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तेंदुआ निकले या बाघ, पकड़ेंगे खाली हाथ

Wed, 28 Sep 2022 12:07 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 28 Sep 2022 12:07 AM IST
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Leopard or tiger, will be caught empty handed
तेंदुआ की फाइल फोटो। - फोटो : KUSHINAGAR
तेंदुआ निकले या बाघ, पकड़ेंगे खाली हाथ
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लाठी-डंडों के सहारे करते जानवरों की तलाश करते हैं वनकर्मी
पडरौना/पकड़ियार बाजार। जंगली जानवरों से निपटने के लिए वनकर्मियों के पास संसाधनों का टोटा है। तेंदुआ या बाघ निकलने पर वनकर्मी खाली हाथ उन्हें पकड़ने निकल पड़ते हैं। ग्रामीणों की मदद से लाठी-डंडे और टार्च की रोशनी में जंगली जानवरों की तलाश करते हैं।
नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र के हरपुर और कुइयां में 22 सितंबर को जंगली जानवर के हमले में आठ लोग घायल हो गए थे। जंगली जानवर की तलाश में वनकर्मियों की टीम लगातार कांबिंग कर रही है। हालत ये हैं कि यदि अचानक तेंदुआ सामने आ जाए तो वनकर्मी अपनी सुरक्षा नहीं कर पाएंगे। खड्डा वन रेंज क्षेत्र से वाल्मीकि नगर टाइगर रिजर्व सटा हुआ है, इसलिए इस क्षेत्र में जंगली जानवरों की आवाजाही बनी रहती है।
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घटनाओं पर गौर करें तो 28 अक्तूबर 2021 को मदनपुर सुकरौली में चारा काटने गई कोईली देवी की जंगली जानवर के हमले में मौत हो गई थी। 16 जून 2021 को शिवपुर में तेंदुआ ने दो लोगों को घायल कर दिया था। 27 मार्च 2021 को लखुआ गांव में तेंदुआ ने हमला कर पांच लोगों को घायल किया था। एक अप्रैल 2021 को भेड़ी जंगलगाव में तेंदुआ के हमले में चार लोगों सहित तत्कालीन खड्डा रेंजर वीके यादव घायल हुए थे।
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ये संसाधन होने चाहिए मौजूद
वाइल्ड लाइफ प्रशिक्षण प्राप्त वनकर्मी, जानवर को बेहोश करने वाली ट्रेंकुलाइज गन, हाईड्रोलिक वाहन, नाइटविजन दूरबीन होनी चाहिए, झाड़ियों, खेतों और जंगलों में अभियान के दौरान सांपों से बचने के लिए स्नेक कैचर साथ में जरूरी है, रात में जंगली जानवरों की तलाश के लिए लेजर टार्च भी जरूरी है।

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इतने संसाधन मौजूद
एक जीप
एक जाल
दो पिंजरा
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वर्जन
मौजूद संसाधनों की मदद से तेंदुआ की तलाश की जा रही है। पदचिह्न की मदद से जानवर के विचरण करने की दिशा की जांच की जाती है। यहां आए दिन तेंदुआ, बाघ या अन्य जानवर निकलते रहते हैं। इन्हें काबू करने के लिए आधुनिक संसाधनों की आवश्यकता पड़ती है।
-देवेंद्र कुमार, रेंजर खड्डा
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