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साहित्य एक सांस्कृतिक उत्पाद, रचनाकार के प्रति होना चाहिए ऋणी का भाव : प्रो.अनिल राय
Wed, 20 Mar 2024 01:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Wed, 20 Mar 2024 01:00 AM IST
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पकवा इनार। बुद्ध पीजी कॉलेज के भंते सभगार में हिंदी विभाग की ओर से मंगलवार को ''उत्तर कबीर नंगा फकीर'' पर परिचर्चा आयोजित हुई। यह उपन्यास प्रसिद्ध समकालीन कथाकार प्रोफेसर केएन तिवारी का है।
गोरखपुर विश्वविद्यालय हिंदी विभाग के आचार्य व आलोचक प्रोफेसर अनिल राय ने कहा कि साहित्य एक सांस्कृतिक उत्पाद है। समाज को रचनाकार के प्रति ऋणी का भाव होना चाहिए। यह उपन्यास स्वातंत्र्योत्तर भारत के राजनीतिक ढांचे एवं भारतीय समाज के बड़े मुद्दों से सीधे टकराता है। बड़ा रचनाकार दो समयांतराल के बीच एवं दो महापुरुषों के बीच किस तरह एक संवाद स्थापित कर देता है, यह उपन्यास इसका उदाहरण है। डॉ. गौरव तिवारी ने उत्तर कबीर नंगा फ़कीर उपन्यास को लेखक की रचनात्मक उपलब्धि बताया। उन्होंने इसे स्वाधीन भारत की सर्जनात्मक आलोचना के रूप में देखने की वकालत की। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य प्रोफेसर विनोद मोहन मिश्र ने और संचालन डॉ. आशुतोष तिवारी ने किया। अंत में हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर राजेश कुमार सिंह ने अतिथियों के प्रति आभार जताया।
इस दौरान डॉ. अभिषेक शुक्ल, प्रोफेसर अमृतांशु शुक्ल, प्रोफेसर राम भूषण मिश्र, प्रोफेसर सीमा त्रिपाठी, डॉ. इंद्रजीत मिश्र, प्रोफेसर रेखा तिवारी, डॉ. अंबिका प्रसाद तिवारी, डॉ. राम नवल, डॉ. दीपक, वीरेंद्र साहू, कृष्ण कुमार जयसवाल, राकेश सोनकर, अवनीश तिवारी आदि मौजूद रहे।
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गोरखपुर विश्वविद्यालय हिंदी विभाग के आचार्य व आलोचक प्रोफेसर अनिल राय ने कहा कि साहित्य एक सांस्कृतिक उत्पाद है। समाज को रचनाकार के प्रति ऋणी का भाव होना चाहिए। यह उपन्यास स्वातंत्र्योत्तर भारत के राजनीतिक ढांचे एवं भारतीय समाज के बड़े मुद्दों से सीधे टकराता है। बड़ा रचनाकार दो समयांतराल के बीच एवं दो महापुरुषों के बीच किस तरह एक संवाद स्थापित कर देता है, यह उपन्यास इसका उदाहरण है। डॉ. गौरव तिवारी ने उत्तर कबीर नंगा फ़कीर उपन्यास को लेखक की रचनात्मक उपलब्धि बताया। उन्होंने इसे स्वाधीन भारत की सर्जनात्मक आलोचना के रूप में देखने की वकालत की। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य प्रोफेसर विनोद मोहन मिश्र ने और संचालन डॉ. आशुतोष तिवारी ने किया। अंत में हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर राजेश कुमार सिंह ने अतिथियों के प्रति आभार जताया।
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इस दौरान डॉ. अभिषेक शुक्ल, प्रोफेसर अमृतांशु शुक्ल, प्रोफेसर राम भूषण मिश्र, प्रोफेसर सीमा त्रिपाठी, डॉ. इंद्रजीत मिश्र, प्रोफेसर रेखा तिवारी, डॉ. अंबिका प्रसाद तिवारी, डॉ. राम नवल, डॉ. दीपक, वीरेंद्र साहू, कृष्ण कुमार जयसवाल, राकेश सोनकर, अवनीश तिवारी आदि मौजूद रहे।
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