैध बालू खनन बहुत पहले से होता रहा है। छोटी गंडक का क्षेत्र पड़ोस के महराजगंज जनपद से सटता है। इसी तरह जनपद का कप्तानगंज इलाका गोरखपुर से सटा है। बताया जाता है कि छोटी गंडक नदी में अवैध बालू खनन पर गोरखपुर के माफिया विनोद उपाध्याय की नजर पड़ गई थी। वर्ष 2008 में माफिया के चार गुर्गे असलहा और चार पहिया वाहनों से कप्तानगंज कस्बे से सटे और महराजगंज जनपद की सीमा के हसनगंज भीउरा बालू घाट पर धमक गए और अपने को खनन अधिकारी बताते हुए जबरिया पैसा वसूली करते हुए वहां मौजूद लोगों को मारने पीटने लगे। इसकी जानकारी गांव के लोगों और ठेकेदार को हुई तो मौके पर पहुंचे और सभी को चारों तरफ से घेर लिया। इसकी सूचना तत्कालीन एसओ ओमप्रकाश चौहान को मिली तो उन सभी लोगों को मुक्त कराकर थाने लाए थे। घटनास्थल पर राइफल और बोलेरो को भी कब्जे में लेकर सभी चारों आरोपियों को जेल भेज दिया था। उनका संबंध देवरिया जिले से बताया गया था और वे सभी विनोद उपाध्याय के गुर्गे थे। उसके बाद भी माफिया विनोद उपाध्याय ने उस समय किसी शराब माफिया से ताल्लुक रखते हुए सिंडिकेट को माध्यम बनाकर कप्तानगंज में एक कार्यालय खोलकर 50 से अधिक युवाओं को बालू खनन से जोड़ रखा था। उनके जरिए बालू घाटों से वसूली कराता था। उसकी अनुमति के बिना किसी को ठेका नहीं मिलता था। आलम यह था कि जिस भी बालू घाट पर उसका कोई गुर्गा जाता तो राइफल और लग्जरी दो गाड़ियां जरूर रहती थीं। कौन कैसे मानेगा, इसके लिए सबको अलग-अलग जिम्मेदारियां भी सौंपी गई थीं। बीच बीच में माफिया विनोद उपाध्याय भी आता जाता था। करीब तीन वर्षों तक उसकी हनक कप्तानगंज तहसील क्षेत्र में रही।
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जनपद से होकर गुजरने वाली बड़ी गंडक और छोटी गंडक नदी में अवैध बालू खनन बहुत पहले से होता रहा है। छोटी गंडक का क्षेत्र पड़ोस के महराजगंज जनपद से सटता है। इसी तरह जनपद का कप्तानगंज इलाका गोरखपुर से सटा है। बताया जाता है कि छोटी गंडक नदी में अवैध बालू खनन पर गोरखपुर के माफिया विनोद उपाध्याय की नजर पड़ गई थी। वर्ष 2008 में माफिया के चार गुर्गे असलहा और चार पहिया वाहनों से कप्तानगंज कस्बे से सटे और महराजगंज जनपद की सीमा के हसनगंज भीउरा बालू घाट पर धमक गए और अपने को खनन अधिकारी बताते हुए जबरिया पैसा वसूली करते हुए वहां मौजूद लोगों को मारने पीटने लगे। इसकी जानकारी गांव के लोगों और ठेकेदार को हुई तो मौके पर पहुंचे और सभी को चारों तरफ से घेर लिया। इसकी सूचना तत्कालीन एसओ ओमप्रकाश चौहान को मिली तो उन सभी लोगों को मुक्त कराकर थाने लाए थे। घटनास्थल पर राइफल और बोलेरो को भी कब्जे में लेकर सभी चारों आरोपियों को जेल भेज दिया था। उनका संबंध देवरिया जिले से बताया गया था और वे सभी विनोद उपाध्याय के गुर्गे थे। उसके बाद भी माफिया विनोद उपाध्याय ने उस समय किसी शराब माफिया से ताल्लुक रखते हुए सिंडिकेट को माध्यम बनाकर कप्तानगंज में एक कार्यालय खोलकर 50 से अधिक युवाओं को बालू खनन से जोड़ रखा था। उनके जरिए बालू घाटों से वसूली कराता था। उसकी अनुमति के बिना किसी को ठेका नहीं मिलता था। आलम यह था कि जिस भी बालू घाट पर उसका कोई गुर्गा जाता तो राइफल और लग्जरी दो गाड़ियां जरूर रहती थीं। कौन कैसे मानेगा, इसके लिए सबको अलग-अलग जिम्मेदारियां भी सौंपी गई थीं। बीच बीच में माफिया विनोद उपाध्याय भी आता जाता था। करीब तीन वर्षों तक उसकी हनक कप्तानगंज तहसील क्षेत्र में रही।
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