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Kushinagar News: शराब तस्करों ने बदला ट्रेंड, चोरी की बाइक से पहुंचा रहे खेप
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पडरौना। शराब तस्करी पर पुलिस की सख्ती के बीच तस्करों ने अपना तरीका बदल लिया है। अब शराब की तस्करी में चोरी की बाइकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
इन बाइकों के चेसिस नंबर और नंबर प्लेट से इस कदर छेड़छाड़ की जा रही है कि वाहन बरामद होने के बावजूद पुलिस तस्करों की पहचान नहीं कर पा रही है। इसका सीधा असर यह है कि तस्करी के नेटवर्क तक पहुंचना पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ है।
कुशीनगर जिला बिहार के गोपालगंज, पश्चिमी चंपारण और सिवान जिलों से सटा है। बिहार में पूर्ण शराबबंदी के कारण वहां इसकी मांग अधिक बताई जा रही है। इसी का फायदा उठाकर तस्कर सीमावर्ती इलाकों से शराब बिहार पहुंचाने की कोशिश में लगे रहते हैं। पुलिस की निगरानी बढ़ने के बाद तस्कर अब हाईवे और मुख्य मार्गों की बजाय पगडंडियों और वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
पुलिस ने जब बिहार सीमा से जुड़े मार्गों पर बैरियर लगाकर सख्ती की तो तस्करों ने स्थानीय युवकों को कैरियर के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। ये युवक बाइक से शराब की खेप पगडंडियों के जरिये बिहार पहुंचा रहे हैं। इस नए तरीके के चलते तरयासुजान, बरवापट्टी और जटहां बाजार थाना क्षेत्र की पुलिस के सामने निगरानी की चुनौती बढ़ गई है।
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सूत्रों के अनुसार तरयासुजान थाना क्षेत्र का अहिरौलीदान गांव शराब तस्करों का एक ठिकाना बनता जा रहा है। बताया जा रहा है कि नदी किनारे शराब डंप करने के बाद नाव के जरिये बिहार भेजी जाती है। हालांकि पुलिस इससे जुड़े मामलों की जांच कर रही है और पूर्व में कुछ मामलों में बरामदगी भी की जा चुकी है।
बीते तीन महीनों में पुलिस ने शराब के साथ कई बाइकों को जब्त किया है, लेकिन अधिकतर मामलों में तस्कर मौके से फरार हो गए। जब्त बाइकों के चेसिस नंबर घिसे होने और नंबर प्लेट न होने के कारण यह पता नहीं चल सका कि वाहन किसके हैं और कहां से चोरी किए गए थे।
पुलिस का मानना है कि तस्कर जानबूझकर चोरी के वाहनों का इस्तेमाल कर रहे हैं, ताकि पकड़े जाने की स्थिति में उनकी पहचान और नेटवर्क तक पुलिस न पहुंच सके।
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इन बाइकों के चेसिस नंबर और नंबर प्लेट से इस कदर छेड़छाड़ की जा रही है कि वाहन बरामद होने के बावजूद पुलिस तस्करों की पहचान नहीं कर पा रही है। इसका सीधा असर यह है कि तस्करी के नेटवर्क तक पहुंचना पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ है।
कुशीनगर जिला बिहार के गोपालगंज, पश्चिमी चंपारण और सिवान जिलों से सटा है। बिहार में पूर्ण शराबबंदी के कारण वहां इसकी मांग अधिक बताई जा रही है। इसी का फायदा उठाकर तस्कर सीमावर्ती इलाकों से शराब बिहार पहुंचाने की कोशिश में लगे रहते हैं। पुलिस की निगरानी बढ़ने के बाद तस्कर अब हाईवे और मुख्य मार्गों की बजाय पगडंडियों और वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
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पुलिस ने जब बिहार सीमा से जुड़े मार्गों पर बैरियर लगाकर सख्ती की तो तस्करों ने स्थानीय युवकों को कैरियर के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। ये युवक बाइक से शराब की खेप पगडंडियों के जरिये बिहार पहुंचा रहे हैं। इस नए तरीके के चलते तरयासुजान, बरवापट्टी और जटहां बाजार थाना क्षेत्र की पुलिस के सामने निगरानी की चुनौती बढ़ गई है।
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सूत्रों के अनुसार तरयासुजान थाना क्षेत्र का अहिरौलीदान गांव शराब तस्करों का एक ठिकाना बनता जा रहा है। बताया जा रहा है कि नदी किनारे शराब डंप करने के बाद नाव के जरिये बिहार भेजी जाती है। हालांकि पुलिस इससे जुड़े मामलों की जांच कर रही है और पूर्व में कुछ मामलों में बरामदगी भी की जा चुकी है।
बीते तीन महीनों में पुलिस ने शराब के साथ कई बाइकों को जब्त किया है, लेकिन अधिकतर मामलों में तस्कर मौके से फरार हो गए। जब्त बाइकों के चेसिस नंबर घिसे होने और नंबर प्लेट न होने के कारण यह पता नहीं चल सका कि वाहन किसके हैं और कहां से चोरी किए गए थे।
पुलिस का मानना है कि तस्कर जानबूझकर चोरी के वाहनों का इस्तेमाल कर रहे हैं, ताकि पकड़े जाने की स्थिति में उनकी पहचान और नेटवर्क तक पुलिस न पहुंच सके।