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सामाजिक क्रांति के अग्रदूत थे ललई : चंद्र भूषण
Mon, 02 Sep 2024 06:07 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Mon, 02 Sep 2024 06:07 AM IST
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कसया। भदंत ज्ञानेश्वर बुद्ध विहार में रविवार को पेरियार ललई सिंह यादव बौद्ध की 113वीं जयंती समारोहपूर्वक मनाई गई। शुभारंभ भगवान बुद्ध की प्रतिमा और ललई सिंह यादव के चित्र पर पुष्पार्चन से हुआ।
मुख्य वक्ता चंद्रभूषण सिंह यादव ने कहा कि ललई सिंह यादव सामाजिक क्रांति के अग्रदूत थे। उन्होंने सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार किया। बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अनेक पुस्तकों की रचना की और पुरस्कार भी प्राप्त किया था। उनकी सर्वाधिक चर्चित पुस्तक सच्ची रामायण है।
अध्यक्षता कर रहे डीपीआर डिग्री कॉलेज सीवान (बिहार) के अंग्रेजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. बीरेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि पेरियार ललई सिंह यादव बौद्ध समाज सुधारक थे। उन्होंने बौद्ध धर्म अपनाने और उनके जीवन पर विस्तार से प्रकाश डाला। उनके जीवन चरित्र को पढ़ने व समझने की जरूरत है। इससे भारत में बड़ी सामाजिक क्रांति आ जाएगी।
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उन्होंने कहा कि भारत को विश्वगुरु बनने के लिए मंदिर, मस्जिद नहीं बल्कि, विश्वविद्यालयों की आवश्यकता है। सुझाव दिया कि लोगों को ललई सिंह की सच्ची रामायण पढ़नी चाहिए। कार्यक्रम को पूर्व एमएलसी महेंद्र यादव, राम अधार कुशवाहा, नीतीश विश्वकर्मा, डॉ. राघवेंद्र सिंह पटेल, आनंद यादव, विक्रमा यादव ने भी संबोधित किया। संचालन पारस बौद्ध ने किया। भंते मुलायम ने आभार जताया। इस दौरान हरिशंकर राजभर, रामप्रवेश यादव, सुबोध शर्मा, रामनगीना, अशोक कुमार, लालबिहारी, पुरंदर प्रताप यादव, लल्लन, जावेद, भगवती प्रसाद बौद्ध, गौरीशंकर, फेंकू यादव, श्रवण कुमार आदि मौजूद रहे।
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मुख्य वक्ता चंद्रभूषण सिंह यादव ने कहा कि ललई सिंह यादव सामाजिक क्रांति के अग्रदूत थे। उन्होंने सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार किया। बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अनेक पुस्तकों की रचना की और पुरस्कार भी प्राप्त किया था। उनकी सर्वाधिक चर्चित पुस्तक सच्ची रामायण है।
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अध्यक्षता कर रहे डीपीआर डिग्री कॉलेज सीवान (बिहार) के अंग्रेजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. बीरेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि पेरियार ललई सिंह यादव बौद्ध समाज सुधारक थे। उन्होंने बौद्ध धर्म अपनाने और उनके जीवन पर विस्तार से प्रकाश डाला। उनके जीवन चरित्र को पढ़ने व समझने की जरूरत है। इससे भारत में बड़ी सामाजिक क्रांति आ जाएगी।
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उन्होंने कहा कि भारत को विश्वगुरु बनने के लिए मंदिर, मस्जिद नहीं बल्कि, विश्वविद्यालयों की आवश्यकता है। सुझाव दिया कि लोगों को ललई सिंह की सच्ची रामायण पढ़नी चाहिए। कार्यक्रम को पूर्व एमएलसी महेंद्र यादव, राम अधार कुशवाहा, नीतीश विश्वकर्मा, डॉ. राघवेंद्र सिंह पटेल, आनंद यादव, विक्रमा यादव ने भी संबोधित किया। संचालन पारस बौद्ध ने किया। भंते मुलायम ने आभार जताया। इस दौरान हरिशंकर राजभर, रामप्रवेश यादव, सुबोध शर्मा, रामनगीना, अशोक कुमार, लालबिहारी, पुरंदर प्रताप यादव, लल्लन, जावेद, भगवती प्रसाद बौद्ध, गौरीशंकर, फेंकू यादव, श्रवण कुमार आदि मौजूद रहे।