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ढाई माह में सिर्फ नौ गांवों की ही बन पाई घरौनी
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ढाई माह में सिर्फ नौ गांवों की ही बन पाई घरौनी
31 मार्च तक जिले के 1458 गांवों की घरौनी बनाने का है निर्देश
अब तक 528 गांवों का ही डाटा हो पाया है कंप्यूटरीकृत
उदयभान त्रिपाठी
पडरौना। गांवों में पुरानी आबादी की जमीन पर भी अब मालिकाना हक दिया जाना है। इसके लिए खतौनी की तर्ज पर ही घरौनी (घर की जमीन का कागज) बनाया जाना है। इसके लिए लेखपालों की टीम सत्यापन व डाटा इंट्री में लगी है। इन जमीनों का ड्रोन कैमरे से नक्शा बनाकर डिजिटल किया जाना है। जिले के 1458 गांवों में से अभी केवल नौ गांवों में ही कार्य पूरा हो पाया है। कसया, कप्तानगंज, खड्डा और तमकुहीराज तहसील में एक भी गांव की घरौनी का काम पूरा नहीं हो पाया है।
गांवों में चकबंदी से पहले बसी आबादी की जमीन को डीह (पुरानी आबादी) माना जाता है। राजस्व अभिलेख में इन जमीनों पर न तो किसी काम नाम होता है और न ही नक्शा। इस पर जिसका कब्जा होता है, जमीन उसी की मानी जाती है। आबादी बढ़ने के बाद डीह की जमीनों को लेकर विवाद शुरू हो गए। राजस्व अभिलेख में विस्तृत वर्णन नहीं होने के चलते ऐसे मामलों का उचित निस्तारण नहीं हो पाता है। इसको देखते हुए सरकार ने खतौनी (खेती की जमीन का रिकार्ड) की तर्ज पर घरौनी (घर की जमीन का अभिलेख) तैयार करने का निर्देश दिया था। इसके लिए लेखपालों की ड्यूटी लगाई गई है। इसमें पहले लेखपाल को प्रपत्र पांच तैयार करना है। जिसमें जमीन के क्षेत्रफल (चौहदी) और उस पर बने मकान का विवरण दर्ज होगा। प्रपत्र पांच के आधार पर इस विवरण को कंप्यूटर में फीड किया जाएगा। कंप्यूटरीकृत डाटा तैयार होने के बाद क्षेत्रफल (चौहदी) के अनुसार जमीन पर चूना गिराकर सीमांकन किया जाएगा। इसके बाद ड्रोन कैमरे से मैपिंग कर डिजिटल रूप दिया जाएगा। प्रक्रिया पूरी होने के बाद घरौनी जारी होगी। यह पूरी प्रक्रिया 31 मार्च तक पूरी होनी है। बावजूद इसके ढाई महीने में केवल नौ गांवों की ही घरौनी बन सकी है। इसके अलावा 528 गांवों में प्रपत्र पांच बनाकर डाटा अपलोड हुआ है। शेष 930 गांवों में अभी तक प्रपत्र पांच का भी काम पूरा नहीं हो पाया है।
इन गांवों में पूरी हुई घरौनी
जिन नौ गांवों में घरौनी का काम पूरा हुआ है, उसमें पडरौना तहसील के चार गांव हरका हनुमंत गिरी, हरका बैजनाथ मल्ल, रसूलपुर व धीरपट्टी हैं। इसके अलावा हाटा तहसील के पांच गांव सुबुधिया खुर्द, भगवानपुर बुजुर्ग, भगवानपुर खुर्द, चक नीलकंठ और बढ़या खुर्द में भी घरौनी बन चुकी है।
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जमीन का हक मिलने पर खत्म होंगे विवाद
तमकुहीराज तहसील के गांव रामपुर बरहन में डीह की जमीन को लेकर दो पक्षों में लंबे अरस से विवाद चल रहा है। कई बार खूनी संघर्ष हो चुका है लेकिन विवाद खत्म नहीं हो पा रहा है। वजह यह कि डीह की इस जमीन के विवाद का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। बासंगांव में भी ऐसा ही विवाद लंबे समय से कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती का सबब बना हुआ है। पडरौना तहसील के लेखपाल योगेंद्र गुप्ता व तमकुहीराज तहसील के लेखपाल हीरालाल का कहना है कि डीह की जमीन का नक्शा व क्षेत्रफल (चौहदी) निर्धारित नहीं होने के चलते इस तरह के मामलों में राजस्व या पुलिस प्रशासन भी सीधे कोई कार्रवाई करने की स्थिति में नहीं होता है। मामला कोर्ट में भी जाता है तो कब्जा और सहन (सुविधा) के आधार पर ही मामले का निस्तारण होता है जिससे विवाद खत्म नहीं होता। घरौनी बन जाने के बाद ऐसे मामलों का कानूनी तरीके से हल निकालना संभव हो सकेगा।
जल्दी पूरा कराया जाएगा काम : एडीएम
एडीएम विंध्यवासिनी राय का कहना है कि घरौनी का काम तेजी से पूरा कराया जाएगा। लेखपालों ने 528 गांवों में प्रपत्र पांच का काम पूरा कर लिया है जिसे कंप्यूटराइज भी कराया जा चुका है। नौ गांवों में घरौनी काम पूरा कर लिया गया है। शेष गांवों में ड्रोन कैमरा उपलब्ध होते ही मैपिंग का काम कराया जाएगा। 31 मार्च से पहले प्रक्रिया को पूरा कर लिया जाएगा।
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31 मार्च तक जिले के 1458 गांवों की घरौनी बनाने का है निर्देश
अब तक 528 गांवों का ही डाटा हो पाया है कंप्यूटरीकृत
उदयभान त्रिपाठी
पडरौना। गांवों में पुरानी आबादी की जमीन पर भी अब मालिकाना हक दिया जाना है। इसके लिए खतौनी की तर्ज पर ही घरौनी (घर की जमीन का कागज) बनाया जाना है। इसके लिए लेखपालों की टीम सत्यापन व डाटा इंट्री में लगी है। इन जमीनों का ड्रोन कैमरे से नक्शा बनाकर डिजिटल किया जाना है। जिले के 1458 गांवों में से अभी केवल नौ गांवों में ही कार्य पूरा हो पाया है। कसया, कप्तानगंज, खड्डा और तमकुहीराज तहसील में एक भी गांव की घरौनी का काम पूरा नहीं हो पाया है।
गांवों में चकबंदी से पहले बसी आबादी की जमीन को डीह (पुरानी आबादी) माना जाता है। राजस्व अभिलेख में इन जमीनों पर न तो किसी काम नाम होता है और न ही नक्शा। इस पर जिसका कब्जा होता है, जमीन उसी की मानी जाती है। आबादी बढ़ने के बाद डीह की जमीनों को लेकर विवाद शुरू हो गए। राजस्व अभिलेख में विस्तृत वर्णन नहीं होने के चलते ऐसे मामलों का उचित निस्तारण नहीं हो पाता है। इसको देखते हुए सरकार ने खतौनी (खेती की जमीन का रिकार्ड) की तर्ज पर घरौनी (घर की जमीन का अभिलेख) तैयार करने का निर्देश दिया था। इसके लिए लेखपालों की ड्यूटी लगाई गई है। इसमें पहले लेखपाल को प्रपत्र पांच तैयार करना है। जिसमें जमीन के क्षेत्रफल (चौहदी) और उस पर बने मकान का विवरण दर्ज होगा। प्रपत्र पांच के आधार पर इस विवरण को कंप्यूटर में फीड किया जाएगा। कंप्यूटरीकृत डाटा तैयार होने के बाद क्षेत्रफल (चौहदी) के अनुसार जमीन पर चूना गिराकर सीमांकन किया जाएगा। इसके बाद ड्रोन कैमरे से मैपिंग कर डिजिटल रूप दिया जाएगा। प्रक्रिया पूरी होने के बाद घरौनी जारी होगी। यह पूरी प्रक्रिया 31 मार्च तक पूरी होनी है। बावजूद इसके ढाई महीने में केवल नौ गांवों की ही घरौनी बन सकी है। इसके अलावा 528 गांवों में प्रपत्र पांच बनाकर डाटा अपलोड हुआ है। शेष 930 गांवों में अभी तक प्रपत्र पांच का भी काम पूरा नहीं हो पाया है।
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इन गांवों में पूरी हुई घरौनी
जिन नौ गांवों में घरौनी का काम पूरा हुआ है, उसमें पडरौना तहसील के चार गांव हरका हनुमंत गिरी, हरका बैजनाथ मल्ल, रसूलपुर व धीरपट्टी हैं। इसके अलावा हाटा तहसील के पांच गांव सुबुधिया खुर्द, भगवानपुर बुजुर्ग, भगवानपुर खुर्द, चक नीलकंठ और बढ़या खुर्द में भी घरौनी बन चुकी है।
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जमीन का हक मिलने पर खत्म होंगे विवाद
तमकुहीराज तहसील के गांव रामपुर बरहन में डीह की जमीन को लेकर दो पक्षों में लंबे अरस से विवाद चल रहा है। कई बार खूनी संघर्ष हो चुका है लेकिन विवाद खत्म नहीं हो पा रहा है। वजह यह कि डीह की इस जमीन के विवाद का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। बासंगांव में भी ऐसा ही विवाद लंबे समय से कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती का सबब बना हुआ है। पडरौना तहसील के लेखपाल योगेंद्र गुप्ता व तमकुहीराज तहसील के लेखपाल हीरालाल का कहना है कि डीह की जमीन का नक्शा व क्षेत्रफल (चौहदी) निर्धारित नहीं होने के चलते इस तरह के मामलों में राजस्व या पुलिस प्रशासन भी सीधे कोई कार्रवाई करने की स्थिति में नहीं होता है। मामला कोर्ट में भी जाता है तो कब्जा और सहन (सुविधा) के आधार पर ही मामले का निस्तारण होता है जिससे विवाद खत्म नहीं होता। घरौनी बन जाने के बाद ऐसे मामलों का कानूनी तरीके से हल निकालना संभव हो सकेगा।
जल्दी पूरा कराया जाएगा काम : एडीएम
एडीएम विंध्यवासिनी राय का कहना है कि घरौनी का काम तेजी से पूरा कराया जाएगा। लेखपालों ने 528 गांवों में प्रपत्र पांच का काम पूरा कर लिया है जिसे कंप्यूटराइज भी कराया जा चुका है। नौ गांवों में घरौनी काम पूरा कर लिया गया है। शेष गांवों में ड्रोन कैमरा उपलब्ध होते ही मैपिंग का काम कराया जाएगा। 31 मार्च से पहले प्रक्रिया को पूरा कर लिया जाएगा।